30/12/2025
ग्रेजुएशन के बाद आपने तुरंत जॉब या आगे की पढ़ाई क्यों नहीं की?
आंसर 1 (सबसे सुरक्षित – तैयारी पर फोकस):
"सर/मैम,
ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद मेरे सामने दो रास्ते थे – या तो तुरंत प्राइवेट जॉब या पोस्ट-ग्रेजुएशन करके एक निश्चित करियर चुन लूं, या अपना असली लक्ष्य – सिविल सेवा – पर पूरा फोकस करूं। मैं शुरू से ही बिहार/राजस्थान की समस्याओं जैसे गरीबी, शिक्षा की कमी, बाढ़, बेरोजगारी को प्रशासनिक स्तर से सुलझाने का सपना देखता था। प्राइवेट जॉब या सामान्य पोस्ट-ग्रेजुएशन मुझे व्यक्तिगत सफलता तो देता, लेकिन समाज पर इतना बड़ा प्रभाव नहीं डाल पाता। इसलिए मैंने तय किया कि इस कीमती समय को सिविल सेवा की मजबूत तैयारी में लगाऊंगा। इस दौरान मैंने घर पर ही अनुशासन के साथ सेल्फ-स्टडी शुरू की:NCERT की किताबें दोबारा पढ़ीं, रोज द हिंदू/प्रभात खबर/दैनिक जागरण पढ़ता और नोट्स बनाता, ऑनलाइन लेक्चर्स और पिछले साल के पेपर्स सॉल्व करता, साथ ही अपनी कम्युनिकेशन और एनालिटिकल स्किल्स सुधारने के लिए किताबें (जैसे भारत का संविधान, भारतीय अर्थव्यवस्था) गहराई से पढ़ीं।
मुझे लगता है कि यह समय व्यर्थ नहीं गया, बल्कि इसने मुझे ज्यादा परिपक्व, फोकस्ड और समाज की वास्तविकताओं को समझने वाला बनाया – जो एक अच्छे प्रशासक के लिए सबसे जरूरी है।"
आंसर 2 (अगर पार्ट-टाइम काम या सोशल एक्टिविटी की):
"सर,
ग्रेजुएशन के बाद मैंने सोचा कि अगर तुरंत जॉब या आगे की पढ़ाई करूंगा तो वह मुझे सिविल सेवा के लक्ष्य से दूर ले जाएगा। इसलिए मैंने इसे प्राथमिकता दी। हालांकि, समय का पूरा उपयोग करने के लिए मैंने:कुछ महीनों तक लोकल कोचिंग में बच्चों को पढ़ाया, जिससे मेरी खुद की पढ़ाई का रिवीजन होता रहा और कम्युनिकेशन स्किल बेहतर हुई,
गांव/मोहल्ले में स्वच्छता अभियान या बच्चों को फ्री ट्यूशन जैसे छोटे सोशल वर्क में हिस्सा लिया,
बाकी समय पूरी तरह सेल्फ-स्टडी पर लगाया – स्टैंडर्ड बुक्स, मॉक टेस्ट और करंट अफेयर्स।
यह अनुभव मुझे किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यावहारिक समझ दे रहा है, जो आगे प्रशासन में बहुत काम आएगा।"
आंसर 3 (अगर फैमिली या आर्थिक कारण थे – सावधानी से):
"सर,
ग्रेजुएशन के बाद घर की कुछ जिम्मेदारियां थीं, इसलिए फुल-टाइम जॉब या बाहर जाकर आगे की पढ़ाई तुरंत संभव नहीं थी। लेकिन मैंने इस समय को व्यर्थ नहीं जाने दिया। मैं घर पर ही रहकर सिविल सेवा की तैयारी पर फोकस किया – रोज 8-10 घंटे पढ़ाई, न्यूजपेपर, मैगजीन्स और ऑनलाइन रिसोर्सेज का इस्तेमाल। साथ ही घर की मदद करते हुए लोकल स्तर पर लोगों की समस्याएं (जैसे सरकारी योजनाओं की जानकारी न होना) करीब से देखीं और समझीं। यह अनुभव मुझे ग्राउंड रियलिटी की गहरी समझ दे रहा है, जो एक प्रशासक के लिए किताबों से ज्यादा मूल्यवान है।"