05/02/2026
कभी-कभी इंसान की महत्वाकांक्षा इतनी बड़ी हो जाती है कि वह रिश्तों और ममता की आवाज भी नहीं सुन पाता। आज अखबार में छपी एक खबर ने दिल को अंदर तक झकझोर दिया। सरपंच बनने की चाहत में एक परिवार ने अपनी ही मासूम बेटी को खो दिया। सोचिए… जिस बच्ची की किलकारी से घर गूंजता होगा, वही बच्ची आज इस दुनिया में नहीं है।
कहा जाता है कि बच्चे भगवान का रूप होते हैं। घर में जब एक बेटी जन्म लेती है तो वह अपने साथ खुशियाँ और उम्मीदें लेकर आती है। लेकिन उस मासूम को क्या पता था कि उसकी सांसें किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा से छोटी पड़ जाएंगी। उसे क्या पता था कि जिस घर को वह अपना संसार समझती है, वही घर उसकी आखिरी मंजिल बन जाएगा।
सरपंच बनने के लिए तीन बच्चों की शर्त शायद कानून की नजर में सही लगती हो, लेकिन जब यह शर्त इंसानियत से बड़ी हो जाए तो दिल सवाल जरूर करता है। क्या कोई पद, कोई कुर्सी, किसी बच्चे की जिंदगी से ज्यादा जरूरी हो सकती है? क्या समाज में प्रतिष्ठा पाने की चाह इतनी बड़ी हो सकती है कि एक पिता-माता अपने ही बच्चे की हंसी छीन लें?
इस घटना ने सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि पूरे समाज के दिल पर घाव दिया है। यह केवल कानून या राजनीति की बात नहीं है, यह हमारी सोच का आईना है। आज भी कई जगह बेटियों को बोझ समझा जाता है। हम मंचों से बेटियों को देवी कहते हैं, लेकिन असल जिंदगी में उन्हें जीने का अधिकार भी नहीं दे पाते।
सोचिए… उस बच्ची के कितने छोटे-छोटे सपने होंगे। शायद वह स्कूल जाने की जिद करती होगी, शायद अपने माता-पिता के साथ खेलना चाहती होगी, शायद बड़ी होकर कुछ बनने का सपना देखती होगी। लेकिन उसके सारे सपने बिना आवाज के टूट गए।
यह घटना हमें झकझोर कर पूछ रही है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं। अगर समाज में पद और प्रतिष्ठा रिश्तों से ऊपर हो जाए, तो यह केवल एक परिवार की नहीं, पूरी मानवता की हार है।
आज जरूरत है कि हम सिर्फ कानून बनाने की नहीं, बल्कि दिलों में इंसानियत जगाने की कोशिश करें। बेटियों को बचाने के नारे लगाने से ज्यादा जरूरी है उन्हें सच में जीने का हक देना। हर बच्चा, चाहे बेटा हो या बेटी, इस दुनिया में प्यार और सुरक्षा पाने का हकदार है।
अगर हम सच में एक बेहतर समाज बनाना चाहते हैं, तो हमें यह याद रखना होगा कि कोई भी कुर्सी, कोई भी पद, किसी मासूम की जिंदगी से बड़ा नहीं हो सकता। क्योंकि जब एक बच्चा इस दुनिया से जाता है, तो सिर्फ एक जिंदगी नहीं जाती… बल्कि एक पूरा भविष्य खत्म हो जाता है।