04/08/2026
BJP के हर नेता और समर्थक तक पहुँचाइये यह संदेश।
कैसे BJP बहुत कमजोर नींव पर टिकी है?
मैं पहले भी यह बात कहता रहा हूँ कि धर्म-जाति की राजनीति की उम्र बहुत कम होती है। धर्म जाति के नाम पर लोगों का वोट लेकर उन्हें एक दो बार तो मूर्ख बनाया जा सकता है परन्तु जिस दिन लोगों को यह अहसास हो जाता है कि इस धर्म जाति की , बांटने की राजनीति का फ़ायदा उठाकर हमारा नेता तो सत्ता की मलाई काट रहा है, पार्टी तो लगातार बड़ी होती जा रही है परन्तु उस व्यक्ति का परिवार पिछड़ता जा रहा है तो फिर वह जितनी मुखरता से उस नेता या पार्टी का समर्थन कर रहा होता है उससे भी अधिक मुखर होकर वह उस नेता या पार्टी का विरोध करने लगता है।
किसी नेता और पार्टी को यह बात समझनी ही होगी कि जाति-धर्म का मुद्दा आपको सत्ता में ला तो सकता है परन्तु लम्बे समय तक केवल इस मुद्दे के आधार पर सत्ता में टिके नहीं रहा जा सकता। सत्ता में टिके रहना है तो लोगों के लिए काम भी करना होगा। लोगों की समस्याओं को समस्या मानना होगा और उनका समाधान करना होगा भले ही व्यक्ति ने आपको रोजगार देने, महंगाई कम करने, शिक्षा के स्तर को सुधारने, लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक करने के मुद्दे पर सत्ता में ना भी पहुंचाया हो फिर भी वे यह उम्मीद तो करते ही हैं कि हमारी सरकार हमारी इन मूलभूत सुविधाओं का तो ध्यान रखेंगे ही। परन्तु जब सरकारें उनके और उनके बच्चों के लिए जरूरी सुविधाएं भी दे पाने में असफल रहती हैं तो फिर धीरे-धीरे जब जाति-धर्म का बुख़ार लोगों के दिमाग से उतरता है तो वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस करते हैं।
आज भारतीय जनता पार्टी और उनके नेताओं के साथ यही हो रहा है। जिन लोगों ने 12 वर्ष पहले भाजपा को वोट दिया था आज वे और उनके बच्चे ही जब भाजपा से सवाल कर रहे हैं तो बजाए उनके सवालों के जवाब देने, उनकी समस्याओं का समाधान करने के उनके बच्चों और उन्हें ही देशद्रोही कहा जा रहा है तो वे समझ ही नहीं पा रहे कि यह हो क्या रहा है?
जिस पार्टी और नेता का उन्होंने खुलकर निःस्वार्थ समर्थन किया, लोगों ने न अपना रोजगार देखा, न परिवार देखा, नोटबंदी जैसे घटिया फ़ैसले तक का समर्थन कर दिया, गलत GST से व्यापार तबाह हुए पर सब सह लिया, लॉकडाउन ने कमर तोड़ दी, क़र्ज़े के कारण पूरी तरह बर्बाद हो गए सब सह लिया कि शायद कल सब सही होगा, हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित रहेगा। परन्तु जब देखा कि बच्चों का भविष्य भी बर्बाद हो रहा है, भ्रष्टाचार इस हद तक बढ़ गया कि बच्चों के पेपर लीक होने लगे, बच्चों को छोटी मोटी नौकरी मिलना मुश्किल हो गया और जब इसपर आवाज़ उठाई तो पता चला कि उन्हें ही देशद्रोही कहा जा रहा है।
किसी भी नेता और पार्टी के साथ ऐसे समय में यही होता है जो अब भाजपा के साथ होना शुरू हुआ है। भले ही पार्टी बड़ी है, तो उसके समाप्त होने में भी समय लगेगा परन्तु बांकीपुर से इसकी शुरूआत जरूर हो गई है। अब या तो भाजपा स्वयं को RSS से अलग करे और देश हित के सभी मुद्दों पर काम करे, लोगों की समस्याओं को समस्या माने और उनका समाधान करे या फिर अपने पतन की राह पर चलना शुरू करे। अब BJP के पास तीसरा कोई विकल्प नहीं है। धर्म-जाति की राजनीति सत्ता में लाने में तो मदद कर सकती है परन्तु सत्ता में टिके रहने के लिए. लम्बी राजनीति करने में अघिक मदद नहीं कर सकती।
जय हिन्द, जय भारत