Vanvasi Kalyan Ashram Delhi

Vanvasi Kalyan Ashram Delhi for welfare of tribals/vanvasi.Doing work for their education,health,culture,literature & economic devlopment.
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16/04/2024
वनबन्धु पत्रिका के संपादक श्री शिवकुमार कौल जी की श्रद्धांजलि सभा, 14 अप्रैल2024,नई दिल्ली।Vanvasi Kalyan Ashram, Navi M...
14/04/2024

वनबन्धु पत्रिका के संपादक श्री शिवकुमार कौल जी की श्रद्धांजलि सभा, 14 अप्रैल2024,नई दिल्ली।

Vanvasi Kalyan Ashram, Navi Mumbai
Vanvasi Kalyan Kendra, Jharkhand
Vanvasi Kalyan Ashram punjab
Vanvasi Kalyan Ashram West Bengal
Vanvasi Kalyan Ashram Haryana
Shree Gujarat Vanvasi Kalyan Parishad
Rajasthan Vanvasi Kalyan Parishad
Vanvasi Kalyan Ashram Andaman
वनवासी कल्याण केन्द्र
वनवासी कल्याण परिषद मध्यभारत
वनवासी कल्याण आश्रम जांभिवली
जनजाति कल्याण आश्रम गुजरात

भारतीय नववर्ष विक्रमी सम्वत 2081 की हार्दिक शुभकामनाएं। #विक्रमीसंवत #हिन्दू_नववर्ष  #विक्रमसंवत
09/04/2024

भारतीय नववर्ष विक्रमी सम्वत 2081 की हार्दिक शुभकामनाएं।

#विक्रमीसंवत
#हिन्दू_नववर्ष

#विक्रमसंवत

31/03/2024
16/01/2024

प्राण प्रतिष्ठा और संबंधित आयोजनों का विवरण:

1. आयोजन तिथि और स्थल: भगवान श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा योग का शुभ मुहूर्त, पौष शुक्ल कूर्म द्वादशी, विक्रम संवत 2080, यानी सोमवार, 22 जनवरी, 2024 को आ रहा है।

2. शास्त्रीय पद्धति और समारोह-पूर्व परंपराएं: सभी शास्त्रीय परंपराओं का पालन करते हुए, प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अभिजीत मुहूर्त में संपन्न किया जाएगा। प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व शुभ संस्कारों का प्रारंभ कल अर्थात 16 जनवरी 2024 से होगा, जो 21 जनवरी, 2024 तक चलेगा।

द्वादश अधिवास निम्नानुसार आयोजित होंगे:-
-16 जनवरी: प्रायश्चित्त और कर्मकूटि पूजन
-17 जनवरी: मूर्ति का परिसर प्रवेश
-18 जनवरी (सायं): तीर्थ पूजन, जल यात्रा, जलाधिवास और गंधाधिवास
-19 जनवरी (प्रातः): औषधाधिवास, केसराधिवास, घृताधिवास
-19 जनवरी (सायं): धान्याधिवास
-20 जनवरी (प्रातः): शर्कराधिवास, फलाधिवास
-20 जनवरी (सायं): पुष्पाधिवास
-21 जनवरी (सायं): शय्याधिवास

3. अधिवास प्रक्रिया एवं आचार्य: सामान्यत: प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सात अधिवास होते हैं और न्यूनतम तीन अधिवास अभ्यास में होते हैं। समारोह के अनुष्ठान की सभी प्रक्रियाओं का समन्वय, समर्थन और मार्गदर्शन करने वाले 121 आचार्य होंगे। श्री गणेशवर शास्त्री द्रविड़ सभी प्रक्रियाओं की निगरानी, समन्वय और दिशा-निर्देशन करेंगे, तथा काशी के श्री लक्ष्मीकांत दीक्षित मुख्य आचार्य होंगे।

4. विशिष्ट अतिथिगण: प्राण प्रतिष्ठा भारत के आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, उत्तर प्रदेश के आदरणीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में होगी।
5. विविध प्रतिष्ठान: भारतीय आध्यात्मिकता, धर्म, संप्रदाय, पूजा पद्धति, परंपरा के सभी विद्यालयों के आचार्य, 150 से अधिक परंपराओं के संत, महामंडलेश्वर, मंडलेश्वर, श्रीमहंत, महंत, नागा सहित 50 से अधिक आदिवासी, गिरिवासी, तातवासी, द्वीपवासी आदिवासी परंपराओं के प्रमुख व्यक्तियों की कार्यक्रम में उपस्थिति रहेगी, जो श्री राम मंदिर परिसर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दर्शन हेतु पधारेंगे।

6. ऐतिहासिक आदिवासी प्रतिभाग: भारत के इतिहास में प्रथम बार पहाड़ों, वनों, तटीय क्षेत्रों, द्वीपों आदि के वासियों द्वारा एक स्थान पर ऐसे किसी समारोह में प्रतिभाग किया जा रहा है। यह अपने आप में अद्वितीय होगा।

7. समाहित परंपराएँ: शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, पात्य, सिख, बौद्ध, जैन, दशनाम शंकर, रामानंद, रामानुज, निम्बार्क, माध्व, विष्णु नामी, रामसनेही,घिसापंथ, गरीबदासी, गौड़ीय, कबीरपंथी, वाल्मीकि, शंकरदेव (असम), माधव देव, इस्कॉन, रामकृष्ण मिशन, चिन्मय मिशन, भारत सेवाश्रम संघ, गायत्री परिवार, अनुकूल चंद्र ठाकुर परंपरा, ओडिशा के महिमा समाज, अकाली, निरंकारी, नामधारी (पंजाब), राधास्वामी और स्वामीनारायण, वारकरी, वीर शैव इत्यादि कई सम्मानित परंपराएँ इसमें भाग लेंगी।

8. दर्शन और उत्सव: गर्भ-गृह में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के पूर्ण होने के बाद, सभी साक्षी महानुभावों को दर्शन कराया जाएगा। श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए हर जगह उत्साह का भाव है। इसे अयोध्या समेत पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाने का संकल्प किया गया है। समारोह के पूर्व विभिन्न राज्यों के लोग लगातार जल, मिट्टी, सोना, चांदी, मणियां, कपड़े, आभूषण, विशाल घंटे, ढोल, सुगंध इत्यादि के साथ आ रहे हैं। उनमें से सबसे उल्लेखनीय थे माँ जानकी के मायके द्वारा भेजे गए भार (एक बेटी के घर स्थापना के समय भेजे जाने वाले उपहार) जो जनकपुर (नेपाल) और सीतामढ़ी (बिहार) के ननिहाल से अयोध्या लाए गए। रायपुर, दंडकारण्य क्षेत्र स्थित प्रभु के ननिहाल से भी विभिन्न प्रकार के आभूषणों आदि के उपहार भेजे गए हैं।

वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली प्रांत द्वारा संचालित शहीद जादोनांग छात्रावास,नरेला का वार्षिक उत्सव 17 दिसम्बर 2023 को भव्य ...
17/12/2023

वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली प्रांत द्वारा संचालित शहीद जादोनांग छात्रावास,नरेला का वार्षिक उत्सव 17 दिसम्बर 2023 को भव्य एवं दिव्य रूप में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री अनंत नायक जी (सदस्य, अनुसूचित जनजाति आयोग, भारत सरकार) रहे , अध्यक्षता श्री प्रवीण लाकड़ा जी ने की। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्री डाल चंद जी रहे। मंच से क्षेत्र के कई विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया गया इसके साथ साथ छात्रावास के बालकों ने पूर्वोत्तर की लोक कला को प्रदर्शित करते सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
कार्यकम में प्रांत अध्यक्ष श्री सुशील बाहेती जी, प्रांतीय महासचिव अजीत शुक्ला जी,प्रांत संगठन मंत्री धनीराम जी, छात्रावास समिति के अध्यक्ष सुभाष जी,महिला आयाम प्रमुख भारती वार्ष्णेय जी, दिल्ली महानगर के अनेक दानदाता एवं सहयोगी बन्धु, छात्रावास संचालन समिति के कार्यकर्ता, एवं दिल्ली के विभिन्न जगहों से आये सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
Vanvasi Kalyan Ashram Andaman
Vanvasi Kalyan Ashram Delhi
Vanvasi Kalyan Kendra Talasari
Vanvasi Kalyan Ashram Maharajganj
Vanvasi Kalyan Ashram,Delhi
Vanvasi Kalyan Ashram Sundargarh
Vanvasi Kalyan Ashram West Bengal
Vanvasi Kalyan Ashram, Delhi
Vanvasi kalyan parishad
Vanvasi Kalyan Ashram Delhi
Vanvasi Kalyan Ashram वनवासी कल्याण आश्रम, ठाणे जिल्हा महानगर
Vanavasi Kalyana Karnataka
Vanavasi Kalyan Ashram
वनवासी कन्या छात्रावास रुद्रपुर
वनवासी कल्याण आश्रम परिषद् खरगोन
वनवासी कल्याण आश्रम, बिहार प्रदेश
वनवासी कल्याण आश्रम अकोले
वनवासी कल्याण आश्रम
वनवासी कल्याण आश्रम
वनवासी कल्याण परिषद मध्यभारत
Akhil Bharatiya Vanvasi Kalyan Ashram
National Commission for Scheduled Tribes

*जनजाति गौरव दिवस लाखों जनजाति सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।*वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली क...
27/11/2023

*जनजाति गौरव दिवस लाखों जनजाति सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।*

वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली के उत्तरी विभाग द्वारा 19 नवम्बर 2023 को प्रशांत विहार,दिल्ली में *जनजातीय गौरव दिवस* मनाया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री प्रमोद पेठकर थे।अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजसेवी सतीश ढुल ने की।
अपने संबोधन में प्रमोद पेठकर जी ने जनजातीय गौरव दिवस मनाने की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा द्वारा अंग्रेजों द्वारा भोले भाले जनजाति समाज के लोगों के धर्मांतरण के विरुद्ध किये संघर्ष के बारे में बताया।
बिरसा मुंडा ने अपने गुरिल्ला युद्ध के द्वारा अंग्रेजों को थका दिया था। बालक बिरसा के दिल में विरोध तब उठा जब ईसाईयों द्वारा उनकी चोटी काट दी गई।इस घटना के बाद बिरसा मुंडा अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन में कूद पड़े।
उन्होंने आगे बताया कि जनजाति गौरव दिवस केवल भगवान बिरसा मुंडा का जन्मदिन मनाने का उत्सव नहीं है,अपितु यह उन लाखों जनजाति सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है,जिन्होंने इस देश व जनजाति समाज की रक्षा करने के लिये अपना जीवन बलिदान कर दिया।
कार्यक्रम में नरेला छात्रावास के बच्चों द्वारा बैम्बू नृत्य व कई अन्य जनजाति नृत्य प्रस्तुत किये गए।कार्यक्रम में रोहिणी के विधायक विजेंद्र गुप्ता व निगम पार्षद श्रीमती रितु गोयल भी उपस्थित रही।प्रान्त उपाध्यक्ष तिलक चांदना जी ने एक कहानी के द्वारा वनवासी समाज की समृद्ध संस्कृति के बारे में बताया। धन्यवाद ज्ञापन विभाग अध्यक्ष सोहनलाल अग्रवाल ने दिया।
कार्यक्रम का संचालन विभाग के कार्यकर्ता संदीप द्वारा किया गया।आये हुए सभी आगंतुक बंधुओं का पटका पहना कर अभिनंदन किया गया।

#जनजातीय_गौरव_दिवस
#जनजाति #वनवासी

22/11/2023
*जनजाति गौरव दिवस लाखों जनजाति सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।*वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली क...
22/11/2023

*जनजाति गौरव दिवस लाखों जनजाति सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है।*

वनवासी कल्याण आश्रम दिल्ली के उत्तरी विभाग द्वारा 19 नवम्बर 2023 को प्रशांत विहार,दिल्ली में *जनजातीय गौरव दिवस* मनाया गया।इस अवसर पर मुख्य वक्ता वनवासी कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री प्रमोद पेठकर थे।अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजसेवी सतीश ढुल ने की।
अपने संबोधन में प्रमोद पेठकर जी ने जनजातीय गौरव दिवस मनाने की पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा द्वारा अंग्रेजों द्वारा भोले भाले जनजाति समाज के लोगों के धर्मांतरण के विरुद्ध किये संघर्ष के बारे में बताया।
बिरसा मुंडा ने अपने गुरिल्ला युद्ध के द्वारा अंग्रेजों को थका दिया था। बालक बिरसा के दिल में विरोध तब उठा जब ईसाईयों द्वारा उनकी चोटी काट दी गई।इस घटना के बाद बिरसा मुंडा अंग्रेजों के विरुद्ध आंदोलन में कूद पड़े।
उन्होंने आगे बताया कि जनजाति गौरव दिवस केवल भगवान बिरसा मुंडा का जन्मदिन मनाने का उत्सव नहीं है,अपितु यह उन लाखों जनजाति सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है,जिन्होंने इस देश व जनजाति समाज की रक्षा करने के लिये अपना जीवन बलिदान कर दिया।
कार्यक्रम में नरेला छात्रावास के बच्चों द्वारा बैम्बू नृत्य व कई अन्य जनजाति नृत्य प्रस्तुत किये गए।कार्यक्रम में रोहिणी के विधायक विजेंद्र गुप्ता व निगम पार्षद श्रीमती रितु गोयल भी उपस्थित रही।प्रान्त उपाध्यक्ष तिलक चांदना जी ने एक कहानी के द्वारा वनवासी समाज की समृद्ध संस्कृति के बारे में बताया। धन्यवाद ज्ञापन विभाग अध्यक्ष सोहनलाल अग्रवाल ने दिया।
कार्यक्रम का संचालन विभाग के कार्यकर्ता संदीप द्वारा किया गया।आये हुए सभी आगंतुक बंधुओं का पटका पहना कर अभिनंदन किया गया।

17/11/2023

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