02/06/2026
झाड़ू नहीं, जातिगत भेदभाव और सामाजिक न्याय का मुद्दा है: मू. एडवोकेट पूनम बेदी
सोनीपत, हरियाणा | विशेष संवाददाता
पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी मू. एडवोकेट पूनम बेदी ने सफाई कर्मचारियों और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि समस्या किसी कार्य विशेष की नहीं, बल्कि समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और असमानता की है।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग सफाई कर्मचारियों को झाड़ू छोड़ने की सलाह देते हैं, लेकिन उन्हें यह समझना चाहिए कि वास्तविक समस्या झाड़ू नहीं बल्कि जाति आधारित व्यवस्था है। उनका कहना था कि यदि झाड़ू लगाना ही समस्या है, तो घरों में भी महिलाओं से झाड़ू-पोछा करवाने पर सवाल उठाया जाना चाहिए।
मू. एडवोकेट पूनम बेदी ने कहा कि समाज में फैली असमानताओं और भेदभाव को केवल भाषणों से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए जमीनी स्तर पर संघर्ष और संगठित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार खेत में उगी खरपतवार को हटाने के लिए खेत में उतरना पड़ता है, उसी प्रकार सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए भी सीधे संघर्ष करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सफाई कार्य केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के सभी देशों में यह एक आवश्यक सेवा के रूप में मौजूद है। वर्तमान समय में सफाई कार्य विभिन्न समुदायों और जातियों के लोग कर रहे हैं। उन्होंने सोनीपत नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कई गैर-पारंपरिक समुदायों के लोग इस कार्य में जुड़े हुए हैं।
मू. पूनम बेदी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई झाड़ू या किसी पेशे के खिलाफ नहीं है, बल्कि निजीकरण, ठेका प्रथा, आर्थिक शोषण, सामाजिक भेदभाव और सामाजिक न्याय के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस संघर्ष में सहयोग नहीं कर सकता, तो कम से कम संघर्षरत लोगों को नसीहत देने से बचना चाहिए।
उन्होंने सामाजिक न्याय, समान अवसर और सम्मानजनक रोजगार की मांग को दोहराते हुए कहा कि मूलनिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
रिपोर्टर: Rahul Ranjan | Raja Gautam
प्रकाशक: MNT News Network
जय भीम | जय मूलनिवासी
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