28/09/2026
🚩 एक प्रत्यक्ष अनुभव जिसने सोच बदल दी: गृह मंत्री अमित शाह जी से भेंट और सहजता का साक्षात्कार 🚩
कल, परम पूज्य अमर हुतात्मा अशोक सिंघल जी के जन्म शताब्दी वर्ष समारोह (भारत मंडपम, दिल्ली) में एक ऐसा अविस्मरणीय क्षण आया, जिसने मन पर अमिट छाप छोड़ दी। अपने जीवनकाल में पहली बार देश के गृह मंत्री माननीय अमित शाह जी को इतने करीब से देखने और लगभग 1.5 से 2 घंटे तक उनके सानिध्य में रहने का अवसर प्राप्त हुआ।
अब तक उन्हें केवल टीवी, समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से ही जाना था। यद्यपि उनके प्रति मेरा दृष्टिकोण सदैव सकारात्मक रहा, फिर भी कभी-कभी सोशल मीडिया के दौर में नकारात्मक ख़बरों और तंजों के कारण मन में यह छवि उभर आती थी कि वे अत्यंत कठोर, दबंग और किसी की न सुनने वाले नेता होंगे। मन में यह प्रश्न भी उठता था कि "यदि वे इतने कठोर हैं, तो माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के इतने प्रिय क्यों हैं?"
यहाँ तक कि जब नितिन नबीन जी (एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले नेता) भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे और देश के गृह मंत्री होने के नाते अमित भाई स्वयं उनके स्वागत में इंतज़ार में खड़े थे, तब भी मन में एक क्षण को शंका हुई थी कि—"क्या यह वास्तव में सहजता है या कोई कूटनीतिक शिष्टाचार?"
लेकिन कल जो प्रत्यक्ष आँखों ने देखा, उसने सारी भ्रांतियाँ मिटा दीं!
आज के दौर में हम देखते हैं कि नए-नए प्रतिनिधि भी कार्यक्रमों में 'प्रोटोकॉल' और 'वीआईपी कल्चर' के नाम पर आयोजकों के लिए व्यवस्थागत चुनौतियाँ खड़ी कर देते हैं। अति-व्यस्तता के नाम पर 15-20 मिनट का समय देकर निकल जाते हैं, जिससे पूरे कार्यक्रम की गरिमा और योजना अस्त-व्यस्त हो जाती है।
परंतु कल भारत मंडपम में सब कुछ इसके बिल्कुल विपरीत और अनुकरणीय था:
🌸 सादगी और सहजता: देश के दूसरे सबसे शक्तिशाली पद पर आसीन होने के बावजूद, हॉल में उनका प्रवेश, औपचारिक स्थान ग्रहण करना और मंच पर पहुँचना—सब कुछ अत्यंत सपाट, शांत और सौम्य भाव से हुआ।
🎙️ मंच की गरिमा का सम्मान: मंचीय कार्यवाही के दौरान जब कार्यक्रम की एंकर बहन ने उनसे निवेदन किया, तो उन्होंने बेहद सहजता और आत्मीयता से उसे स्वीकार किया।
🛡️ अदृश्य एवं अनुशासित सुरक्षा: भारत के गृह मंत्री होने के बावजूद सुरक्षा कर्मियों की तैनाती इस तरह थी कि कार्यक्रम में एक पल के लिए भी कोई व्यवधान या असहजता उत्पन्न नहीं हुई।
⏳ पूर्ण समर्पण: वे केवल औपचारिकता निभाने नहीं आए थे, बल्कि पूरे कार्यक्रम में अंत तक बने रहे और श्रद्धेय अशोक सिंघल जी को भावांजलि अर्पित की।
"इतने विशाल व्यक्तित्व ने एक क्षण के लिए भी यह अहसास नहीं होने दिया कि वे देश की इतनी बड़ी हस्ती हैं और सामने बैठा समाज साधारण है।"
कल का यह अनुभव सिद्ध करता है कि वास्तविक नेतृत्व अडंबरों में नहीं, बल्कि चरित्र, अनुशासन और सादगी में बसता है। कल तक जो केवल एक राजनीतिक उत्सुकता थी, आज वह हृदय से निकले सच्चे सम्मान और प्रशंसा में बदल चुकी है।
जय श्री राम! जय सनातन!
विपिन अग्रवाल
सेवक की कलम से..........
Amit Shah BJP Gujarat
Amit Shah
Bharatiya Janata Party (BJP)
BJP Delhi
J.P.Nadda
Vishva Hindu Parishad -VHPl