20/12/2025
यह साफ़ दिखता है कि जब-जब इस तानाशाही सरकार की नाकामियाँ उजागर होने लगती हैं, तब-तब यह सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाने पर उतर आती है। जैसे ही इस सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदन में आया, तुरंत स्पीकर के माध्यम से विपक्ष के आठ विधायकों को नेम कर दिया गया। क्या यही लोकतंत्र है? क्या जनता ने हमें इसलिए चुना था कि सवाल उठाने वालों को चुप करा दिया जाए?
इस सरकार ने वंदे मातरम् की आड़ लेकर सदन की कार्यवाही को बाधित किया। मैं इस आरएसएस और भाजपा सरकार से सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ आरएसएस के ऐसे किसी भी दो व्यक्तियों के नाम बता दीजिए जिन्होंने इस देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी हो। जवाब में सन्नाटा मिलेगा।
इसके उलट, कांग्रेस का इतिहास बलिदानों से भरा पड़ा है। आज़ादी की लड़ाई में कांग्रेस के अनगिनत नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हँसते-हँसते फाँसी के फंदे चूमे, जेलों में सड़ते रहे, गोलियाँ खाईं। आज़ादी के बाद भी कांग्रेस ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए। देश की एकता और अखंडता के लिए इंदिरा गांधी जी ने अपने प्राणों की आहुति दी, देश के भविष्य और लोकतंत्र की मजबूती के लिए राजीव गांधी जी ने शहादत दी।
देशभक्ति के प्रमाणपत्र बाँटने का अधिकार किसी को नहीं है। वंदे मातरम् हमारे लिए नारा नहीं, बलिदान की परंपरा है। जो लोग आज सत्ता के बल पर सदन की आवाज़ दबा रहे हैं, उन्हें याद रखना चाहिए इतिहास सत्ता से नहीं, सच और बलिदान से लिखा जाता है। विपक्ष की आवाज़ दबाई जा सकती है, लेकिन जनता की आवाज़ को कभी नहीं - Jassi Petwar
#नारनौंद_का_जस्सी
#जस्सी_का_नारनौंद