08/05/2026
जो तुम्हारा नुकसान करें, चाहे वो आर्थिक हो या मनोवैज्ञानिक। उसकी सफाई कभी मत सुनना, भूल से भी नही। उसका पक्ष मत देखना, उसकी मजबूरी मत देखना। उसने अपने हितों को प्राथमिकता दी है। तुम्हारे नुकसान से उसने अपनी स्वार्थसिद्धि की है। ऐसे आत्मकेंद्रित नीच की कहानी पर अपनी करूणा व्यर्थ मत करना। ऐसा सबक सीखाना कि संसार मे अन्य कोई दुष्ट इरादतन तुम्हारा नुकसान करने के विषय मे भूल से भी ना सोचे।