03/06/2026
कभी कभी जब खाली समय में बैठ कर सोचता हूँ तो समझ आता है कि मेरे भीतर ऐसे कई सवाल उलझे हुए हैं जिनका जवाब मुझे कभी नहीं मिला, या फिर मैं कभी चाहता ही नहीं था कि इनका जवाब मुझे मिले..किसी खंडहर में लगे मकड़ी के जालों की तरह ही ये सवाल मेरे भीतर उलझे पड़े हैं..कभी कभी जब कुछ समझ नहीं आता है, जब वर्तमान बर्बाद और भविष्य शून्य नज़र आता है तब सबसे पहले यही सवाल मन में कौंध रहा होता है कि क्या तुम्हारे साथ गुजारा हुआ वक़्त सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी था..?
कुछ लोग आकर सवाल खड़े करेंगे, कहेंगे कि प्रेम में दिया गया समय बर्बाद कैसे हो सकता है..पर जब मैं उनसे कहूँगा कि ये कोई ऐसा वैसा समय नहीं था, ये समय मेरी वो उम्र थी जब मैं खुद के भविष्य को सवारने में लगा सकता था, 27 से 31 का ये समय बहुत ही महत्वपूर्ण था..लोग इस पर भी कहेंगे कि प्रेम और कैरियर साथ में बनाया जा सकता है, फिर मैं उन्हें बताऊँगा की मुझे प्रेम भी तो एक विवाहित स्त्री से हुआ था..तब उन्हें समझ आयेगा कि मैं ऐसे चक्रव्यूह में उलझा था जहाँ से मैं जितनी जल्दी निकल जाता उतना ही बेहतर होता..
जिस राह पर मंजिल मिलनी ही नहीं है, आखिर उस रस्ते हम कितना ही चलें, समय और हम दोनों खर्च ही होंगे..इसके अलावा हाथ क्या आयेगा..? ज्यादा से ज्यादा कुछ खट्टी मीठी यादें, और पछतावा इतना कि जिसके बोझ तले दबकर दम घुट जाए.. दम घुट भी जाए तो शायद समस्याओं का हल हो, लेकिन अज़ीब सा बोझ होता है इस पछतावे का, जो न तो जीने देता है, और न मरने देता है..प्रेम में मिले घाव लक्ष्मण जी को लगे उस तीर से भी खतरनाक हैं, क्योंकि उसका कम से कम इलाज तो था, प्रेम के घाव किसी संजीवनी बूटी से ठीक नहीं किये जा सकते हैं..
इन्हें समय लगता है, प्रेम में जितनी तेजी से समय बीतता है, ठीक इसके विपरीत होता है बिछड़ जाने के बाद वाला समय, ये इतनी धीमी रफ्तार से गुजरता है कि मानो हर एक पल का पता चलता है..समय की ये धीमी गति जले पर नमक की तरह होती है, लगता है कि जो हमारा महत्वपूर्ण समय था वो इतनी तेजी से बीता, पर अब सब कुछ इतना धीमा है कि दर्द का एहसास आत्मा तक को हो रहा है..
खैर, वर्तमान तुम्हारे जाने से बर्बाद हुआ, भविष्य तुम्हारे जाने के ग़म में डूबे रहने से बर्बाद हो रहा है, तुम्हारे साथ बिताए पल कभी कभी खुद के साथ की हुई बेइमानी से लगते हैं..लगता है जैसे मैंने खुद के साथ ही क्षल किया है..इस सब के बीच जो सबसे बड़ा दुःख इस बात का है कि मैं तुमसे बाहर ही नहीं आ पा रहा हूँ..मैं इतना सब सोचने के बाद भी तुम पर ही रुका हुआ हूँ..आगे बढ़ जाने का कोई रास्ता ही नजर आता है..लगता है कि जिस बिना मंज़िल वाली राह पर मैं तुम्हारे साथ चला था, अभी भी उसी में कहीं बस चला जा रहा हूँ, अब अकेले ही चला जा रहा हूँ..लेकिन उस राह से बाहर आने का कोई रास्ता ही नहीं है..ये शायद अनंतकाल तक ऐसे ही चलता रहेगा..और मैं इस पर अपनी आखिरी साँस तक..!!
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