26/03/2026
कड़वी सच्चाई
कुछ लोगों को बुरा लगेगा, लगने दो
कुछ सच बोलना पड़ता है ताकि वास्तविकता आप समझ सकें ..
सड़क में कचरा बीनने वाली, ट्रैफिक सिग्नल में भीख मांगने वाली या यहाँ वहां घूम कर कुछ छोटा मोटा सामान बेचने वाली बहुत सारी लड़कियां महिलाएं बहुत अच्छी उच्च चरित्र की भी होती हैं पर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इनमें से ही कुछ 50-100 रुपए के लिए किसी भिखारी के साथ, किसी नशेड़ी के साथ, किसी पाकिटमार, ब्लेडबाज़, किसी रिक्शा चालक के साथ या किसी बड़े आदमी के साथ भी 2-3 मिनट के लिए किसी कोने, किनारे, ओट में चली जाती है।
ऐसी लड़कियां महिलाएं खुद नशे की आदि होती हैं, चोरी, ब्लेड मारना, छीन झपट करना, जानवरों की तरह यौन संबंध उनके लिए ये सब दुष्कृत्य करना सामान्य जीवन का अंग होता है।
साथ ही साथ ऐसे ही माहौल में जन्म और पालन पोषण के साथ इनमें "सुपर इगो" विकसित नहीं हो पाता "सुपर इगो" यानि समाज में लोगों के बीच अपनी प्रतिष्ठा समाप्त होने का भय, ये ईड भाव में जीते हैं यानि मन किया तो खा लिया कुछ भी कैसे भी कहीं भी, मन किया तो कही भी मल मूत्र त्याग कर दिया, मन किया तो सो गए कहीं भी कभी भी, मन नहीं किया तो महीनों नहाना भी नहीं है, मन किया तो सड़क में पब्लिक प्लेस में कही भी जानवरों की तरह यौन संबंध बना लिया, कोई वीडियो बना लेगा, देखेगा, कोई क्या कहेगा? ये वाला भाव इनमें विकसित ही नहीं होता जिसे दर्शन शास्त्र में सुपर ईगो कहा जाता है,
अब ऐसी किसी लड़की महिला को आप एकदम से अचानक अच्छे माहौल में ले जाओ उसे कुछ समझ नहीं आएगा, उसे कूड़ा करकट शारिरिक वैचारिक गंदगी की ही आदत है, उसके मस्तिष्क में किसी का सम्मान प्रतिष्ठा, खुद का सम्मान प्रतिष्ठा, खुद के माता पिता का सम्मान प्रतिष्ठा ये कोई भाव विकसित ही नहीं हुआ होता है,
सामान्य भद्र लोक का व्यक्ति ऐसी किसी महिला लड़की को अपने बीच देखकर आश्चर्यचकित होता रहता है ये ऐसा कैसे बोल सकती है? ऐसा कैसा कर सकती है?
भाई सूअर को नाली की गंदगी में ही रस आता है आप उसे छप्पन भोग वाली रसोई में ले जाएंगे, फाइव स्टार होटल में ले जाएंगे, फ्लाइट में घुमाएंगे तो वो उसे पचेगा ही नहीं...
इसीलिए जहां सुधार की गुंजाइश हो वहां ही प्रयास करें, हर सड़कछाप हीरो नहीं बन सकता कुछ सड़कछाप सड़कछाप ही होते हैं ।
मोनालिसा प्रसंगवश
#फैज़ख़ान