Akhil Bhartiya Gurjar Mahasabha

Akhil Bhartiya Gurjar Mahasabha “एकता ही हमारी शक्ति है – संगठित समाज ही सशक्त समाज है।”

📢 महत्वपूर्ण सूचनाअखिल भारतीय गुर्जर महासभा (स्थापना 1908) द्वारा जारी आधिकारिक सूचना।समाज के सभी सम्मानित बंधुओं से विन...
01/08/2026

📢 महत्वपूर्ण सूचना

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (स्थापना 1908) द्वारा जारी आधिकारिक सूचना।

समाज के सभी सम्मानित बंधुओं से विनम्र निवेदन है कि कृपया इस सूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ें एवं अधिक से अधिक साझा करें, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति, भ्रामक प्रचार या गलत जानकारी से समाज के लोग सुरक्षित रह सकें।

समाजहित सर्वोपरि है। आइए, सत्य एवं संगठन के साथ आगे बढ़ें।

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गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुखे नमः ॥आप सभी को गुरु पूर्णिमा क...
29/07/2026

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुखे नमः ॥

आप सभी को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक. शुभकामनाएं।

सम्राट पृथ्वीराज चौहान का वास्तविक इतिहासयह विवरण पृथ्वीराज रासो पर आधारित नहीं है, जिसका वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों ब...
28/07/2026

सम्राट पृथ्वीराज चौहान का वास्तविक इतिहास
यह विवरण पृथ्वीराज रासो पर आधारित नहीं है, जिसका वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों बाद सामने आया, बल्कि उन शिलालेखों तथा समकालीन ग्रंथों पर आधारित है जिनका संबंध पृथ्वीराज चौहान के युग से है।
चाहमान वंश : राजपूत या गुर्जर?
यहीं से ऐतिहासिक विमर्श का आरंभ होता है।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान चाहमान वंश के शासक थे। प्रश्न यह है कि चाहमान वंश की ऐतिहासिक पहचान क्या थी?
ऐतिहासिक साक्ष्य
हर्ष शिलालेख (961 ईस्वी), जिसे स्वयं चाहमान शासकों द्वारा स्थापित कराया गया, यह उल्लेख करता है कि चाहमान वंश के शासक गुर्जर-प्रतिहार सम्राटों के सामंत थे। अर्थात् उस समय गुर्जर-प्रतिहार सर्वोच्च सत्ता थे और चाहमान उनके अधीन सामंत के रूप में कार्य करते थे।
इतिहासकार डॉ. डी. आर. भंडारकर, डॉ. दशरथ शर्मा तथा कर्नल जेम्स टॉड ने अपने अध्ययनों में प्रतिहार, चौहान, परमार तथा सोलंकी वंशों को अग्निवंशी गुर्जर परंपरा से संबद्ध माना है। उनके अनुसार तेरहवीं शताब्दी के पश्चात इन वंशों के लिए "राजपूत" शब्द का व्यापक प्रयोग होने लगा। उस काल में "राजपूत" शब्द का प्रयोग किसी जाति के रूप में नहीं, बल्कि "राजा के पुत्र" अथवा शासक वर्ग के लिए किया जाता था।
इस आधार पर यह मत प्रस्तुत किया जाता है कि चाहमान वंश मूलतः गुर्जर परंपरा की एक शाखा था।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान का जीवन
सम्राट पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1149 ईस्वी में अजमेर में हुआ। उनके पिता गुर्जर सम्राट सोमेश्वर चौहान तथा माता कर्पूरी देवी थीं। वर्ष 1178 ईस्वी में मात्र तेरह वर्ष की आयु में वे अजमेर के सिंहासन पर आसीन हुए।
उस समय अजमेर और दिल्ली दोनों पर चौहानों का अधिकार था। परंपरा के अनुसार उनके नाना गुर्जर सम्राट अनंगपाल तोमर ने दिल्ली का शासन उन्हें सौंपा। उनका राज्य वर्तमान राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विस्तृत था।
प्रमुख युद्ध
भटिंडा के किले पर अधिकार करने वाले मोहम्मद गौरी के सेनापति को पृथ्वीराज चौहान ने पराजित किया।
तराइन का प्रथम युद्ध (1191 ई.)
मोहम्मद गौरी लगभग 1,20,000 घुड़सवारों के साथ भारत आया। पृथ्वीराज चौहान ने उसे निर्णायक रूप से पराजित किया। गौरी युद्धभूमि से घायल अवस्था में भाग निकला। कहा जाता है कि पृथ्वीराज ने उसे जीवनदान दिया, जिसे बाद में उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक भूल माना गया।
तराइन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.)
एक वर्ष बाद मोहम्मद गौरी पुनः पूरी तैयारी के साथ लौटा। उस समय पृथ्वीराज की सेना थकी हुई थी तथा उनके अनेक सामंत असंतुष्ट बताए जाते हैं। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान पराजित हुए, बंदी बनाए गए और बाद में उनकी हत्या कर दी गई।
'पृथ्वीराज विजय' का उल्लेख
सम्राट पृथ्वीराज के दरबारी कवि जयानक द्वारा रचित पृथ्वीराज विजय उनके जीवनकाल का समकालीन ग्रंथ माना जाता है। इस ग्रंथ में संयोगिता-हरण की कथा का उल्लेख नहीं मिलता। यह कथा बाद के काल में पृथ्वीराज रासो के विस्तृत रूप में दिखाई देती है।
गुर्जरों से संबंध
सम्राट पृथ्वीराज चौहान के समय "राजपूत" शब्द का अर्थ वर्तमान अर्थ से भिन्न था। गुर्जर-प्रतिहार साम्राज्य के विघटन के पश्चात उसके सामंत—चौहान, परमार और सोलंकी—अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र शासक बने। बाद के काल में इन वंशों ने स्वयं को राजपूत के रूप में अभिहित करना आरंभ किया।
इसी कारण आज भी मेरठ, गाज़ियाबाद तथा राजस्थान सहित अनेक क्षेत्रों में चौहान गोत्र के गुर्जर स्वयं को सम्राट पृथ्वीराज चौहान का वंशज मानते हैं तथा वत्स गोत्र से अपना संबंध बताते हैं।
सार
सम्राट पृथ्वीराज चौहान निःसंदेह भारत के महानतम वीर शासकों में से एक थे। प्रस्तुत ऐतिहासिक मत के अनुसार, उपलब्ध शिलालेखों तथा इतिहासकारों के निष्कर्षों के आधार पर चाहमान वंश को गुर्जर-प्रतिहार परंपरा की एक शाखा माना गया है।

आज अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (1908) के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री हरिशचन्द्र भाटी जी (मंत्री जी) अपने दोनों घुटनों के...
23/07/2026

आज अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (1908) के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री हरिशचन्द्र भाटी जी (मंत्री जी) अपने दोनों घुटनों के सफल ऑपरेशन के पश्चात पूर्णतः स्वस्थ होकर राष्ट्रीय कार्यालय, गुर्जर भवन, कोटला, नई दिल्ली पधारे।
इस शुभ अवसर पर संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. जिलेराम जी, राष्ट्रीय महासचिव श्री रामकेश चपराना जी, युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुंदर चौधरी जी, राष्ट्रीय सचिव श्री अरुण भाटी जी सहित अन्य पदाधिकारियों ने पुष्पमालाएँ पहनाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने सभी पदाधिकारियों का स्नेहपूर्ण आभार व्यक्त करते हुए संगठन की एकता, मजबूती और समाजहित के कार्यों को और अधिक गति देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर अखिल भारतीय गुर्जर महासभा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करते रहेंगे।
Harish Chandra Bhati

04/07/2026

प्रेस विज्ञप्ति
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (1908) की राष्ट्रीय ऑनलाइन बैठक सफलतापूर्वक सम्पन्न
आज अखिल भारतीय गुर्जर महासभा (1908) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हरिश्चन्द्र भाटी (मंत्री जी) के दोनों घुटनों के सफल ऑपरेशन के उपरांत पहली बार ऑनलाइन बैठक के माध्यम से सभी पदाधिकारियों से आत्मीय संवाद हुआ। बैठक के प्रारम्भ में देशभर से जुड़े सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामनाएँ व्यक्त करते हुए उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।
आज दिनांक 04 जुलाई 2026 को दोपहर 12ः00 बजे से 1ः00 बजे तक आयोजित इस एक घंटे की राष्ट्रीय ऑनलाइन बैठक में आगामी 31 अक्टूबर 2026 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती के अवसर पर आयोजित होने वाली गुर्जर स्वाभिमान रैली की रूपरेखा, संगठनात्मक तैयारियों एवं सफल आयोजन को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हरिश्चन्द्र भाटी (मंत्री जी) ने सभी पदाधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए रैली को ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व बनाने का आह्वान किया। उन्होंने संगठन के प्रत्येक पदाधिकारी से अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने तथा समाज के अधिकाधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का आग्रह किया।
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए तथा अपने-अपने दायित्वों एवं क्षेत्रों के अनुसार जिम्मेदारियाँ स्वीकार कीं। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली गुर्जर स्वाभिमान रैली को ऐतिहासिक, भव्य एवं सफल बनाने के लिए पूर्ण समर्पण एवं एकजुटता के साथ कार्य करेंगे।
बैठक में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय संरक्षक डाॅ. यशवीर सिंह जी, कार्यकारी अध्यक्ष डाॅ. जिलेराम जी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री डाॅ. रूप सिंह जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री जयप्रकाश विकल जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सविन्दर भाटी जी, राष्ट्रीय महासचिव श्री रामकेश चपराणा जी, राष्ट्रीय सचिव श्री धीरेन्द्र वर्मा जी, राष्ट्रीय सचिव श्री अरुण भाटी जी, युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुन्दर चैधरी जी, युवा समन्वयक श्री नमित भाटी जी, मध्यप्रदेश प्रदेश अध्यक्ष श्री देवेन्द्र पटेल जी, हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष श्री महावीर छोकर जी, सहित देशभर से बड़ी संख्या में राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला एवं युवा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने सहभागिता की।

बैठक का समापन संगठन की मजबूती, सामाजिक एकता तथा 31 अक्टूबर 2026 को आयोजित होने वाली गुर्जर स्वाभिमान रैली को ऐतिहासिक सफलता दिलाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

04/07/2026

📢 अत्यंत महत्वपूर्ण स्मरण संदेश 📢

🙏 अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के सभी राष्ट्रीय, प्रांतीय, जिला एवं स्थानीय पदाधिकारियों, सम्मानित सदस्यों एवं समाजबंधुओं से विनम्र आग्रह है कि आज दिनांक 04 जुलाई 2026 (शनिवार) को दोपहर 12:00 बजे आयोजित होने वाली वर्चुअल बैठक में समय से अवश्य जुड़ें।

इस महत्वपूर्ण बैठक को अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री हरीश चन्द्र भाटी जी संबोधित करेंगे तथा संगठन की आगामी गतिविधियों एवं 31 अक्टूबर – लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के राष्ट्रीय कार्यक्रमों की रूपरेखा पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

🕛 समय: आज, दोपहर 12:00 बजे

आपकी सक्रिय सहभागिता ही संगठन की शक्ति है।

आइए, समय पर जुड़ें, संगठन को सशक्त बनाएं और राष्ट्रीय अध्यक्ष महोदय के प्रेरणादायी उद्बोधन का लाभ प्राप्त करें।

03/07/2026

Gurjar Mahasabha Rastriya karyakarini online meeting
Saturday, 4 Jul · 12 – 1 PM
Google Meet joining info
Video call link:

📢 आवश्यक सूचना एवं सादर आमंत्रण 📢अखिल भारतीय गुर्जर महासभासभी राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला एवं स्थानीय पदाधिकारियों, सम्मानित...
02/07/2026

📢 आवश्यक सूचना एवं सादर आमंत्रण 📢

अखिल भारतीय गुर्जर महासभा

सभी राष्ट्रीय, प्रदेश, जिला एवं स्थानीय पदाधिकारियों, सम्मानित सदस्यों तथा समाज के जागरूक साथियों से सादर अनुरोध है कि वे शनिवार, 04 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली वर्चुअल बैठक में अपनी गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित करें।

इस महत्वपूर्ण बैठक को अखिल भारतीय गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय श्री हरीश चन्द्र भाटी जी संबोधित करेंगे।

बैठक में समाज एवं संगठन के वर्तमान विषयों, आगामी कार्यक्रमों, संगठन की मजबूती तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। आप सभी के सुझाव एवं सहभागिता संगठन को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करेंगे।

📅 दिनांक: शनिवार, 04 जुलाई 2026
💻 माध्यम: Virtual Meeting (ऑनलाइन)
⏰ समय: 12:00 PM (मीटिंग लिंक पृथक रूप से साझा किया जाएगा।)

आइए, एकजुट होकर समाज एवं संगठन के सशक्त भविष्य के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएँ।

आपकी उपस्थिति ही संगठन की शक्ति है।

सादर आमंत्रित,
आदरणीय श्री हरीश चन्द्र भाटी जी
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय गुर्जर महासभा

paper cutting
01/07/2026

paper cutting

30/06/2026

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Gurjar Bhawan Kotala Mayur Vihar Ph-I
Delhi
110091

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