Vivek Singh

Vivek Singh Social Worker
Manav Sewa
www.manavsewa.com

11/12/2024
09/09/2024
31/07/2024
21/06/2024

हिंदू साम्राज्य दिवस
धर्मोद्धारक, हिंदवी साम्राज्य संस्थापक महाराजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज के सिंहासनरूढ़ होने की 350वीं वर्षगांठ पर हार्दिक शुभकामनाएं।



21/06/2024
15/03/2024

ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸ್ವಯಂಸೇವಕ ಸಂಘದ ಶಾಖೆಗಳ ಪ್ರಗತಿ.

09/10/2019

NDTV, Aaj Tak, ABP Zee News English जैसे न्यूज चैनलों के बहस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस का नाम सुनकर संघ पर अपना ज्ञान बखारने वाले महा ज्ञानियों से आग्रह गया कि RSS पर टिका टिप्पणी करने से पहले कुछ दिन संघ की नजदीकी शाखा का दर्शन कर आईये। और अगर ऐसा करने से आपको लज्जा आती है तो कुछ संघ के पुस्तकों का अध्ययन कर लीजिए, और अगर ये सब कुछ नहीं कर सकते हैं तो कम से कम अखबारों में दुर्लभता से छपने वाले संपादकीय आलेखों को ही पढ़ लीजिये मेरा दावा है कि संघ के प्रति आपका नजरिया कुछ न कुछ जरूर बदलेगा। बाकी थेथरोलॉजी करने के लिए फेसबुक, व्हाट्सऐप और शोशल मीडिया है ही...
धन्यवाद
शेष
आपका विवेक

15/09/2019

चारा घोटाले की तर्ज़ पर झारखंड में हुआ है भूमि संरक्षण विभाग का तालाब खुदाई घोटाला बाइक, ऑटो और कार से की गई थी मिट्‌टी ढुलाई।

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ताज पहनने के बाद अपने पहले संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तर्ज पर कहा था कि 'न किसी को खाने दूंगा और न खुद खाउंगा. लेकिन राज्य के भ्रष्टाचारी मंत्री मुख्यमंत्री के दावों को दाग लगा रहे हैं.

यहां आए दिन उनके मंत्रियों और अधिकारियों द्वारा एक से बढ़कर एक घोटाले हो रहे हैं और जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले मुख्यमंत्री दास इन मामलों में चुप्पी साधे हुए हैं. अब तो घोटालों के मामलों में यह राज्य इतिहास दोहराने की तरफ बढ़ रहा है. ऐसा इसलिए, क्योंकि पिछले साल जो घोटाला सामने आया था वो पूरी तरह से चारा घोटाले की तर्ज पर था. लगता है कि झारखंड के अधिकारी एवं नेता मंत्री सहित बिचौलिए भी चारा घोटालेबाजों से कुछ ज्यादा ही प्रभावित थे। राज्य की उप-राजधानी दुमका में सामने आया घोटाला तीन दशक पूर्व झारखंड में हुए चारा घोटाले की याद ताजा कर रहा है.

राज्य सरकार ने सूखे एवं जल संकट से निबटने के लिए एक लाख तालाब और डोभा (छोटे तालाब) बनाने का निर्णय लिया था. इसके लिए कृषि विभाग के भू-संरक्षण अधिकारियों को लक्ष्य पूरा करने का निर्देश दिया गया. कहा गया था कि तालाब एवं डोभा की खुदाई मनरेगा योजना के तहत कराई जाए, ताकि मजदूरों को काम मिल सके, पर तालाब खुदाई के नाम पर अधिकारियों ने जो कारनामे किए, उसे सुनकर चारा घोटालेबाजों का भी सर शर्म से झुक जाएगा. चारा घोटाले में जिस तरह से स्कूटर और साइकिल के जरिए सैकड़ों टन पशुचारे की आपूर्ति हुई थी, ठीक उसी तर्ज पर दुमका में भूमि संरक्षण विभाग द्वारा 2016-17 में तालाब खुदाई की योजनाओं में मिट्‌टी की ढुलाई भी बाइक, ऑटो और कार से की गई. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस सम्बन्ध में सभी प्रखंड मुख्यालयों को उपायुक्त को संचिका उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. संचिकाओं को जब्त भी किया गया है. सरकार द्वारा यह निर्देश दिया गया था कि तालाब खुदाई का भुगतान पंचायत के अध्यक्ष एवं सचिव द्वारा सत्यापित किए जाने के बाद ही किया जा सकता है, पर सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर करोड़ों का भुगतान किया गया. सबसे आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि तालाब की खुदाई मजदूरों से करानी थी, पर इसके लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया.

एक तथ्य यह भी है कि हजारों तालाब का भुगतान तो ले लिया गया, पर जिले में कुछ तालाबों की ही खुदाई की गई. सबसे ज्यादा घोटाला तो तालाबों के जीर्णोद्धार में हुआ, जो तालाब पहले से बनाए गए थे, उन तालाबों की सफाई कर उनको गहरा किया जाना था, पर तालाबों को बिना गहरा किए या बिना उनका जीर्णोद्धार किए ही करोड़ों रुपए का भुगतान कर दिया गया. कटाई की गई मिट्‌टी की ढुलाई ऐसे वाहनों से की गई, जो पंजीकृत नहीं हैं और जिन वाहनों के नंबर भी नहीं हैं, जैसे जेसीबी, पोकलेन और ट्रैक्टर के नाम पर भी बड़े पैमाने पर भुगतान किया गया. जांच में ऐसे-ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिसे सुन अधिकारी भी हैरान हैं. एक ही पन्ने में दो-दो वाउचर बनाए गए. कई भुगतान वाउचर पर न तो फर्म ने तारीख लिखी है और न ही भुगतान करने वालों ने कोई डेट लिखी है, पूरी तरह से भुगतान का फर्जी बिल बनाया गया है. एक ही तरह के वाउचर का इस्तेमाल कई योजनाओं में किया गया. बाइक के नम्बर को ट्रैक्टर, ऑटो रिक्शा के नंबर को ट्रक का नंबर बताकर भुगतान ले लिया गया. इस तरह का भुगतान लगभग सभी योजनाओं में किया गया है, वह भी अलग-अलग प्रखंडों में.

सरकारी लीपापोती

इस घोटाले के सामने आने के बाद अब सरकार और प्रशासन दोनों स्तरों पर जैसे-तैसे इसकी जांच पूरी कर इसे फाइलों में दबाने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि जिस तर्ज पर यह घोटाला हुआ है, उसे देखते हुए लगता नहीं कि इससे उठा धुआं इतनी जल्दी थमेगा. दुमका के शिकारीपाड़ा में तालाब की खुदाई के नाम पर बगैर जेसीबी नम्बर के दो लाख 86 हजार का फर्जी भुगतान हो गया. वहीं ट्रैक्टर के जिस नंबर को दर्शाकर लगभग 87 हजार का भुगतान लिया गया, वह नंबर ट्रैक्टर का है ही नहीं. वह नंबर एक मोटरसाइकिल का निकला. दुमका के ही रामपुर प्रखंड के रामगढ़ पंचायत में तीन जेसीबी के नाम पर 11 लाख का भुगतान कर दिया गया. बिल में जिस जेसीबी के नम्बर का उल्लेख है, जब उसकी जांच की गई तो वह धनबाद के बाइक का नम्बर था.

इसी तरह एक ऑटो पर मिट् टी ढुलाई दिखाकर लाखों रुपए का फर्जी भुगतान ले लिया गया. सबसे आश्चर्यजनक तथ्य तो यह है कि दुमका में जिस फर्म को भुगतान किया गया है, वह संथाल परगना का नहीं होकर हजारीबाग का था, जबकि अधिकतर वाहनों के नंबर बाइकों के थे और इन बाइकों का निबंधन धनबाद में हुआ था. अधिकारियों ने एक ऐसा बिल भी जब्त किया, जिसे देखकर वे खुद भौंचक रह गए. दुमका के दलदली में पोकलेन से खुदाई की गई एवं उसके लिए प्रति घंटे 1900 रुपए की दर से भुगतान किया गया. उस बिल में दिखाया गया कि उस पोकलेन से लगातार 232 घंटे तक खुदाई की गई, वह भी बिना रुके. इसके लिए उसे चार लाख 70 हजार रुपए का भुगतान कर दिया गया.

सचिन कुमार के नाम पर उसका भुगतान तो लिया गया, पर सादे कागज पर. इससे यह पता चलता है कि झारखंड में एक से एक कारनामें हो रहे हैं, पर राजनेता इन घोटालों पर चुप्पी साध लेते हैं. एसीबी अधिकारियों के साथ जब जिले के वरीय अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच की, तो यह पता चला कि दुमका जिले में तालाब खुदाई के लिए सौ योजनाएं स्वीकृत की गई हैं. इसके साथ ही इतने तालाबों के जीर्णोद्वार का भी काम इस जिले को आवंटित किया गया है. जिले के सभी दस प्रखंडों में केवल तालाब जीर्णोद्धार की जांच की गई, तो लगभग सभी में व्यापक पैमाने पर घोटाले हुए. हर तालाब के जीर्णोद्धार पर 20 लाख रुपए का खर्च दिखाया गया. अभी तक इन 100 योजनाओं में 25 योजनाओं की जांच पूरी हो गई है और उसमें दिखाया गया कि लगभग सभी योजनाओं में मिट्‌टी काटने से लेकर मिट्‌टी ढुलाई तक के लिए एक ही नंबर के वाहनों का इस्तेमाल हुआ एवं योजना के नाम पर उसे लगभग 200 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान कर दिया गया.

अगर इस तरह के घोटालों का अभी खुलासा नहीं होता, तो शायद यह बहुचर्चित चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला होता. क्योंकि राज्य सरकार ने 2016-17 में 2000 तालाबों के जीर्णोद्धार का लक्ष्य रखा था. एक लाख के जीर्णोद्वार पर 20 लाख रुपए तक का खर्च प्रस्तावित था, लेकिन जिस तरह से काम हो रहा था, उससे विभागीय सचिव पूजा सिंघल नाराज चल रही थीं. विभागीय मंत्री से उनके मतभेद चल रहे थे. इस कारण इस योजना को जांच तक के लिए रोक दिया गया था और राशि को पीएल अकाउंट में रख दिया गया था. दुमका के अनुमंडलाधिकारी राकेश कुमार का कहना है कि 92 योजनाओं से सम्बन्धित संचिकाओं को जब्त किया गया है.

औसतन एक योजना 18 से 20 लाख की है. लकिन प्रारम्भिक जांच में गंभीर गड़बड़ियां दिख रही हैं, जो गाड़ियां उपयोग में दिखाई गई हैं, उनमें और उनके वास्तविक मॉडल में अंतर है. जांच प्रतिवेदन आएगा तभी पता चल पाएगा कि कितने की गड़बड़ी हुई है. जरूरत पड़ी तो बड़ी एजेंसी से जांच की सिफारिश की जाएगी. जिले के उपविकास आयुक्त वरुण रंजन का कहना है कि सभी योजनाओं की जांच कराई जा रही है. जांच के बाद ही यह पता चल सकेगा कि कितने करोड़ की राशि का फर्जी भुगतान हुआ है. उधर, मुख्यमंत्री रघुवर दास ने पूरे मामले की जांच जिले के वरीय अधिकारियों को सौंपी है. वरीय अधिकारियों की जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाएगी. उन्होंने पूरे सख्त लहजे में कहा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, भ्रष्टाचार किसी भी हालात में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस्तेमाल की गई गाड़ियां

वाहन संख्या

अस्तित्व विहीन 30

मोटरसाइकिल 26

मिनी बस 01

कार 06

ऑटो रिक्शा 05

जीप 02

साल भर पूरे होने को है न तो जाँच पूरी हुई और न ही इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री अथवा अन्य मंत्री या विभागीय मंत्री रणधीर सिंह कुछ बोल रहे हैं। जिससे लगता है कि मामले में उनकी भी भागीदारी था इसलिए वे चुप्पी साधे हुए हैं। पर जनता चुप रहनेवाली नहीं हैं। हम सबों को पाई पाई का हिसाब लेना है। मेरा काम था सच को आपके सामने रखना ।
श्रोत: प्रभात खबर राँची संस्करण 13/09/2018
शेष
आपका विवेक

Address

Deoghar

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Vivek Singh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Vivek Singh:

Share

Category