Deoghat

Deoghat This is the page of Deoghat. Dedicated to the people of Deoghat.

18/08/2018

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

स्‍मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्‍व की संपत्ति चाहूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

क्‍या हार में क्‍या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्‍यर्थ त्‍यागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्‍य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

21/06/2017

ा_दौर_ज़हर_का_व्यापार_व्यंग_कवि_की_अभिव्यक्ति #
आज कल ज़हर का व्यापार करने लगा हूँ,
मोहब्बत छोड़ नफरत से प्यार करने लगा हूँ,
क्या करूँ रोजी की मजबूरी थी,
पेट पालने को ये प्रयोग बहुत जरूरी थी,
पहले तो मोहब्बत का ही धंधा था,
पर कुछ समय से चल रहा काफी मंदा था,
सियासत नए रंग में आयी है,
हर तरफ हर मन में नफरत ही नफरत छायी है,
स्कूल की पढ़ाई में भी नफरत की नई किताब जुड़ी है,
क्यों कि मुहब्बत वाली तो अब कूड़ेदान में पड़ी है,
बच्चे बच्चे को सिखाया जा रहा नफरत का पाठ है,
ना जाने नए दौर की ये कौन सी नई साठ-गांठ है,
ऐसे में मुझे भी नए दौर का अवसरवाद वाला पाठ याद आया,
और मैंने भी थोड़ा अपना व्यापारी दिमाग लगाया
बदल दिया मैंने अपने दुकान का पूरा नक्शा,
ताकि लग जाये सबको मेरे दुकान की नफरत का चस्का,
जब से खोला मैंने ये नए दौर की दुकान है,
उस दिन से सुखी मेरे घर में हर इंसान है।।

16/04/2017

मोको कहां ढूढे रे बन्दे
मैं तो तेरे पास में

ना तीर्थ मे ना मूर्त में
ना एकान्त निवास में
ना मंदिर में ना मस्जिद में
ना काबे कैलास में

मैं तो तेरे पास में बन्दे
मैं तो तेरे पास में

ना मैं जप में ना मैं तप में
ना मैं बरत उपास में
ना मैं किर्या कर्म में रहता
नहिं जोग सन्यास में
नहिं प्राण में नहिं पिंड में
ना ब्रह्याण्ड आकाश में
ना मैं प्रकति प्रवार गुफा में
नहिं स्वांसों की स्वांस में

खोजि होए तुरत मिल जाउं
इक पल की तालाश में
कहत कबीर सुनो भई साधो
मैं तो हूँ विश्वास में

23/06/2016

Prayan Geet jaishankar prasad ( Himadri Tung Shring Se Clip from Chankya ) Poem by Jai Shan

23/06/2016
13/05/2016
09/05/2016

जो भरा नहीं है भावो से , बहती जिसमे रसधार नहीं |
वह हृदय नहीं वह पत्थर है , जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं ||

Address

Bhatni
Deoria
274701

Telephone

05566

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Deoghat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share