Middle Class Party - INDIA

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Middle Class Party - INDIA We need to break the cycle and look for new politicians; politicians made up of the middle class, for the middle class.

Our aim is to Provide FREE EDUCATION upto 10th to all and our main moto is "One Nation-One Education-One Syllabus-Different Language"

BJP banner even hang not only on Govt property, each and every corner of city but also on Road Sign in Ludhiana for comi...
14/05/2022

BJP banner even hang not only on Govt property, each and every corner of city but also on Road Sign in Ludhiana for coming visit of JP Nadda in Ludhiana.

Isn't it wastage of...????

No matter its unipol, public property, govt property or any thing else. Every thing is permissible for party..

23/09/2021

👌👌👌👌👌
"मिडिल-क्लास" का होना भी
किसी वरदान से कम नहीं है.
कभी बोरियत नहीं होती.

जिंदगी भर कुछ ना कुछ आफत
लगी ही रहती है.

मिडिल क्लास वालों की स्थिति
सबसे दयनीय होती है,

न इन्हें तैमूर जैसा बचपन नसीब होता है
न अनूप जलोटा जैसा बुढ़ापा, फिर भी
अपने आप में उलझते हुए
व्यस्त रहते हैं.
★
मिडिल क्लास होने का भी
अपना फायदा है.
चाहे BMW का भाव बढ़े या AUDI का
या फिर नया i phone लाँच हो जाये,
कोई फर्क नहीं पड़ता.
★
मिडिल क्लास लोगों की
आधी जिंदगी तो ... झड़ते हुए बाल
और बढ़ते हुए पेट को रोकने में ही
चली जाती है.

इन घरों में पनीर की सब्जी तभी बनती है,
जब दूध गलती से फट जाता है, और
मिक्स-वेज की सब्ज़ी भी तभी बनती हैं
जब रात वाली सब्जी बच जाती है.

इनके यहाँ फ्रूटी, कोल्ड ड्रिंक
एक साथ तभी आते हैं , जब घर में कोई
बढ़िया वाला रिश्तेदार आ रहा होता है.
★
मिडिल क्लास वालों के यहाँ
कपड़ों की तरह ही
खाने वाले चावल की भी
तीन वेराईटी होती है ~
डेली, कैजुवल और पार्टी वाला.

छानते समय चायपत्ती को दबा कर
लास्ट बून्द तक निचोड़ लेना ही
मिडिल क्लास वालों के लिए
परमसुख की अनुभुति होती है.

ये लोग रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल
नहीं करते, सीधे
अगरबत्ती जला लेते हैं.
★
मिडिल क्लास भारतीय परिवार के
घरों में Get together नहीं होता,
यहाँ 'सत्यनारायण भगवान की'
कथा होती है.

इनका फैमिली बजट इतना
सटीक होता है, कि सैलरी अगर
31 के बजाय 1 को आये, तो
गुल्लक फोड़ना पड़ जाता है.
★
मिडिल क्लास लोगों की
आधी ज़िन्दगी तो
"बहुत महँगा है" बोलने में ही
निकल जाती है.

इनकी "भूख" भी ...
होटल के रेट्स पर डिपेंड करती है.
दरअसल ....
महंगे होटलों की मेन्यू-बुक में
मिडिल क्लास इंसान
'फूड-आइटम्स' नहीं बल्कि
अपनी "औकात" ढूंढ रहा होता है.
★
इश्क-मोहब्बत तो
अमीरों के चोंचले हैं.
मिडिल क्लास वाले तो सीधे
"ब्याह" करते हैं.

इनके जीवन में कोई
वैलेंटाइन नहीं होता.
"जिम्मेदारियाँ" जिंदगी भर
बजरंग-दल सी ... पीछे लगी रहती हैं.

मध्यम वर्गीय दूल्हा-दुल्हन भी
मंच पर ऐसे बैठे रहते हैं मानो जैसे
किसी भारी सदमे में हों.

अमीर शादी के बाद
हनीमून पर चले जाते हैं , और
मिडिल क्लास लोगों की शादी के बाद
टेन्ट बर्तन वाले ही
इनके पीछे पड़ जाते हैं.

मिडिल क्लास बंदे को
पर्सनल बेड और रूम भी
शादी के बाद ही अलाॅट हो पाता है.
★
मिडिल क्लास ... बस ये समझ लो कि
जो तेल सर पे लगाते हैं , वही तेल
मुँह पर भी रगड़ लेते हैं.

एक सच्चा मिडिल क्लास आदमी
गीजर बंद करके
तब तक नहाता रहता है
जब तक कि नल से
ठंडा पानी आना शुरू ना हो जाए.

रूम ठंडा होते ही AC बंद करने वाला
मिडिल क्लास आदमी चंदा देने के वक्त
नास्तिक हो जाता है, और
प्रसाद खाने के वक्त आस्तिक.
★
दरअसल मिडिल-क्लास तो
चौराहे पर लगी घण्टी के समान है,
जिसे लूली-लगंड़ी, अंधी-बहरी,
अल्पमत-पूर्णमत
हर प्रकार की सरकार
पूरा दम से बजाती है.
★
मिडिल क्लास को आज तक बजट में
वही मिला है, जो अक्सर हम
🔔 मंदिर में बजाते हैं. 🔔

फिर भी हिम्मत करके
मिडिल क्लास आदमी
पैसा बचाने की
बहुत कोशिश करता है,
लेकिन
बचा कुछ भी नहीं पाता.
★
हकीकत में मिडिल मैन की हालत
पंगत के बीच बैठे हुए
उस आदमी की तरह होती है
जिसके पास पूड़ी-सब्जी
चाहे इधर से आये, चाहे उधर से
उस तक आते-आते
खत्म हो जाती है.
★
मिडिल क्लास के सपने भी
लिमिटेड होते हैं.
"टंकी भर गई है, मोटर बंद करना है"
गैस पर दूध उबल गया है,
चावल जल गया है,
इसी टाईप के सपने आते हैं.

दिल में अनगिनत सपने लिए
बस चलता ही जा ता है ...
चलता ही जाता है.

🌹🌷 राधे राधे 🌷🌹

  Modi Jee Congress BJP na Kare! Palayan ko turant Roke! Janta ko ghar tak bheje sarkari kharche par nahi to Road par ch...
11/05/2020

Modi Jee Congress BJP na Kare! Palayan ko turant Roke! Janta ko ghar tak bheje sarkari kharche par nahi to Road par chal rahe Janta ke nange pairon me dard ki awaaj aapko 2024 me sunai degi!

Is post ko Twitter par hashtag par jald se jald trend kare!

10/05/2020

बैंकर्स की व्यथा पर एक ग्रामीण शाखा के प्रवांधक का लेख :

मैं भी एक बैंक का मैनेजर हूँ। लगभग 50 दिन हो गए लाकडाउन के....अखबार, टीवी, सोशल मीडिया से लेकर गली गली शोर है कि घर से बाहर न निकलें और निकले भी तब जब निकलने के अलावा कोई चारा न हो...

इसके बाद भी रोज सबेरे साढ़े नौ बजे मेरे बैंक के सामने सैकड़ो लोग सुबह इकट्ठे हो जाते हैं और एकदूसरे में ऐसे सटे रहते हैं जैसे सबकुछ सामान्य हो...ऐसा नहीं कि उन्हें पता न हो..जैसे ही मेरी गाड़ी दिखती है हरकत शुरू हो जाती है...मैंने खुद कई बार सुना है कि मनेजर साहब आ गए, परे हट जा , ना तो पैसा ना मिलेगा..बैंक पर फिजिकल डिस्टेंसिंग कैसे मेंटेन होती है, अब ये मैनेजर साहब जानते हैं या पुलिस ही जानती है..

मैं लज्जित हो जाता हूँ क्योंकि पचास दिन में भी मैं जनता को समझा नहीं पाया कि दूरी कोरोना के लिए बनानी है, मनेजर साहब के लिए नहीं...

एक बुजुर्ग के खाते में ठीकठाक रुपए हैं किंतु वो हर तीसरे दिन 500 रुपए ही निकालने आते हैं...हम समझाते हैं कि एक ही बार में पैसा निकाल लीजिए और घर पर रहिए..उनके हिसाब से ऐसा करने से उन्हें ब्याज़ का नुकसान होगा..मैं निरुत्तर हो जाता हूँ..एक महिला तो रोज बैंक आती है 500 पूछने जबकि उसके खाते में 137000 रूपए है।

एक साहब के खाते में 445रुपए हैं और वो 445 रुपए का ही फॉर्म भरते हैं क्योंकि उन्हें खाते में जीरो बैलेंस रखना है..जीरो बैलेंस वाले खाते में उन्हें न जाने कौन सी सम्पत्ति आने की सूचना है जो खाते में जरा भी बैलेंस रहने से वो वंचित रह जाएंगे...ज्यादा समझाने की अपेक्षा उन्हें पैसे देकर घर भेजना ही आसान लगता है...

50 दिन बीतने के बाद भी बैंक आने वाले 80 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोज चेहरा ढँकने के लिए कहना पड़ता है। मोटरसाइकिल से आने वाले अनेक लोग बिना चेहरा ढँके आते हैं, बाईक खड़ी करते हैं और जेब से मास्क निकालकर पहनते हैं और फिर बैंक में आते हैं। उन्हें हम समझा नहीं पाते कि मास्क बैंक में आने का प्रवेशपत्र नहीं है। कुछ कह भी नहीं पाते क्योंकि बैंक परिसर में उन्होंने मास्क तो पहना ही है...

शुरू में कुछ दिन डर लगा लेक़िन अब धीरे धीरे मैंने नियति को स्वीकार कर लिया है। जो भाग्य में लिखा है वो होकर रहेगा..लगभग 10 गाँव के लोग मेरे बैंक में रोज आते हैं, किससे डरूँ और कितना डरूँ?

लेक़िन, इस तरह की पोस्ट इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि मेरी ही तरह के एक ग्रामीण शाखा के मैनेजर काम करते करते संक्रमित हो गए...

इस समाचार की हेडलाइन "बैंक मैनेजर ने दस गाँवों को मुसीबत में डाला" है...

चूँकि मैं भी मैनेजर हूँ और आज की परिस्थितियों में कभी भी संक्रमित हो सकता हूँ..और ये सम्भव है कि मेरे यहाँ भी ऐसा ही समाचार लोगों को मिले...

मैं और मेरे जैसे कितने ही लोग ख़ुद मुसीबत में पड़कर व्यवस्था को सुनिश्चित रखे हुए हैं। बिजली, बैंक, पुलिस, स्वास्थ्य, और सफाई... अब इनके कर्मचारी न सिर्फ संक्रमित हो रहे हैं बल्कि मरना भी शुरू हो गए हैं।

जो दस गाँव की जनता के मुसीबत में पड़ने की खबर है, उसके पास विकल्प था मुसीबत से बचने का लेक़िन बैंककर्मी और उसके परिवार के पास कोई उपाय नहीं है इस मुसीबत से बचने का...

मैं अपनी नौकरी कर रहा हूँ ये जानते हुए भी कि इस समय कुछ भी हो सकता है..क्योंकि इसके लिए मुझे वेतन मिलता है और वेतन से मेरा परिवार चलता है।

इसीलिए अपनी मुसीबत के लिए जरा भी सहानुभूति की अपेक्षा नहीं करता लेक़िन, इतनी अपेक्षा जरूर करता हूँ कि मेरे और मेरे परिवार के मुसीबत में पड़ जाने को दस गाँवों को मुसीबत में डालने के रूप में प्रचारित न किया जाए...

ईश्वर सबकी रक्षा करें..

05/05/2020

ये दिहाड़ी मजदूर अपने परिवार के साथ ढकोली से मध्य प्रदेश पैदल जा रहे थे लेकिन हरियाणा पुलिस द्वारा इन्हे अंबाला से वापस भेज दिया गया वो भी पैदल चिलचिलाती धूप में। जब ये डेरा बस्सी पहुंचा और धूप से बचने के लिए फ्लाईओवर के नीचे कुछ पल रुकना चाहा तब डेरा बस्सी पुलिस द्वारा इन्हे वहां से भी भगा दिया गया। आखिर इनका कसूर क्या है?


05/05/2020

MIDDLE CLASS ke liye Govt kuchh nahi karna chahati? No Education! No Heath! No Insurance! No Job! Sirf har kadam par TAX! Kya aap Sahmat h?

Ye haal hone wala h Middle Class ka....
16/04/2020

Ye haal hone wala h Middle Class ka....

16/04/2020

Middle Class Condition in Lockdown

100 नम्बर की एक गाड़ी मेन रोड पर एक दो मंजिले मकान के बाहर आकर रुकी।
कांस्टेबल हरीश को फ़ोन पर यही पता लिखाया गया था।पर यहां तो सभी मकान थे। यहां पर खाना किसने मंगवाया होगा?
यही सोचते हुए हरीश ने उसी नम्बर पर कॉल बैक की।
"अभी दस मिनट पहले इस नम्बर से भोजन के लिए फोन किया गया था।आप जतिन जी बोल रहे हैं क्या? हम मकान न0 112 के सामने खड़े हैं, कहाँ आना है।"
दूसरी तरफ से जबाब आया ,"आप वहीं रुकिए, मैं आ रहा हूं।"
एक मिनट बाद 112 न0 मकान का गेट खुला और करीब पैंसठ वर्षीय सज्जन बाहर आए।
उन्हें देखते ही हरीश गुस्से में बोले,"आप को शर्म नही आई, इस तरह से फोन करके खाना मंगवाते हुए,गरीबों के हक का जब *आप जैसे अमीर* खाएंगे तो गरीब तक खाना कैसे पहुंचेगा।"
मेरा यहां तक आना ही बर्बाद गया।"
साहब ! ये शर्म ही थी जो हमें यहां तक ले आयी।
सर्विस लगते ही शर्म के मारे लोन लेकर घर बनवा लिया।आधे से ज्यादा सेलरी क़िस्त में कटती रही और आधी बच्चों की परवरिश में जाती रही।
अब रिटायरमेंट के बाद कोई पेंशन नही थी तो मकान का एक हिस्सा किराये पर दे दिया।अब लाक डाउन के कारण किराया भी नही मिला।बेटे की सर्विस न लगने के कारण जो फंड मिला था उससे बेटे को व्यवसाय करवा दिया और वो जो भी कमाता गया व्यवसाय बड़ा करने के चक्कर में उसी में लगाता गया और कभी बचत करने के लिए उसने सोचा ही नही। अब 20 दिन से वो भी ठप्प है।पहले साल भर का गेंहू -चावल भर लेते थे पर बहू को वो सब ओल्ड फैशन लगता था तो शर्म के मारे दोनो टँकी कबाड़ी को दे दीं।अब बाजार से दस किलो पैक्ड आटा और पांच किलो चावल ले आते हैं।राशन कार्ड बनवाया था तो बच्चे वहां से शर्म के मारे राशन उठाने नही जाते थे कि कौन लाइन लगाने जाय इसलिए वो भी निरस्त हो गया।जन धन अकाउंट हमने ही बहू का खोलवा दिया था ,पर उसमें एक भी बार न तो जमा हुआ न ही निकासी हुई और खाता बन्द हो गया।इसलिये सरकार से आये हुए पैसे भी नही निकाल सके।मकान होने के कारण शर्म के मारे किसी सामाजिक संस्था से भी मदद नही मांग सकते थे।कल से जब कोई रास्ता नहीं दिखा और सुबह जब पोते को भूख से रोते हुए देखा तो सारी शर्म एक किनारे रख कर 112 डायल कर दिया।इन दीवारों ने हमको अमीर तो बना दिया साहब ! पर अंदर से खोखला कर दिया।मजदूरी कर नहीं सकते थे और आमदनी इतनी कभी हुई नही की बैंक में इतना जोड़ लेते की कुछ दिन बैठकर जीवन व्यतीत कर लेते।आप ही बताओ ! मैं क्या करता।कहते हुए जतिन जी फफक पड़े।
हरीश को समझ नहीं आ रहा था कि क्या बोले।वो चुपचाप गाड़ी तक गया और लंच पैकेट निकालने लगा। तभी उसे याद आया कि उसकी पत्नी ने कल राशन व घर का जो भी सामान मंगवाया था वो कल से घर न जा पाने के कारण डिग्गी में ही पड़ा हुआ है।उसने डिग्गी खोली, सामान निकाला और लंच पैकेट के साथ साथ सारा सामान जतिन के गेट पर रखा और बिना कुछ बोले गाड़ी में आकर बैठ गया।गाड़ी फिर किसी ऐसे ही भाग्यहीन अमीर का घर ढूंढने जा रही थी। *ये आज के मध्यम वर्ग की वास्तविक स्थिति है।*

15/04/2020

हम मीडिल क्लास -

हम रेंट भी देंगे और बिल भी भरेंगे।
हम टैक्स भी देंगे और फिस भी देंगे।
हम दान भी देंगे और सेवा भी करेंगे।

और बदले में -

हमारा काम भी हमसे छीना जाएगा।
हमे नौकरी से भी हटाया जाएगा।
राहत के नाम पर सिर्फ भासन सुनाया जाएगा।

लेकिन आखिर कब तक?

14/04/2020

क्या मिडिल क्लास के लिए सरकार के पास कुछ नहीं है?

14/04/2020

The time has come to stand together and become united. If you can look past everything you have believed in the past you will see the parties have changed. The politicians no longer care for us.

We need to break the cycle and look for new politicians; politicians made up of the middle class, for the middle class. The war being waged now is the politicians versus the people.

Our aim is to Provide FREE EDUCATION upto 10th to all and our main moti is "One Nation-One Education-One Syllabus-Different Language"

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