20/12/2025
Patlabari,Binod Chauk par Binod Bihari Mahato ki jayanti me unki adamkad murti anavaran karne Tiger aur Saathi pahunche....
बिनोद बिहारी महतो (1923-1991) झारखंड के एक महान नेता, शिक्षाविद और समाज सुधारक थे, जिन्होंने झारखंड आंदोलन और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई; वे "पढ़ो-लड़ो" के नारे के साथ गरीबों, आदिवासियों और शोषितों के अधिकारों के लिए लड़े,弁 कई स्कूलों और कॉलेजों की स्थापना की और जल, जंगल, जमीन के अधिकार की वकालत करते हुए झारखंड के निर्माण में अहम योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें धनबाद में उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय भी मिला है.
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
जन्म: 23 सितंबर, 1923 को धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड के बड़ादाहा गाँव में हुआ था.
परिवार: उनके पिता किसान महेंद्र महतो और माता मंदाकिनी देवी थीं.
शिक्षा: उन्होंने धनबाद के स्कूलों से पढ़ाई की और एक घटना से प्रेरित होकर वकील बनने का फैसला किया, पटना लॉ कॉलेज से वकालत की डिग्री हासिल की.
राजनीतिक और सामाजिक योगदान
JMM के संस्थापक: 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की.
आंदोलनकारी: उन्होंने झारखंड के अलग राज्य के लिए जोरदार लड़ाई लड़ी, जिसमें जल, जंगल, जमीन और स्थानीय लोगों के अधिकारों पर जोर दिया.
"पढ़ो-लड़ो": उन्होंने शिक्षा को सशक्तिकरण का हथियार बनाया और "पढ़ो, लड़ो और आगे बढ़ो" का नारा दिया.
समाज सुधारक: उन्होंने बाल विवाह और महाजनों के शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई और समाज को जागरूक किया.
विधायक और सांसद: वे बिहार विधानसभा के सदस्य रहे और गिरिडीह से लोकसभा सांसद भी चुने गए.
विरासत
उन्हें झारखंड आंदोलन का "भीष्म पितामह" कहा जाता है.
उनके नाम पर धनबाद में बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है.
उनकी जयंती पर आज भी लोग उन्हें याद करते हैं और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं.