02/10/2019
है कैसा सफ़र ये, है ये कैसी थकावट,
ना मिली मंजिल अबतक, ना मिलने कि आहट,
पता ना कहाँ छुट गया अब बसेरा,
पता ना कहाँ खो गयी मुस्कुराहट !!!
' By: विश्व विकास '
Read my thoughts on