03/09/2026
16वें वित्त आयोग की आबद्ध निधि से पेयजल एवं स्वच्छता योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर कार्यशाला
गिरिडीह। 16वें वित्त आयोग की आबद्ध निधि के प्रभावी एवं नियमानुकूल उपयोग को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों को ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं स्वच्छता सेवाओं को बेहतर, सतत एवं जनोपयोगी बनाने के लिए योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में बताया गया कि आबद्ध निधि के तहत स्थानीय जरूरत और प्राथमिकता के अनुसार विभिन्न गतिविधियों का चयन किया जा सकता है। निधि के प्रावधानों में जल स्रोत की स्थिरता एवं जल सुरक्षा के लिए 15 से 25 प्रतिशत, जल गुणवत्ता प्रबंधन के लिए 20 प्रतिशत, सेवा प्रदान करने में सुधार के लिए 10 से 20 प्रतिशत, मानव संसाधन सहयोग के लिए 15 प्रतिशत तक, आईईसी एवं सामुदायिक जन-जागरूकता के लिए 5 प्रतिशत तक तथा प्रशासनिक सहयोग के लिए 3 प्रतिशत तक का प्रावधान बताया गया।
स्थानीय जरूरत के अनुसार योजनाओं का चयन
कार्यशाला में बताया गया कि ग्राम स्तर पर पेयजल व्यवस्था को सुचारु एवं टिकाऊ बनाए रखने के लिए स्थानीय आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर अनुमन्य गतिविधियों का चयन किया जा सकता है।
इनमें ओवरहेड टैंक की सफाई एवं मरम्मत, पंप-मोटर, वाल्व एवं कंट्रोल पैनल की छोटी-मोटी मरम्मत, पाइपलाइन का विस्तार, जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़े ऑपरेटर एवं जल मित्र से संबंधित अनुमन्य व्यय, क्लोरीनेशन डोजर की व्यवस्था तथा जल गुणवत्ता जांच के लिए किट एवं रिएजेंट की उपलब्धता जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
इसके अलावा जलापूर्ति योजनाओं में सौर पैनल लगाने, जल स्रोतों की सुरक्षा एवं स्थायित्व, वर्षा जल संचयन, जलाशयों एवं वॉटर बॉडीज का विकास, खराब बोरवेल एवं कुओं को रिचार्ज करने की व्यवस्था, हैंडपंपों का री-बोर एवं रख-रखाव तथा आपदा या आकस्मिक स्थिति में क्षतिग्रस्त ग्रामीण पाइप जलापूर्ति अवसंरचना की मरम्मत एवं उन्नयन जैसी गतिविधियों को भी प्रावधानों के अनुरूप शामिल किया जा सकता है।
जन-जागरूकता और सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल सुविधा पर जोर
कार्यशाला में पेयजल संरक्षण एवं स्वच्छता के प्रति सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। इसके तहत जल बजटिंग, जल चौपाल, जल सेवा आकलन रिपोर्ट, जल संरक्षण के उपायों के प्रति जागरूकता, आईईसी गतिविधियां एवं जल अर्पण दिवस जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की जानकारी दी गई।
साथ ही विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, आश्रमशालाओं, हेल्थ सेंटर, सार्वजनिक संस्थानों तथा साप्ताहिक हाट-बाजार, मेला ग्राउंड, बस स्टैंड एवं खेल मैदान जैसे सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल एवं हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था को भी योजना में शामिल करने की जानकारी दी गई।
GPDP में प्राथमिकता के आधार पर शामिल होंगी योजनाएं
कार्यशाला में पंचायत प्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों को निर्देश दिया गया कि ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करते समय 16वें वित्त आयोग की आबद्ध निधि से संबंधित Planning Format के अनुरूप ही पेयजल एवं स्वच्छता योजनाओं एवं गतिविधियों का चयन किया जाए।
चयनित योजनाओं का प्राथमिकता निर्धारण, आवश्यक अनुमोदन तथा e-Gramswaraj में समय पर प्रविष्टि सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि आबद्ध निधि का उपयोग निर्धारित दिशा-निर्देशों एवं वित्तीय नियमों के अनुरूप ही हो। योजनाओं के चयन में स्थानीय आवश्यकता, पेयजल व्यवस्था की निरंतरता, जल स्रोतों की स्थिरता, जल गुणवत्ता और सेवा वितरण में सुधार को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया।
कार्यशाला के माध्यम से पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों को आबद्ध निधि के प्रभावी एवं नियमानुकूल उपयोग को लेकर आवश्यक तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक जानकारी दी गई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल एवं स्वच्छता सेवाओं को अधिक प्रभावी, सतत और जनोपयोगी बनाया जा सके।