13/06/2026
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से अनुरोध है कि वे जनता को शिक्षा, रोजगार, आवास और चिकित्सा इत्यादि चारों जनाधिकारों की चिंता छोड़कर केवल राष्ट्ररक्षा के लिए ही कार्य करें।
ये चारों सेवाएं DSS और NDS को संचालित करने का अधिकार सौंप दें। हमारे सामाजिक संगठनों द्वारा ये चारों जनसेवाएँ पौरोहित्य परंपरा के अनुसार सफलतापूर्वक संचालित करी जाएंगी।
भारतराष्ट्र को अद्वैतदार्शनिक चार आयामी धर्म (सत्य-प्रेम-न्याय-पुण्य) पर आधारित 'सनातनधर्मराष्ट्र' घोषित करें।
तथा भारत को शकों, हूणों, मुस्लिमों, ईसाइयों, बौद्धों, जैनों, सिखों, कबीरपंथियों, ओशोपंथियों, दयानंदियों, विवेकानंदियों, गांधीवादियों और अम्बेडकरवादियों के साम्प्रदायिक हमलों से बचाएं।
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और शीघ्र ही न्यायशील गुणकर्मानुसारी वर्णाश्रमव्यवस्था लागू करके मानवीय न्यायसमाज को प्रतिष्ठित भारत में करें।
गौ इत्यादि पवित्र पशुओं, गंगा इत्यादि पवित्र नदियों, आधिभौतिक, आधिदैविक, आध्यात्मिक इत्यादि त्रयीविद्याओं (त्रिविध विज्ञानों) को संस्थापित और संरक्षित करके ऋषि परंपरा को पुन: जाग्रत करें
विद्यार्थी, गृहस्थ, ऋषि और संन्यासी के चारों श्रमनिष्ठ कर्तव्य इस देश के उद्धार हेतु पर्याप्त हैं उन्हें DSS पुनः प्रतिष्ठित किया जा रहा है।
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भूमि, मुद्रा, कोष, धर्म को आजाद करें, स्वतंत्र बनाएं।
द्वादश मताधिकारी महालोकतंत्र और चार जनाधिकार और चार मानवाधिकार और चार लोकतांत्रिक विशेषाधिकार प्रतिष्ठित करें।
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भारतवर्ष के पुनर्गठन की शीघ्र घोषणा करें; जिसमें हिंदुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, वर्मा, श्रीलंका, तिब्बत, अफगान, ईरान का प्राथमिक चरण में समावेश करें, और फिर धीरे-धीरे पूरी दुनिया से एप्सटीनी दैत्यसंस्कृति को समाप्त करें और धरती को मानवता और दिव्यता से अलंकृत करें न्यायशील और प्रेमपूर्ण बनाएं।
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-(अरविंद 'अंकुर')
03-06-2026
धर्मसंस्थापकसंघ हरिद्वार।
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