05/08/2026
लड़ो पढ़ाई करने को, पढ़ो समाज बदलने को।
आज देश के अधिकांश बच्चों के सामने सबसे बड़ी समस्या शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा का अभाव नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा का अभाव है। जब अच्छी सरकारी शिक्षा उपलब्ध ही नहीं होगी, तो केवल जागरूकता फैलाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
आज अनेक जातीय महासभाएँ और सामाजिक संगठन बच्चों तथा अभिभावकों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने का अभियान चला रहे हैं। यह स्वागतयोग्य प्रयास है, लेकिन इससे भी अधिक आवश्यक है कि वे समान, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा के अधिकार के लिए संगठित संघर्ष करें। जब तक हर बच्चे को एक जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तब तक सामाजिक समानता, अवसरों की समानता और वास्तविक लोकतंत्र स्थापित नहीं हो सकता।
गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा केवल मांग करने से नहीं मिलेगी। इसके लिए ऐसी लोकतांत्रिक राजनीति का निर्माण करना होगा जो सत्ता में पहुँचकर सभी बच्चों के लिए समान, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली सरकारी शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित करे। शिक्षा पर समान अधिकार ही सामाजिक न्याय की सबसे मजबूत नींव है।
जो लोग पहले के सरकारी विद्यालयों से अच्छी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं या जिनके पास संसाधनों के कारण बेहतर शिक्षा प्राप्त करने का अवसर था, वे आज नौकरी, व्यवसाय और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं। उनका नैतिक दायित्व केवल अपने परिवार का पालन-पोषण करना नहीं, बल्कि समाज के उत्थान के लिए भी अपने समय, ज्ञान, अनुभव और संसाधनों का योगदान देना है।
यदि शिक्षित और सक्षम लोग केवल अपनी आजीविका और परिवार तक सीमित रहेंगे, तो समाज के वंचित वर्गों की स्थिति में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आएगा। समाज तभी आगे बढ़ेगा, जब शिक्षित वर्ग अपने ज्ञान को केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाएगा।
आइए संकल्प लें—
पढ़ाई केवल नौकरी के लिए नहीं, समाज परिवर्तन के लिए होगी।
संघर्ष केवल अपने अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे को समान, निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा दिलाने के लिए होगा।