गौरैया फिर लौट आई

गौरैया फिर लौट आई "Saving sparrows and bringing back their chirps. Join us in protecting these little birds."

नमस्कार साथियों,हम अक्सर अनजाने में बड़ी संख्या में फूल तोड़ लेते हैं। कहीं पूजा के लिए, कहीं सजावट के लिए और कहीं अन्य ...
06/08/2026

नमस्कार साथियों,
हम अक्सर अनजाने में बड़ी संख्या में फूल तोड़ लेते हैं। कहीं पूजा के लिए, कहीं सजावट के लिए और कहीं अन्य उपयोगों के लिए। लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि यही फूल तितलियों, मधुमक्खियों और अनेक परागण करने वाले जीवों के भोजन का मुख्य स्रोत हैं?
जब हम आवश्यकता से अधिक फूल तोड़ लेते हैं, तो इन जीवों के लिए भोजन कम हो जाता है। इसका सीधा प्रभाव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है, क्योंकि तितलियाँ और मधुमक्खियाँ परागण के माध्यम से असंख्य पौधों के जीवन चक्र को आगे बढ़ाती हैं।
आइए, एक छोटा-सा संकल्प लें—
पूजा के लिए अपने घर में फूलों वाले पौधे लगाएँ।
आवश्यकता हो तो केवल एक-दो फूल ही अर्पित करें।
शेष फूल प्रकृति के इन नन्हे जीवों के लिए छोड़ दें।
याद रखिए, हर खिला हुआ फूल केवल हमारी आँखों की सुंदरता नहीं, बल्कि किसी तितली या मधुमक्खी का भोजन भी है।
आज बहुत कम स्थानों पर पहले जैसी रंग-बिरंगी तितलियाँ दिखाई देती हैं। यदि हमने अभी भी प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता नहीं दिखाई, तो कहीं ऐसा न हो कि आने वाली पीढ़ियाँ तितलियों को केवल चित्रों में ही देख सकें।
"फिर पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।"
आइए, फूलों को खिलने दें, तितलियों को उड़ने दें और प्रकृति को मुस्कुराने दें।

बैंक वाले: "मैडम, लोन ले लीजिए... बार-बार मौका नहीं मिलता!"😊 मैं: "अरे भाई, मुझे पैसे की ज़रूरत होगी तो मैं अपनी 'सुनीता...
06/08/2026

बैंक वाले: "मैडम, लोन ले लीजिए... बार-बार मौका नहीं मिलता!"
😊 मैं: "अरे भाई, मुझे पैसे की ज़रूरत होगी तो मैं अपनी 'सुनीता की गौरैया' से ले लूँगी।"
🐦 सुनीता की गौरैया: "यहाँ लोन नहीं, प्रेम मिलता है; ब्याज नहीं, आशीर्वाद मिलता है; और किस्तों की जगह पक्षियों को दाना-पानी देने का संकल्प मिलता है।"
😄 इसलिए बैंक वालों से विनम्र निवेदन है—फोन थोड़ा कम किया करें, वरना एक दिन गौरैया भी आपका कॉल उठाकर कह देगी, "हमें लोन नहीं, दाना चाहिए!"

"जीव सेवा ही शिव सेवा है।"सावन के प्रथम सोमवार के शुभ अवसर पर भगवान भोलेनाथ को समर्पित यह गौरैया का घर केवल एक घोंसला नह...
03/08/2026

"जीव सेवा ही शिव सेवा है।"
सावन के प्रथम सोमवार के शुभ अवसर पर भगवान भोलेनाथ को समर्पित यह गौरैया का घर केवल एक घोंसला नहीं, बल्कि प्रकृति, जीव-जंतुओं और पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारी श्रद्धा का प्रतीक है।
आइए, इस सावन एक संकल्प लें—हर घर में एक गौरैया का आशियाना, दाना और पानी की व्यवस्था करें। यही भगवान शिव की सच्ची आराधना और प्रकृति के प्रति हमारा कर्तव्य है।

🌿 बेल का वृक्ष लगाइए, भगवान शिव की सच्ची कृपा पाइए। 🌿सावन के प्रथम सोमवार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 💐🙏आज सुबह एक ...
03/08/2026

🌿 बेल का वृक्ष लगाइए, भगवान शिव की सच्ची कृपा पाइए। 🌿
सावन के प्रथम सोमवार की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। 💐🙏
आज सुबह एक सुंदर लेकिन सोचने पर मजबूर करने वाला दृश्य देखा। हमारे पड़ोसी प्रो. उदयवीर सिंह यादव जी के घर के बाहर लगा बेल का वृक्ष, जिसे लगाने की प्रेरणा देने का सौभाग्य मुझे मिला था, उसकी पत्तियाँ लेने के लिए अनेक श्रद्धालु आए। लेकिन मन में एक प्रश्न उठा—क्या कभी किसी ने इस वृक्ष को एक बाल्टी पानी भी दिया? उसकी देखभाल की? उसे सुरक्षित रखने का प्रयास किया?
भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। यदि बेलपत्र प्रिय है, तो निश्चय ही बेल का वृक्ष भी प्रिय होगा। इसलिए केवल बेलपत्र अर्पित करना ही नहीं, बल्कि बेल के वृक्ष का रोपण, संरक्षण और संवर्धन भी शिव-भक्ति का एक श्रेष्ठ रूप है।
मेरा विनम्र आग्रह है कि आवश्यकता से अधिक बेलपत्र न तोड़ें और वृक्ष को क्षति न पहुँचाएँ। इस सावन एक बेल का पौधा अवश्य लगाएँ, उसकी सेवा करें और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें। यही सच्ची पूजा है और यही आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी अमूल्य भेंट भी होगी।
यह मेरा व्यक्तिगत विचार और अनुभव है।
🌱 "एक बेल का वृक्ष लगाइए, प्रकृति बचाइए और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करे .।।
हर-हर महादेव! 🚩🙏
‌ डॉ सुनीता (गौरैया संरक्षिका )

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।गुरु पूर्णिमा हमारी गौरवशाली भारतीय संस्कृति का पावन पर्व है। हमारी परंपरा में गुरु ...
29/07/2026

गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
गुरु पूर्णिमा हमारी गौरवशाली भारतीय संस्कृति का पावन पर्व है। हमारी परंपरा में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है, क्योंकि गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान, विवेक और सत्य का प्रकाश फैलाते हैं।
महर्षि वेदव्यास से लेकर आधुनिक युग के महान आचार्यों तक, गुरुओं ने हमारी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखा है तथा समाज को सदैव सही दिशा प्रदान की है।
इस पावन अवसर पर मैं अपने माता-पिता, गुरुओं तथा जीवन को दिशा, संस्कार और प्रेरणा देने वाले प्रत्येक मार्गदर्शक के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और विनम्र प्रणाम अर्पित करती हूँ।
सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

छोटी मटकी,मुट्ठी भर दाना एवं एक कप पानी से पुनर्जीवित हो उठेगी गौरैया -----------------------------------------घरेलू गौर...
28/07/2026

छोटी मटकी,मुट्ठी भर दाना एवं एक कप पानी से पुनर्जीवित हो उठेगी गौरैया -
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घरेलू गौरैया विश्व का एक ऐसा पक्षी है जो इंसानों के बीच ही रहना पसंद करता है। यह पक्षी मनुष्य के लिए बहुत उपयोगी है इसीलिए कुदरत ने इसे मनुष्य साथ रहने के लिए बनाया है । लगभग तीन दशक से गौरैया की संख्या में बहुत अधिक कमी आई है । विश्व में गौरैया 20% ही बची है । हम कह सकते हैं कि गौरैया अब विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी है । यदि हम अभी भी गौरैया के प्रति सचेत न हुए तो बहुत ही जल्दी गिद्ध की तरह दर्शन दुर्लभ हो जाएंगे और हमारी आने वाली पीढ़ियाँ गौरैया को चित्रों में ही देखेंगी । गौरैया एक पक्षी ही नहीं बल्कि हमारे पर्यावरण को संतुलन बनाए रखने की प्रजाति भी है । यह फसलों को नुकसान पहुंचे पहुंचने वाले घातक कीट-पतंगों एवं उनके लार्वा को खाकर समाप्त करती है। यह पक्षी जिस घर में अपना घोंसला बनाता है उसे घर के सभी वास्तु दोष दूर हो जाते हैं एवं घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है । गौरैया की मधुर चहचहाट मानसिक विकारों को दूर करती है । पहले के समय में घर कच्चे बने हुए होते थे जिन पर छप्पर पड़े रहते थे, उन छप्परों में गौरैया बहुत ही आसानी से अपने घोंसले बनाती थी यदि कोई घर पक्का बना होता था उसके सुराख खुले रहते थे उनमें भी गौरैया बहुत आसानी से अपना घोंसला बनाती थी और अपनी वंश वृद्धि को बनाए रखती थी । घरों में आँगन बड़े एवं खुले हुआ करते थे उसमें खाने-पीने की उचित व्यवस्था हो जाती थी । महिलाएं सूप से अनाज फटका करती थी, टूटे हुए दानों पर गौरैया का एकाधिकार रहता था । अनाज भी छत पर सुखाया जाता था जो गौरैया का सुलभ भोजन हुआ करता था । घरों के आसपास बहुत सारे पेड़-पौधे घास के मैदान हुआ करते थे ।आज की आधुनिक जीवन शैली में ये सारी व्यवस्थाएं खत्म हो गई हैं इसी कारण गौरैया भी मृत्यु सैया पर पहुँच गई है । हम सबको मिलकर गौरैया को बचाना होगा । गौरैया संरक्षण बहुत ही सरल और सहज है । आपको अपनी बालकनी , छज्जे या जहाँ गौरैया आ सकती है वहाँ एक छोटी सी मटकी, कोई कृत्रिम घोंसला अथवा चप्पल-जूते का डिब्बा छेद करके टांगना होगा जो गौरैया के लिए एक बहुत सुंदर घर होगा । गौरैया सर्वाहारी प्राणी है उसे जो मिल जाता खा लेती है । आप उसके लिए एक मुट्ठी अनाज, पीने के लिए एक प्याला पानी रख दें। घर में बचे चावल , बासी रोटी को भी भिगोकर कर रख सकते हैं, इसे गौरैया बड़े चाउ से खाती है । घर में पेड़-पौधे जरूर लगाए जिनमें गौरैया बैठना पसंद करती है । यदि आप ऐसा करते हैं तो गौरैया बहुत जल्द ही आपके घर की ओर रुख करेगी । गौरैया को साफ-सफाई बहुत पसंद है वह अपने बच्चों के मल को चोंच में दबाकर दूर बाहर फेंकने जाती है । गौरैया की चहचहाट बहुत मधुर होती है जो मानसिक विकारों को खत्म करती है । हमें चीन से सबक लेना चाहिए ।सन 1958 में चीन ने 'मारो चार' के अंतर्गत गौरैया को भी समाप्त कर दिया था । दो वर्षों में चीन में कीट-पतंगे, टिड्डी आदि इतने बढ़ गए थे कि चीन सारी फसल चट कर गए और चीन में अकाल पड़ गया था जिसमें लाखों लाख लोग भूख से तड़प तड़प कर मर गए थे । अतः अपनी भूल सुधार के लिए सोवियत संघ से ढाई लाख गौरैयां मंगवाई । हम सबको सबक लेते हुए 'हर घर घोंसला, हर घर गौरैया' मुहिम को साकार करते हुए गौरैया संरक्षण करना चाहिए ।

लायन सफारी इटावा का भ्रमण अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक रहा। बीडीओ बरेली श्री हर्षेन्द्र जी ने अपने परिवार सहित सफारी का भ्...
27/07/2026

लायन सफारी इटावा का भ्रमण अत्यंत सुखद और प्रेरणादायक रहा। बीडीओ बरेली श्री हर्षेन्द्र जी ने अपने परिवार सहित सफारी का भ्रमण किया। यहां शेर, पैंथर, भालू, हिरण और सांभर के साथ अनेक पक्षियों, गौरैया तथा रंग-बिरंगी तितलियों का संरक्षण देखकर मन प्रसन्न हुआ। ईको विंग्स फाउंडेशन द्वारा पक्षियों के लिए सकोरों में पानी की व्यवस्था एवं गौरैया के घोंसले लगाए गए हैं। सफारी प्रशासन द्वारा भी गौरैया के लिए छप्पर की व्यवस्था की गई है। वन्यजीवों के साथ पक्षियों और तितलियों का संरक्षण प्रकृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

27/07/2026

बीपी यादव,ग्राम - कासौन ,जिला-एटा ( उत्तर प्रदेश)

प्रिय बीपी जी,
मुझे गर्व है कि आपने ईको विंग्स फाउंडेशन से प्रेरित होकर पक्षी संरक्षण का यह श्रेष्ठ कार्य अपनाया है। इसे निरंतर आगे बढ़ाइए और अपने आसपास के लोगों को भी पक्षियों के लिए दाना, पानी और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने हेतु प्रेरित कीजिए। यही हमारी सनातन संस्कृति की सुंदर परंपरा है।
आपका गाँव नहर के किनारे, हरियाली और पेड़-पौधों से समृद्ध है, इसलिए वहाँ अनेक प्रकार के पक्षी स्वाभाविक रूप से पाए जाते हैं। शायद यही कारण है कि मुझे भी आपके गाँव से विशेष लगाव है।
डॉ सुनीता यादव (गौरैया संरक्षिका)
सचिव- ईको विंग्स फाउंडेशन ,इटावा

25/07/2026
भोजन, जल और घरौंदा ही पक्षियों का असली धन है; गौरैया खुशकिस्मत है जिसे इंसानों के करीब यह आश्रय सहज मिल जाता है।शायद चिर...
24/07/2026

भोजन, जल और घरौंदा ही पक्षियों का असली धन है; गौरैया खुशकिस्मत है जिसे इंसानों के करीब यह आश्रय सहज मिल जाता है।
शायद चिरौटा राजा अपनी चिरैया रानी से यही कह रहे हैं
"अरे भाग्यवान! हम लोग बहुत किस्मत वाले हैं..."

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