26/07/2024
मेरी तड़प सिर्फ साथ रहने की ही नहीं थी, बल्कि जिस्म की आग को बुझाने की भी थी।
जी हाँ, मैं उसके साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी थी। जानते हैं क्यों? क्योंकि देश के पढ़े-लिखे बुद्धिजीवी, अभिनेता, और साहित्यकार इसे जीवन जीने का आधुनिक और बढ़िया तरीका मानते हैं। मेरी माँ इस अवैध रिश्ते का विरोध करती थी, क्योंकि लड़का दूसरे धर्म का था। लेकिन मुझे माँ की बातें पुरानी और बेकार लगती थीं। आखिरकार, देश के पढ़े-लिखे लोग कहते हैं कि जाति और धर्म जैसी चीज़ें निरर्थक हैं।
विवाह के लिए जाति धर्म नहीं, दिल मिलना जरूरी होता है। उसका दिल मिल गया था, इसलिए मैं उसी के साथ रहने लगी थी। पिछले दिनों माँ ने पुलिस केस किया था। पुलिस ने जब लड़के को पकड़ा, तो मैं उसके बचाव में खड़ी हो गयी। मैंने कहा कि मेरी माँ ही अत्याचारी है, वही मुझे मारती-पीटती रहती है। इसी कारण मैं माँ को छोड़कर अपने बाबू-सोना के साथ रहती हूँ। पुलिस क्या करती? छोड़ना पड़ा।
अब बात यह है कि एक दिन लड़के का मन भर गया। नकली समान चार दिन नहीं टिकता, तो नकली प्यार कितना टिकेगा? मन भर गया तो प्रेम मारपीट में बदल गया। बेल्ट से, लगभग रोज ही। एक दिन उसने मुझे बहुत मारा। हाथ-पैर बांधकर मारा, पूरे शरीर पर दाग हो गए तो दागों पर नमक छिड़ककर मारा, मिर्च पाउडर छिड़क-छिड़ककर मारा। यही वह प्रेम था जिसके लिए मैंने माँ को छोड़ा था।
जब घाव पर मिर्च पाउडर पड़ता तो मैं चीख पड़ती थी। बताइये, कितनी बुरी बात है? कोई बेचारा प्रेम दिखा रहा है और मैं चीख रही हूँ। उसे गुस्सा नहीं आएगा? उसे गुस्सा आया। उसने मेरे होठों पर फेवीक्विक लगा दिया। होठ चिपक गए। अब चीखो, आवाजें नहीं निकलेंगी। वाह! मोहब्बत जिन्दाबाद...
खैर, मैं अस्पताल में हूँ और मेरे जख्मों पर मरहम वही बूढ़ी माँ लगा रही है, जिसे मैंने पुलिस के सामने बुरा बताया था। क्या करे, माँ है न। लड़का जेल में है। जानते हैं, पुलिस ने जब लड़के को पकड़ा तब वह क्या कर रहा था? वह शराब की तस्करी कर रहा था। 93 हजार की अवैध शराब के साथ पकड़ा गया हीरो।
इस पूरी कहानी में मेन विलेन कौन है जानते हैं? क्या वह लड़का? नहीं जी, वह तो प्यादा है। वह वही कर रहा था जो उसे सिखाया गया था। अब जेल में सड़ेगा कुछ दिन, फिर निकलकर कहीं मजूरी करेगा। बुरी वह लड़की भी नहीं। सिनेमा के नशे में डूबी उस मूर्ख को कभी लगा ही नहीं कि वह जाल में फँस गयी है। उसे विलेन क्या कहेंगे? विलेन हैं वे धूर्त, जो खुद को बुद्धिजीवी बताते हुए लिव-इन रिलेशनशिप को जायज ठहराते हैं, जो इसके लिए माहौल बनाते हैं। विलेन हैं वे नीच। ऐसी घटनाओं की बार-बार, हजार बार चर्चा होनी चाहिये, ताकि यह देश की अंतिम लड़की तक पहुँचे। ऐसी घटनाओं की कोई खबर दिखे तो उसे हजार जगह शेयर कीजिये। यही एकमात्र उपाय है, यही एकमात्र विकल्प है।