27/08/2026
आज का दिन बहुत ही विशेष रहा......
आज बाढ़ राहत शरणालय में **मानवीय संवेदनाओं, अपनत्व और स्नेह का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर हृदय को भावुक कर दिया।** ❤️
आज जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद **श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह** बाढ़ राहत शरणालय में पहुंचकर वहाँ बच्चों के लिए संचालित **शैक्षणिक व्यवस्थाओं का जायजा लेने** पहुंचे। निरीक्षण के दौरान अचानक माहौल उस समय बेहद भावनात्मक हो उठा, जब नन्हीं-मुन्नी बच्चियाँ अपने हाथों में राखियां लेकर **बीएसए के पास पहुंचीं और बड़े ही प्रेम व आत्मीयता से उनकी कलाई पर राखी बांध दी।** 🥹❤️
कुछ नन्हीं बच्चियों ने तो अपने छोटे-छोटे हाथों से **कागज की राखियां स्वयं बनाईं** और अपने इस बड़े भाई की कलाई पर बांधकर रक्षाबंधन के पर्व को सचमुच जीवंत कर दिया। शायद उन राखियों में सोने-चांदी की चमक नहीं थी, लेकिन उनमें **निष्कलंक प्रेम, विश्वास, अपनापन और एक भाई के प्रति बहन का अटूट स्नेह** समाया हुआ था।
**आज राखी का पर्व किसी औपचारिक कार्यक्रम में नहीं, बल्कि धरातल पर जीया गया।**
एक ओर बाढ़ की विपरीत परिस्थितियां… दूसरी ओर राहत शरणालय में रह रही नन्हीं बच्चियों की मासूम मुस्कान… और उनके बीच बड़े भाई की तरह खड़े **श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह**। ❤️
वास्तव में, **आज बीएसए ने केवल राखी नहीं बंधवाई, बल्कि अपनी इन छोटी-छोटी बहनों से स्नेह, विश्वास और अपनत्व का एक अनमोल रिश्ता बांधा।** 🙏
ये कागज की राखियां भले ही बहुत साधारण थीं,
लेकिन शायद इनकी कीमत दुनिया की सबसे अनमोल राखियों से भी अधिक थी…
**क्योंकि इन्हें बनाया था नन्हें हाथों ने और बांधा था सच्चे प्रेम से।** 🥹❤️
आज का यह दृश्य हमेशा याद दिलाता रहेगा कि—
**“रिश्ते खून से ही नहीं बनते,
कभी-कभी मासूमियत की एक राखी भी
दिलों को जन्म-जन्म के रिश्ते में बांध देती है…”** ❤️🙏
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