28/08/2026
8th Pay Commission: क्या है फंडेड और अनफंडेड कॉस्ट, जिसे लेकर डर रहे पेंशनर्स; छिन जाएगा NPS-UPS वालों का भी हक?
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| आठवें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच भारी हलचल है। सबसे बड़ा बवाल टर्म ऑफ रेफरेंस (TOR) में इस्तेमाल किए गए दो शब्दों- फंडेड कॉस्ट और अनफंडेड कॉस्ट (Funded and Unfunded Cost) को लेकर मचा हुआ है।
कई कर्मचारी संगठन TOR में बदलाव की मांग कर रहे हैं।
लेकिन असली मुद्दा क्या है? क्या टर्म ऑफ रेफरेंस (8th Pay Commission Terms of Reference) में बदलाव संभव है? क्या इससे NPS और UPS वालों का भी हक छिन जाएगा? ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब दिए और आपके मन में उठ रहे सभी भ्रम को दूर किया। तो चलिए 4 सवालों में समझते हैं वो सबकुछ, जो जानना बहुत जरूरी है।
सवाल 1: टर्म ऑफ रेफरेंस (TOR) जारी हुए करीब 10 महीने हो गए हैं, क्या अब इसमें बदलाव संभव है?
मंजीत सिंह पटेलः देखिए, जो संगठन आज टर्म ऑफ रेफरेंस (TOR) बदलने की मांग कर रहे हैं, वे सिर्फ कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं।भारत में संगठनों की एक परंपरा बन गई है- जनता को सेंसिटाइज करना। आसान शब्दों में कहें तो भावनात्मक रूप से भड़काना। नेता भी जानते हैं कि अब टर्म ऑफ रेफरेंस में कोई बदलाव नहीं हो सकता। 10 महीने बीत चुके हैं और आठवें वेतन आयोग की 70 से 75 प्रतिशत बैठकें पूरी हो चुकी हैं। जब भारत सरकार बाकायदा इसे मीडिया में जारी कर चुकी है और ये चीजें फाइनल हो चुकी हैं, तो अब बदलाव की बात करना सिर्फ राजनीति है। अगर बदलाव करवाना ही था, तो संगठनों को 10 महीने पहले ही आवाज उठानी चाहिए थी। अब इसके बारे में बात करना महज समय की बर्बादी है।
सवाल 2: पे कमीशन में फंडेड और अनफंडेड कॉस्ट का जिक्र क्यों किया है? इसका सही मतलब क्या है?
मंजीत सिंह पटेलः सबसे पहले तो इन दोनों ही शब्दों को समझना होगा।
फंडेड कॉस्ट: इसका सीधा संबंध नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से है। यह एक फंड बेस्ड पॉलिसी है। इसमें कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 10% कटता है और सरकार अपनी तरफ से इसमें अंशदान (NPS में 14% और UPS में 18.5%) डालती है। यानी इस पेंशन के लिए एक अलग से फंड तैयार किया जा रहा है।
अनफंडेड कॉस्ट: इसका मतलब है ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS)। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को अपनी पेंशन के लिए अपनी जेब से एक भी रुपया नहीं देना होता है। इसका पूरा वित्तीय बोझ सीधे सरकार के खजाने पर पड़ता है, इसलिए इसे अनफंडेड कहा गया है।
सरकार ने आठवें वेतन आयोग को यह निर्देश दिया है कि वह यह देखे कि फंडेड स्कीम पर सरकार का कितना खर्च आ रहा है और अनफंडेड स्कीम यानी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) पर कितनी कॉस्टिंग आ रही है।
सवाल 3: तो फिर कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में डर किस बात का है?
मंजीत सिंह पटेलः असल में, करीब 2 साल पहले लोकसभा में एक फाइनेंस बिल लाया गया था, जिसमें एक तारीख (कटऑफ डेट) तय करके रिटायर होने वाले कर्मचारियों के बीच अंतर करने की बात कही गई थी।
सारा संशय इस बात पर है कि जो कर्मचारी 1 जनवरी 2026 (आठवें वेतन आयोग के लागू होने की संभावित तारीख) से पहले रिटायर हो जाएंगे, उनके साथ क्या होगा? अगर कोई कर्मचारी दिसंबर 2025 में NPS या UPS के तहत रिटायर होता है, तो क्या उसे 1 जनवरी 2026 से लागू होने वाले आठवें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर का फायदा मिलेगा या नहीं?"
कैलकुलेशन से समझते हैं फायदे और नुकसान का पूरा खेल
मान लीजिए, एक कर्मचारी 20 साल की नौकरी के बाद 2025 में रिटायर होता है और उसकी बेसिक सैलरी 1 लाख रुपए है। अगर वह अपना सारा फंड सरकार को दे देता है, तो UPS के तहत उसे 40% पेंशन यानी 40,000 रुपए मिलेंगे। उस समय मान लीजिए महंगाई भत्ता (DA) 60% है, तो 24,000 रुपए DA जुड़कर उसकी कुल पेंशन 64,000 रुपए हो जाएगी।
जनवरी 2026 से उसे यह पेंशन मिलने लगेगी। लेकिन अगर साल 2028 में सरकार बैक-डेट (1 जनवरी 2026) से 8वां वेतन आयोग लागू करती है और फिटमेंट फैक्टर 2.0 देती है, तो नियम के हिसाब से 40,000 की बेसिक पेंशन बढ़कर 80,000 रुपए हो जानी चाहिए। उस पर 60% DA (48,000 रुपए) और जोड़ दिया जाए, तो कुल पेंशन 1 लाख 28 हजार रुपए हो जानी चाहिए।
और यहीं फंसता है सबसे बड़ा पेंच। क्या सरकार इस नए फिटमेंट फैक्टर का फायदा NPS और UPS वालों को देगी? सरकार द्वारा फंडेड और अनफंडेड कॉस्ट का जिक्र करने का सीधा मतलब यह हो सकता है कि वह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) वाले लोगों को पे कमीशन के दायरे से बाहर रखना चाहती है।"
सवाल 4: आठवें वेतन आयोग के ToR में असली लड़ाई किस बात की होनी चाहिए?
मंजीत सिंह पटेलः टर्म ऑफ रेफरेंस (TOR) बदलने जैसी बेमतलब की बातों पर समय बर्बाद करने के बजाय, असली लड़ाई इस बात की होनी चाहिए कि UPS और NPS के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारियों को भी आठवें वेतन आयोग का पूरा लाभ मिले।
लड़ाई इस बात की होनी चाहिए कि जब सरकार ने उन्हें गारंटीड पेंशन दे दी है और पे कमीशन उसके बाद लागू हो रहा है, तो जीवित रिटायर कर्मचारियों को उस नए वेतन आयोग के मल्टीप्लिकेशन फैक्टर यानी फिटमेंट फैक्टर का शत-प्रतिशत फायदा मिलना ही चाहिए। दुर्भाग्य से इस सबसे अहम मुद्दे पर कोई संगठन खुलकर बात नहीं कर रहा है।"