17/06/2026
#निषादों का गौरवशाली क्रांतिकारी इतिहास
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कानपुर का सती चौरा घाट (वर्तमान नाम: नाना राव घाट) एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील ऐतिहासिक स्थल है। यह वही स्थान है जहाँ 27 जून 1857 को विद्रोही सैनिकों और स्थानीय नाविकों द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ एक बड़ी घटना को अंजाम दिया गया था।इस ऐतिहासिक घटना और इसमें निषाद समुदाय (नाविकों) की भूमिका का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:सती चौरा कांड की पृष्ठभूमिअंग्रेजों का आत्मसमर्पण: जून 1857 में कानपुर में नाना साहेब के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों ने जनरल व्हीलर की सेना को घेर लिया था। भारी गोलाबारी के बाद, सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) के समझौते के तहत अंग्रेजों ने आत्मसमर्पण कर दिया।घाट पर प्रस्थान: समझौते के अनुसार, 27 जून की सुबह लगभग 40 नावें तैयार की गईं, जिनमें महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों अंग्रेज इलाहाबाद जाने के लिए सती चौरा घाट पहुंचे।समाधान-लोचन निषाद और अंग्रेजों की हत्यानाविकों की भूमिका: स्थानीय मछुआरा और नाविक समाज, विशेष रूप से #समाधान निषाद और #लोचन निषाद, इन नावों का संचालन कर रहे थे।क्रांति की ज्वाला: जब नाविकों और स्थानीय क्रांतिकारियों को गंगा के रास्ते जा रहे अंग्रेजों के अत्याचारों और उस समय की परिस्थितियों का पूरा बोध हुआ, तो वे आक्रोशित हो गए।आक्रमण: सती चौरा घाट पर नावों पर सवार अंग्रेजों और ब्रिटिश सैनिकों पर अचानक हमला बोल दिया गया। भारतीय क्रांतिकारियों ने नावों को आग लगा दी और सैकड़ों अंग्रेजों को गंगा नदी में डुबोकर मार दिया गया। जो लोग बच गए, उन्हें घाट पर ही मार गिराया गया।अंग्रेजों की जवाबी कार्रवाईइस घटना से ब्रिटिश हुक्मनामा बुरी तरह हिल गया था।जब अंग्रेजों ने दोबारा कानपुर पर कब्जा किया, तो उन्होंने सती चौरा घाट (जिसे बाद में 'मैस्कर घाट' कहा गया) पर भीषण बर्बरता की।ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, ब्रिटिश सेना ने #समाधान निषाद और #लोचन निषाद समेत 167 क्रांतिकारियों (ज्यादातर निषाद समुदाय के नाविक) को पकड़ लिया और उसी घाट पर एक विशाल बरगद के पेड़ से लटकाकर फाँसी दे दी।आप इस घटना के इतिहास के बारे में और अधिक जानकारी Siege of Cawnpore पर पढ़ सकते हैं।अगर आप इस विषय में कुछ और जानना चाहते हैं, जैसे:नाना साहेब का विद्रोह में योगदानकानपुर में हुए अन्य 1857 के आंदोलनमुझे अवश्य बताएं, मैं आपकी और अधिक सहायता कर सकता हूँ।
जून क्रांतिकारियों के खून से रंगा था सतीचौरा घाट: सत्ताचौरा कांड इतिहास ...27 Jun 2023 — सीढ़ियों से गंगा अब काफी दूर जा चुकी है। ऐसे पड़ा सतीचौरा घाट का नाम DAV डिग्री कॉलेज के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष समर बहादुर सिंह ने बताया कि सैकड़ों वर्ष प...Dainik Bhaskar1857 की क्रांति | Sati Chaura Ghat kanpur - YouTubeअच्छा यह सामने अखाड़ा बना हुआ है जो. अखाड़ा. नाना साहब की बेटी बहना बाई को उठा और आगे जाकर के अंग्रेजों ने जो है नीम के पेड़ पर बांध करके झंडा जला दिया गया. था.YouTubeसती चौरा घाट//निषादों का ऐतिहासिक विद्रोह - YouTube27 जून 1857 की घटना सतीच चौरा घाट कानपुर दिल दहला देने वाली वह घटना मछुआ कश्यप निषाद समुदाय की जातियों का देश की आजादी की लड़ाई में सबसे अग्रणी. भूमिका रही है. ...YouTubeसमाधान निषाद लोचन निषाद .up_58 ...मैं समाधान निषाद हूँ और यह लोचन निषाद है। १८५७ की क्रांति में हम दोनों ने ३४०० अंग्रेजों को डुबोकर मार दिया था नदी में। जिस कारण हम दोनों को १६७ साथियों के साथ ...InstagramSati Chaura Ghat //Historical Revolt of Nishads | Nishad Manthan27 जून 1857. की घटना सती चौरा घाट कानपुर दिल दहला देने वाली वो घटना मछुआ कश्यप निषाद समुदाय की जातियों का देश की आजादी की लड़ाई में सबसे अग्रणी भूमिका रही है.
िषादराज िषाद_संस्कृति