25/03/2026
कुमार विश्वास मंच पर आते ही माहौल बदल गया। उनकी आवाज़ में वही तेज़ी और व्यंग्य था, जिसने श्रोताओं को तुरंत बांध लिया। उन्होंने “दुरंदर” नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि असली ताकत केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में दिखनी चाहिए।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सवाल उठाना लोकतंत्र की ताकत है, लेकिन बिना दिशा के आलोचना केवल शोर बनकर रह जाती है। उनके शब्दों में तीखापन था, लेकिन साथ ही एक संदेश भी—कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि समाधान भी जरूरी है।
अंत में उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “राजनीति में दुरंदर वही है, जो देशहित को सबसे ऊपर रखे,” और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपनी बात समाप्त की।