Krishna Singh kourav

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01/01/2024
01/12/2023
05/10/2023

राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित
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कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सुश्री ऋजु बाफना की अध्यक्षता में बुधवार को राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार फोटो निर्वाचक नामावली के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2023 के अंतिम प्रकाशन की जानकारी दी और उन्हें मतदाता सूची की एक - एक प्रति सीडी के साथ प्रदाय की। बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती अंजली शाह, श्री महंत प्रीतम पुरी, श्री नरेन्द्र राजपूत, श्री रमाकांत धाकड़, श्री अमितेन्द्र नारोलिया, श्री लाल सिंह गौतम, श्री रोहित कुमार राव, श्री शैलेन्द्र सिंह जाट, श्री गिरवर सिंह टेन्टवाल मौजूद थे।

विधानसभावार मतदाताओं की जानकारी

बैठक में उन्होंने बताया कि जिले के चारों विधानसभा में कुल 8 लाख 50 हजार 7 सौ 76 मतदाता है जिनमें से पुरूष मतदाता 4 लाख 38 हजार 6 सौ 66 पुरूष मतदाता, 4 लाख 12 हजार 94 महिला मतदाता एवं 16 अन्य मतदाता है। विधानसभा गोटेगांव में 1 लाख 11 हजार 2 सौ 44 पुरूष मतदाता, 1 लाख 5 हजार 4 सौ 67 महिला मतादाता एवं 4 अन्य मतदाता है। विधानसभा नरसिंहपुर में 1 लाख 18 हजार 8 सौ 91 पुरूष मतदाता, 1 लाख 13 हजार 4 सौ 28 महिला मतदाता एवं 5 अन्य मतदाता है। विधानसभा तेन्दूखेड़ा में 97 हजार 8 सौ 70 पुरूष मतदाता, 91 हजार 8 महिला मतदाता एवं 3 अन्य मतदाता है। विधानसभा गाडरवारा में 1 लाख 10 हजार 6 सौ 61 पुरूष मतदाता, 1 लाख 2 हजार 191 महिला मतदाता एवं 4 अन्य मतदाता है। इन चारों विधानसभाओं में 80 वर्ष से अधिक 13 हजार 3 सौ 69 मतदाता है, दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 8 हजार 7 सौ 20 है। डाक मतपत्र के आधार पर मतदान करने हेतु 12 सौ 18 मतदाता सहमत है। यह आंकड़े बताते है कि अधिकांश दिव्यांग एवं बुजुर्ग मतदाता लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदान केन्द्र पर जाकर अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे और मतदान करेंगे। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार इन्हें मतदान केन्द्रों पर आवश्यक सुविधायें भी प्रदान करने की जायेगी।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में अवगत कराया कि कृषि उपज मण्डी नरसिंहपुर में मतदान सामग्री वितरण एवं वापसी की जायेगी। प्रत्येक विधानसभा में कम से कम 30 पिंक बूथ तैयार किये जायेंगे। निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से निर्वाचन सुनिश्चित करने के लिए इंटर डिस्ट्रिक चैक पोस्ट पर सीसीटीव्ही कैमरे भी लगाये जायेंगे। एसएसटी टीम का भी विधानसभावार गठन किया जा चुका है। स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर डॉ. चन्द्रशेखर राजहंश ने पावर प्वांट प्रजेंटेशन के माध्यम से भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्वाचन की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जायेगी। इसके लागू होते ही तत्काल की जाने वाली आवश्यक कार्यवाहियों की भी जानकारी उन्होंने दी। उन्होंने निर्वाचन व्यय में शामिल किये जाने वाले व्यय, सी विजिल एप, सुविधा एप की भी जानकारी दी।

बैठक में मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों को ईव्हीएम का भी डिमोंस्ट्रेशन करवाया गया।

Jansampark Madhya Pradesh Chief Electoral Officer Madhya Pradesh Election Commission of India

वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया। लगभग बीस वर्षों तक चले युद्ध में अमेर...
10/09/2023

वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया। लगभग बीस वर्षों तक चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा...

जाहिर सी बात है कि सवाल यही होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया... ??

पर उस प्रश्न का दिए गए उत्तर को सुनकर आप हैरान रह जायेंगे और आपका सीना भी गर्व से भर जायेगा।
दिया गया उत्तर पढ़िये...!!

सभी देशों में सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान व श्रेष्ठ भारतीय राजा का चरित्र पढ़ा।
और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनीति का प्रयोग कर हमने सरलता से विजय प्राप्त की..!!

आगे पत्रकार ने पूछा...
"कौन थे वो महान राजा ?"

मित्रों जब मैंने पढ़ा तब से जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया,, आपका भी सीना गर्व से भर जायेगा...!!

वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष ने
खड़े होकर जवाब दिया...
"वो थे भारत के राजस्थान में मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह !!"

⚔महाराणा प्रताप का नाम
लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी.. आगे उन्होंने कहा...!!

"अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता"

कुछ वर्षों के बाद उस राष्ट्राध्यक्ष की मृत्यु हुई तो जानिए उसने अपनी समाधि पर क्या लिखवाया......!!

⚔"यह महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधि है !!"

कालांतर में वियतनाम के विदेशमंत्री भारत के दौरे पर आए थे। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार उन्हें पहले लाल किला व बाद में गांधीजी की समाधि दिखलाई गई....!!

ये सब देखते हुए उन्होंने पूछा "मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की समाधि कहाँ है ...❓"

तब भारत सरकार के अधिकारी चकित रह गए और उन्होंने वहाँ उदयपुर का उल्लेख किया.. वियतनाम के विदेशमंत्री उदयपुर गये वहाँ उन्होंने महाराणा प्रताप की समाधि के दर्शन किये...!!

समाधि के दर्शन करने के बाद उन्होंने समाधि के पास की मिट्टी उठाई और उसे अपने बैग में भर लिया,,इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा ...!!

उन विदेशमंत्री महोदय ने कहा "ये मिट्टी शूरवीरों की है,, इस मिट्टी में एक महान राजा ने जन्म लिया,, ये मिट्टी मैं अपने देश की मिट्टी में मिला दूंगा ..!!
ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर पैदा हों।"

मेरा यह राजा केवल भारत का गर्व न होकर सम्पूर्ण विश्व का गर्व होना चाहिये....!!
kourav

कुतुबुद्दीन घोड़े से गिर कर म'रा, यह तो सब जानते हैं, लेकिन कैसे ???वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी का महान 'चेतक' सबको या...
29/08/2023

कुतुबुद्दीन घोड़े से गिर कर म'रा, यह तो सब जानते हैं, लेकिन कैसे ???

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी का महान 'चेतक' सबको याद है, लेकिन शायद स्वामी भक्त 'शुभ्रक' नहीं होगा !!

तो मित्रो आज सुनिए कहानी 'शुभ्रक' की......

कुतुबुद्दीन ऐबक ने राजपूताना में जम कर कहर बरपाया और मेवाड़ (उदयपुर) के 'राजकुंवर कर्णसिंह' को बंदी बनाकर लाहौर ले गया।
कुंवर का 'शुभ्रक' नामक एक सवामीभक्त घोड़ा था, जो कुतुबुद्दीन को पसंद आ गया और वो उसे भी साथ ले गया। एक दिन कैद से भागने के प्रयास में कुँवर को सजा-ए-मौ'त सुनाई गई.. और सजा देने के लिए 'जन्नत बाग' में लाया गया। यह तय हुआ कि राजकुंवर का सिर क!टकर उससे 'पोलो' (उस समय उस खेल का नाम और खेलने का तरीका कुछ और ही था) खेला जाएगा..

कुतुबुद्दीन ख़ुद, कुँवर के ही घोड़े 'शुभ्रक' पर सवार होकर अपनी खिलाड़ी टोली के साथ 'जन्नत बाग' में आया। 'शुभ्रक' ने जैसे ही कैदी अवस्था में अपने राजकुंवर को देखा, उसकी आंखों से आंसू टपकने लगे। जैसे ही सिर कलम करने के लिए कुँवर सा की जंजीरों को खोला गया, तो 'शुभ्रक' से रहा नहीं गया.. उसने उछलकर कुतुबुद्दीन को घोड़े से गिरा दिया और उसकी छाती पर अपने मजबूत पैरों से कई वार किए, जिससे कुतुबुद्दीन के प्राण पखेरू उड़ गए! इस्ल!मिक सैनिक अचंभित होकर देखते रह गए.. मौके का फायदा उठाकर कुंवर, सैनिकों से छूटे और 'शुभ्रक' पर सवार हो गए। 'शुभ्रक' ने हवा से बाजी लगा दी। अपने स्वामी के रक्षार्थ, शुभ्रक मेवाड़ तक दौड़ा और महल के सामने आकर ही रुका!

राजकुंवर घोड़े से उतरे और अपने प्रिय अश्व को पुचकारने के लिए हाथ बढ़ाया, तो पाया कि वह तो प्रतिमा बना खडा था.. उसमें प्राण नहीं बचे थे। सिर पर हाथ रखते ही 'शुभ्रक' का निष्प्राण शरीर लुढक गया..

भारत के इतिहास में यह तथ्य कहीं नहीं पढ़ाया जाता क्योंकि वाम पंथी ले**क अपने नाजा'यज बा'प की ऐसी दुर्गति वाली मौ'त बताने से हिचकिचाते हैं! जबकि फारसी की कई प्राचीन पुस्तकों में कुतुबुद्दीन की मौ'त इसी तरह लिखी बताई गई है।

नमन स्वामीभक्त 'शुभ्रक' को..
जय महाराणा - जय माँ भद्रकाली 🙏🚩

17/06/2023
23/05/2023

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