Gahmar Village

Gahmar Village Gahmar is Asia's largest village in India, located near the Ganges river in the Ghazipur district Dham Dev had two sons—Roop Ram Rao and Diwan Ram Rao.

Gahmar was settled by Sakarwar Rajputs, the descendants of Dham Deo Misir who came from the vicinity of Fatehpur Sikri after Babur captured it in 1527 AD. They are closely related to the Sakarwar Bhumihars and Kamsar Pathan, the descendants of Dham Deo Misir's brother Maharaja Kam Dev Misir. After moving east from Fatehpur Sikri, initially, both of them settled in Sakradih, but due to floods, Dham

Deo migrated to Maa Kamakhya Dham near Gahmar and Kam Deo settled in Reotipur. One of Roop Ram's son, Sainu Mal Rao and his descendants settled largely in Gahmar. By 1800 AD, 23 patties in Gahmar were established by the clan members

गहमर मां कामाख्या देवी 🥀 🌺 🌹 🌷 🌿 🙏 जी मन्दिर के तरफ से आप सभी को 80 वे स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।। ...
15/08/2026

गहमर मां कामाख्या देवी 🥀 🌺 🌹 🌷 🌿 🙏 जी मन्दिर के तरफ से आप सभी को 80 वे स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई।।

मनभद्र महादेव जी का प्रथम सोमवार श्रृंगार दर्शनसावन माह के प्रथम सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएँ!💐भगवान भोलेनाथ की असीम कृप...
03/08/2026

मनभद्र महादेव जी का प्रथम सोमवार श्रृंगार दर्शन

सावन माह के प्रथम सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएँ!💐
भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वास हो। महादेव आपकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करें तथा आपका जीवन खुशियों और सफलता से परिपूर्ण रहे।
हर हर महादेव! ॐ नमः शिवाय! 🙏🏼

30/07/2026

माननीय मुख्यमंत्री पूजनीय महाराज श्री योगी आदित्यनाथ जी ने गाजीपुर के धरा से अपने मधुर मुख्य स्वर से जब हमारे गाँव गहमर और हमारे वीर जवानो के संघर्ष और शौर्य कि गुणगान किये तो दिल और मन दोनो गौरवन्तित हो उठा मुझे गर्व है कि हम गहमर में जन्मे है।
माननीय मुख्यमंत्री जी को दिल से धन्यवाद ।
माँ कामख्या का आशीर्वाद सदैव बना रहे आप पर।
ऐसा माता रानी से प्रार्थना करूँगा जय श्री राम🙏🙏🙏
MYogiAdityanath
#योगीआदित्यनाथ
#जमानिया
ाज़ीपुर

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19/07/2026

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आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष गुप्त नवरात्रि के पंचमी  तिथि नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी स्कन्द एवं कुमार षष्टि दिन रविवार तारीख 19...
19/07/2026

आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष गुप्त नवरात्रि के पंचमी तिथि नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी स्कन्द एवं कुमार षष्टि दिन रविवार तारीख 19 जुलाई 2026 को स्कंद माता के रूप में मां कामाख्या देवी का मंगला श्रृंगार आरती दर्शन कर रहे हैं

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आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष गुप्त नवरात्रि की तृतीया तिथि नक्षत्र मघा कर्क की संक्रांति वर्षा ऋतु आरंभ दिन शुक्रवार तारीख 17...
17/07/2026

आज आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष गुप्त नवरात्रि की तृतीया तिथि नक्षत्र मघा
कर्क की संक्रांति वर्षा ऋतु आरंभ दिन शुक्रवार तारीख 17 जुलाई 2026 को मां चंद्रघंटा के रूप में मां कामाख्या देवी का मंगला श्रृंगार आरती दर्शन कर रहे हैं मंदिर समिति कामाख्या धाम गहमर गाज़ीपुर उत्तर प्रदेश

भगवान श्रीराम के राजा होने के बाद सारे वानर, भालू अयोध्या से लौटने लगे। तब विभीषण जी भी लंका लौटने की अनुमति लेने भगवान ...
01/07/2026

भगवान श्रीराम के राजा होने के बाद सारे वानर, भालू अयोध्या से लौटने लगे। तब विभीषण जी भी लंका लौटने की अनुमति लेने भगवान के यहां पहुंचे।
विभीषण ने लंका में स्थापित करने के लिए भगवान से ही भगवान का विग्रह मांगा।
भगवान मना कैसे करते, उन्होंने पूजा कक्ष में रखे भगवान विष्णु (श्रीरंगनाथ) के इन्हीं श्रीविग्रह को विभीषण को प्रदान कर दिया। श्री रंगनाथ का यह विग्रह इक्ष्वाकु काल से ही अयोध्या के पूजा कक्ष में था।
चूंकि भगवान श्रीरंगनाथ राक्षसों की नगरी लंका जाना नहीं चाहते थे, इसलिए भगवान ने एक लीला रची।
उन्होंने विभीषण से कह दिया कि लंका पहुंचने से पहले विग्रह को जमीन पर मत रखना।
विभीषण जी विग्रह लेकर अयोध्या से लगभग ढाई हजार किमी दूर तमिलनाडु के त्रिचनापल्ली तक आ गए थे, लंका पहुंचने में सिर्फ तीन सौ किमी शेष रह गया था।
उन्हें लघुशंका लगी और देवताओं की प्रेरणा से भगवान गणेश भी मौके पर पहुंच गए।
लघुशंका से निवृत्त होने के लिए विभीषण ने विग्रह गणेश बाबा को थमा दिया और जब तक वे लघुशंका से वापस लौटते, विग्रह भूमि पर रखकर गणेश जी गायब हो गए।
तब से भगवान श्रीरंगनाथ का विग्रह यहीं स्थापित हो गया। विभीषण जी बहुत दुखी हुए तो श्रीरंगनाथजी ने यहीं से लंका की रक्षा करने का आश्वासन देकर उन्हें विदा कर दिया।
श्रीरंगम में यहीं वह मूर्ति है जिसे भगवान श्रीराम जी ने विभीषण जी को अपने हाथों प्रदान किया था। जय सियाराम

गाजीपुर में जमानियां क्षेत्र के पटकनियां गांव के रहने वाले सौरभ सिंह के भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। लेफ्टिनेंट...
30/06/2026

गाजीपुर में जमानियां क्षेत्र के पटकनियां गांव के रहने वाले सौरभ सिंह के भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं। लेफ्टिनेंट बनने के बाद पहली बार रविवार को वह अपने पैतृक गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया। इस मौके पर उनके पिता दिग्विजय सिंह और माता सविता सिंह का भी सम्मान ग्रामीणों ने किया।

सौरभ सिंह ने साल 2022 में इंटरमीडिएट के दौरान ही पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की प्रवेश परीक्षा को पास कर लिया था। उनका सेलेक्शन भारतीय थल सेना के लिए हुआ था। उस समय उनकी उम्र 17 वर्ष थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित सैनिक स्कूल में हुई थी। उन्होंने हाईस्कूल 92.8 प्रतिशत अंक हासिल किया था। सौरभ सिंह का ताल्लुक एक साधारण किसान परिवार से है। उनके पिता दिग्विजय सिंह किसान हैं। उनकी मां सविता सिंह गृहिणी हैं।

07/06/2026
07/06/2026

Tune in | | Raksha Sutra

In today's Episode of Podcast , listen to the story of , a Village of Soldiers in Uttar Pradesh where 'Fauj Khoon Mein Hai Ghazipur UP 61

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Rajnath Singh Press Information Bureau - PIB, Government of India ADGPI - Indian Army

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