06/01/2026
सच हमेशा आरामदेह नहीं होता, लेकिन ज़रूरी होता है।
जो लोग कट्टर सोच को “मासूमियत” या “राजनीति” के चश्मे से देखते हैं, उन्हें ज़मीनी हकीकत समझनी चाहिए।
आतंक और कट्टरवाद का कोई धर्म, कोई तर्क और कोई सफ़ाई नहीं होती।
चेहरे बदल सकते हैं, भाषा बदल सकती है — लेकिन मंशा वही रहती है।
आज सवाल पूछना ज़रूरी है।
चुप रहना समाधान नहीं, बल्कि समस्या को बढ़ावा देना है।
देश, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए सच के साथ खड़ा होना ही असली जिम्मेदारी है।
https://www.instagram.com/reel/DTLeIMngeHv/?igsh=MXRrYXYzamtlM25tNA==