10/09/2022
नवभारत निर्माण पार्टी वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस 10 सितम्बर के अवसर पर खिराज ए अकीदत (श्रद्धांजलि) पेश करती है।
1 जुलाई को जनपद गाजीपुर के एक गांव में मेहनतकश दर्जी के घर जन्म लेने वाले अब्दुल हमीद जब युवा हुए तो किसी अन्याय को सहन करना उनको नहीं भाता था.यही कारण है कि एक बार जब किसी गरीब किसान की फसल बलपूर्वक काटकर ले जाने के लिए जमींदार के 50 के लगभग गुंडे उस किसान के खेत पर पहुंचे तो हमीद ने उनको ललकारा , परिणाम उनको बिना अपना मन्तव्य पूरा किये लौटना पडा.इसी प्रकार बाढ़ प्रभावित गाँव की नदी में डूबती दो युवतियों के प्राण बचाकर अपने अदम्य साहस का परिचय दिया. 21 वर्ष के अब्दुल हमीद जीवन यापन के लिए रेलवे में भर्ती होने के लिए गये परन्तु उनके संस्कार उन्हें प्रेरित कर रहे थे ,सेना में भर्ती होकर देश सेवा के लिए अतः उन्होंने एक सैनिक के रूप में 1954 में अपना कार्य प्रारम्भ किया.जम्मू काश्मीर में तैनात अब्दुल हमीद पकिस्तान से आने वाले घुसपैठियों की खबर तो लेते हुए मजा चखाते रहते थे , ऐसे ही एक आतंकवादी डाकू इनायत अली को जब उन्होंने पकड़वाया तो प्रोत्साहन स्वरूप उनको प्रोन्नति देकर सेना में लांसनायक बना दिया गया।
1962 में जब चीन ऩे भारत की पीठ में छुरा भोंका तो अब्दुल हमीद उस समय नेफा में तैनात थे ,उनको अपने अरमान पूरे करने का विशेष अवसर नहीं मिला, उनका अरमान था कोई विशेष पराक्रम दिखाते हुए शत्रु को मार गिराने का.अधिक समय नहीं बीता और 1965 में पाकिस्तान ऩे भारत पर आक्रमण कर दिया .अब्दुल हमीद को पुनः सुअवसर प्राप्त हुआ अपनी जन्मभूमि के प्रति अपना कर्तव्य निभाने का.मोर्चे पर जाने से पूर्व ,उनके अपने भाई को कहे शब्द ‘पल्टन में उनकी बहुत इज्ज़त होती है जिन के पास कोई चक्र होता है.देखना झुन्नन हम जंग में लडकर कोई न कोई चक्र जरूर लेकर ही लौटेंगे।” उस समय उनके द्वारा बोले गए ये शब्द उनके स्वप्नों को अभिव्यक्त करते हैं.
उनकी भविष्यवाणी पूर्ण हुई और 10 सितम्बर 1965 को जब पाकिस्तान की सेना अपने कुत्सित इरादों के साथ अमृतसर को घेर कर उसको अपने नियंत्रण में लेने को तैयार थी,अब्दुल हमीद ऩे पाक सेना को अपने अभेद्य पैटन टैंकों के साथ आगे बढ़ते देखा .अपने प्राणों की चिंता न करते हुए अब्दुल हमीद ऩे अपनी तोप युक्त जीप को टीले के समीप खड़ा किया और गोले बरसाते हुए शत्रु के सात टैंक ध्वस्त कर डाले.पाक सेना के अधिकारी क्रोध और आश्चर्य में थे , उनके मिशन में बाधक अब्दुल हमीद पर उनकी नज़र पडी को और उनको घेर कर गोलों की वर्षा प्रारम्भ कर दी.इससे पूर्व कि वो उनका एक और टैंक समाप्त कर पाते ,दुश्मन की गोलाबारी से वो शहीद हो गये.अब्दुल हमीद के शौर्य और बलिदान ने सेना के शेष जवानों में जोश का संचार किया और दुश्मन को सफलतापूर्वक खदेड दिया गया.
अंत में भावभीनी श्रद्धांजलि पेश करते हुए उनकी शान में
मौत खड़ी थी सामने पर डिगा नहीं वीर
पैटन सारे ध्वस्त कर सो गया परमवीर
- डॉ अखलाक़ अहमद इदरीसी
राष्ट्रीय महासचिव
नवभारत निर्माण पार्टी
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