09/05/2020
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🙏🏻🙏🏻 #केवल_5_मिनिट🙏🏻🙏🏻
बहुत ही सुंदर और मूल्यवान जानकारी वाला लेख & .
#बहुजन_राजनीतिज्ञ व #समाज_सुधारक जरुर मनन करें....💐
प्रिय साथियों, बाबा साहेब के जाने बाद बहुजन अपना नेतृत्व नहीं खोज पाए और यदि नेतृत्व मिला भी तो आधा अधूरा। ये नेतृत्व कर्ता की भी कमी रही कि उसने बहुजनों की अल्पज्ञता का भरपूर लाभ उठाया और और बहुजन को लॉलीपॉप देकर खुश करता रहा।
बहुजन आज असमंजस में है कि वह क्या करे। शनै शनै हालत बिगड़ते ही जा रहे हैं। बहुजन यह भी नहीं जान पा रहा है कि गलती किस की है और कहां है???
वह भटक रहा है, कभी धरम या धम्म के नाम पर। कभी ब्राह्मण व बहुजन राजनीती के नाम पर। कभी समाज वाद के नाम पर। कभी बुद्ध व अम्बेडकर वाद के नाम पर।
भटकाने वाले भी गजब हैं। बहुजन का मजाक बहुजन के मंच पर ही उड़ाते है ब्राह्मणवाद , हिंदूवाद मनुवाद, गांधीवाद को जी भरकर कोसते हैं और घर मे या छिपकर इसी का समर्थन बड़े शान से करते हैं।
बहुजन की बीमारी खोजने का प्रयास बहुत से बहुजन दावा करते हैं लेकिन दवाई के नाम पर अभी तक तो जीरो ही हैं। बहुजन उस बीमारी को खोज कर इलाज करने की कोशिश कर रहा जो है ही नहीं। और जो है ही नहीं उसका कुछ नहीं हो सकता। चाहे वह बिमारी हो या समस्या।
अब बहुजनों को भूतकाल में ना भटक कर वर्तमान में थोती वाकपटुता (अहंकारी व धकमी) का प्रयोग न करके बुध्दि चातुर्य का प्रयोग करके सही सही समस्या व बिमारी को समझने का प्रयास करना होगा। पुराने आलापों को छोड़कर नवीन दृष्टि व समझ का प्रयोग करना होगा।
यदि मैं कहूं कि आज की समस्या ब्राह्मण,हिंदू व मनु न होकर भारतीय संविधान का ठीक ठीक लागू न होना है तो अब इसी के विरोध में कुछ समझदार बहुजन कहेंगे कि संविधान के लागू न होने के पीछे उपरोक्त तीनों ही तो हैं। इसके जवाब में मैं यही कह सकता हूं कि १३१ बहुजनो के रहते हुए यदि संविधान का किर्यांवन्यन सही नहीं हो रहा है तो बिमारी कहां व क्या है? वो १३१ न तो ब्राह्मण हैं न ही मनु की औलाद है और ना ही इनको कोई जबरदस्ती हिंदू बना रहा है और ये सब हम में से ही, हमारे ही द्वारा चुन कर भेजे जा रहे हैं। और हम भी इनको कभी जात के नाम पर। कभी धरम के नाम पर। कभी पार्टी के नाम पर और कभी कभी दबंगई के नाम पर चुनते जा रहे हैं। लेकिन ठीकरा ब्राह्मण, हिंदू,मनु व गांधी के सिर पर ही फोड़ रहे हैं।
संविधान ने सभी नागरिकों को बहुत सारे अधिकार दिए हैं लेकिन बहुजन अभी अपने को भारतीय नागरिक न मानकर दलित, शूद्र,हरिजन,मूलनिवासी, द्राविड़,पिछड़ा और अनेक जातियों का में बंध कर गर्व महसूस कर रहा है। लेकिन दोष उपरोक्त तीनों को ही दे रहा है। मैं और बहुत से कारण गिना सकता हूं कि बिमारी ब्राह्मण,हिंदू व मनु न होकर बहुजन खुद है। *खुद की खबर नही, खुदा की खबर रखता हूं* कहावत सटीक हो रही है। लेख बहुत लंबा हो जाएगा इसलिए एक ही बिमारी भारतीय संविधान का पूर्णतः लागू न होना है। और संविधान तभी लागू हो सकता है जब भारत का प्रत्येक नागरिक इस के प्रति जागरूक होगा।
*जानकारी ही बचाव है* निवेदन:
आओ हम सब मिलकर कोशिश करें कि यह भारतीय संविधान लोक व जनकल्याण (जो कि संविधान का मूल है) के लिए लागू हो।
प्रमोद ए आर निमेश (अधिवक्ता)
गाजियाबाद
🇮🇳जय भारत जय संविधान📓
🙏 उदय संस्था भारत@ देवकी नंदन
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