.मुस्लिम राष्ट्रीय मंच एक सुधारवादी, शिक्षा, रोजगार और विकास को समर्पित राष्ट्रीयता केंद्रित संस्था है, जिसमें हिन्दू-मुस्लिम संवाद भी जुड़ा है। हिन्दू और मुसलमानों के बीच राष्ट्रीयता को लेकर संवाद होना चाहिए इसकी प्रेरणा संघ के पांचवे सरसंघ चालक के.सी. सुदर्शन जी से मिली है। भारत में नानाविध मत-पंथ हैं इस्लाम को उनके साथ मिलकर रहना है या टकराव से? राष्ट्रवाद और मानवतावाद के नाम संघ एक संयोजन है।
घुसपैठिए भले इस्लाम दीक्षित हों भारत में आकर वह इस देश के मुसलमानों का रोजगार और जमीन छीनने का काम ही करते हैं। यह बात देश के मुसलमानों को समझनी होगी। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई जाना चाहिए यह देश हित में नहीं।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की देश के 27राज्यों के 318 से अधिक जिलों में 4178क्षेत्रीय स्तर पर शाखाएं हैं और इनमें मुस्लिम युवाओं की संख्या हजारों में हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की स्थापना वर्ष २००२ में की गई थी। हमारे समाज के विभिन्न अंगों में नैतिकता , चरित्र बल, ईमानदारी , सच्ची समाज सेवा , भाईचारे की भावना जागृत करना व राष्ट्र तथा देश कि अखंडता एवं सुरक्षा रखना मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कारकून का फर्ज है । जनमानस में उच्च विचार देशभक्ति वा देश प्रेम की लौ जगाने तथा इसके प्रसार कि आवश्यकता को मुस्लिम समाज में व्याप्त करना भी मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कारकून का फर्ज है । ईर्षा, द्वेष और पक्षपात से संसार को निकालना है हमारी कार्य पद्धति सरल, पर दृढ और अटल है तथा राष्ट्रीयता और स्वदेश प्रीति के भावों से परिपूर्ण है । सामूहिक पुरषार्थ प्रकट करके दुख, दरिद्र्य और अन्याय, अत्याचार का अंत करना है ।
इंसानियत सबसे पहले, अमन सबके लिए !
गिरीश जुयाल
संगठन संयोजक
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच