17/03/2024
माँ नर्मदा रहस्य।
काजल रानी माता
माँ नर्मदा के सौंदर्यवान अरण्य ओंकारेश्वर झाडी का सौंदर्यपुर्ण क्षेत्र काजल रानी जंगल जो धाराजी और ओंकारेश्वर के मध्य में है।
1997 के दौरान में पहली बार पुरे परिवार के उस क्षेत्र में गया था।
बहुत ही अद्भुत स्थान था काजल रानी क्षेत्र।
माँ नर्मदा के दक्षिण तट पर स्थित यह सिध्द क्षेत्र अपने आप में गूढ रहस्यमय स्थान हैं।
नाव को किनारे लगाकर हम किनारे उतरे पुजन सामग्री के साथ हम कुछ बर्तन लेकर चले एक घने नाले से होकर जाना होता था नाला रेत से भरा था। क्ई बार नाविको ने इस नाले में एक बडे मगरमच्छ को आरामफरमाते देखा है। और हम भी कुछ घंटो पहले ही उत्तर तट पर दो मगरमच्छो को धूप सेकते देख चूके थे।
तो यह तो पक्का था कि ठंडक पाने के हिसाब से मगरमच्छ यहा आते होंगे जिनका सबुत रेत और किचड पर निशान भी थे।
वह माहौल बडा विस्मयकारी था। चारो और से पंक्षिओ का मधुर कलरव और पेढो कि ठंडी छाव में शीतल बयार मानो हमे यह समा बांधे रखता था।
पर हमे किनारे से नाले से होते हूए दक्षिण दिशा में जंगल के भीतर जाना था देवी के दर्शनो को।
हम दोनो भाई बर्तनो कै जोर जोर से बजाते जा रहे थे। और सभी नर्मदे हर और जय माता के जयकारे लगा रहे थे।
यह इसीलिए क्योंकि यहा हिसंक जानवर भी नाले में बैठे मिल जाते है।
बस मेरे मन में यह प्रश्न था कि किसी जानवर से आमना सामना ना हो जाए।
पर सब माँ नर्मदा कि कृपा से हम काजल माता तक पहुचे।
एक सपाट पहाड पर देवी विराजित थी।
समीप ही एक कुंड था। जिसमे छोटी छोटी मछलिया दौडभाग कर रही थी।
पास ही बडे बडे पेड पुरे वातावरण को छायादार बनाये हुए थे।
इन पेढो पर बडे बडे मधुमक्खीओ के छत्ते लगे थे।
हम सभी ने देवी अराधना कि और लौट आये।
पुनः कुछ वर्षो के बाद हम सभी उसी यात्रा पर गये। (बांध बनने के पहले)
पुनः काजलरानी माता के दर्शनो को हम गये पुनः वही प्रक्रिया के साथ बर्तनो को बजाते बजाते पर इस बार एक अनूठा सौभाग्य प्राप्त हूआ।
माता जी के स्थान के पास एक जो लगभग 6 -7 फिट कि हाईट के होंगे। पुरे निरंजन रूप में धूनी लगा कर बैठे थे।
धुनी का धुआ मधुमक्खीओ के छत्तो को भी छू रहा था।
पर एक भी मधुमक्खी नहीं उड रही थी यह सब बडा आश्चर्य से कम ना था।
हम उन परम् तपस्वी और काजल रानी को प्रणाम कर वापस लौट आये।
बांध बनने के बाद एक बार और जाना हुआ क्ई वर्षो के बाद भी उन स्थानों कि छवि मानस पटल पर तरोताजा थी।
हम फिर काजल रानी माता के जंगल में पहुचे पर सभी स्थान जल मग्न थे।
हमने नाव किनारे कर उस काजल रानी के पहाड पर चढे वही पर किसी ने प्रतीकात्मक स्वरूप देवी पुजन किया था।
हम भी वही पुजन कर उस स्थान का आनंद ले रहे थे।
हम ऊचे स्थान पर थे जहा से सौंदर्य पुर्ण नजारे मन मोहित कर रहा था।
यह सभी नजारो को देख पुरानी यात्रा को याद किया कितना पवित्र स्थान है। यह
माँ नर्मदा रहस्य।
https://youtu.be/anlq3G_o4Cw
प्रमोद अत्रे
9893232274
माँ नर्मदा रहस्य। काजल रानी माता माँ नर्मदा के सौंदर्यवान अरण्य ओंकारेश्वर झाडी का सौंदर्यपुर्ण क्षेत्र काजल रा....