कसौधन सेवा समिति आजाद चौक रुस्तमपुर गोरखपुर

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कसौधन परिवार, समाज और देश के विकास के लिए आयोजित कार्यक्रम, समारोह, सांस्कृतिक गतिविधियाँ एवं बच्चों के विकास से जुड़े आयोजन।

08/03/2026

कभी-कभी हमें लगता है कि सुंदरता और महत्व सबसे बड़ी चीज है, लेकिन जीवन की असली कीमत सादगी और महत्व में होती है।

कथा के अनुसार,
एक दिन Lord Krishna से Satyabhama ने पूछा – “मैं आपको कैसी लगती हूँ?”

भगवान कृष्ण ने मुस्कुराकर कहा – “आप नमक जैसी हैं।”

यह सुनकर सत्यभामा नाराज़ हो गईं।
तब श्रीकृष्ण ने एक दिन बिना नमक और बिना चीनी के भोजन बनवाया।

जब सत्यभामा ने भोजन चखा तो बोलीं –
“नमक के बिना नमकीन खाना बिल्कुल बेस्वाद है।”

तब श्रीकृष्ण ने समझाया –
नमक भले ही दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके बिना स्वाद नहीं होता।

उसी तरह जीवन में कुछ लोग साधारण लगते हैं,
लेकिन वही हमारे जीवन का असली स्वाद होते हैं।

सीख:
जो लोग हमारे जीवन में चुपचाप महत्व रखते हैं, उनकी कद्र करना सीखिए।

“नमक दिखाई नहीं देता, लेकिन उसके बिना स्वाद नहीं आता…
वैसे ही जीवन में कुछ लोग बहुत खास होते हैं।” 🙏










08/03/2026

कई बार हम अपने पिता की मेहनत और त्याग को समझ नहीं पाते।
जब तक वो हमारे साथ होते हैं, हमें लगता है सब कुछ सामान्य है।

लेकिन जब वही पिता घर से दूर हो जाते हैं, तब समझ आता है कि
घर की हर समस्या का हल, हर जरूरत की पूर्ति और हर मुश्किल में सहारा पिता ही होते हैं।

यह वीडियो एक सच्चाई दिखाता है —
पिता की अहमियत तब समझ आती है जब वो हमारे पास नहीं होते।

पिता का सम्मान करें, क्योंकि उनकी खामोशी में ही पूरा परिवार बसता है। ❤️

"पिता की कीमत तब समझ आती है, जब उनकी जगह खाली हो जाती है…" 💔
Respect Your Father 🙏










महिषासुर आधा महिष और आधा मनुष्य रुपी असुर क्यों था?महिषासुर को असुरो का राजा बनाया गया, तो रक्तबीज को सेनापती.. अग्निदेव...
16/02/2026

महिषासुर आधा महिष और आधा मनुष्य रुपी असुर क्यों था?
महिषासुर को असुरो का राजा बनाया गया, तो रक्तबीज को सेनापती.. अग्निदेव और यक्षराज सम्भरण को देवराज इंद्र ने स्वर्ग से बहिष्कृत किया था.. इसी कारण उन दोनों ने महिषासुर का साथ देना उचित समझकर , इंद्र से प्रतिशोध लेनी की ठानी.. यक्षराज के कहेनुसार इच्छित वरदान पाने हेतु, महिषासुर ने ब्रह्म तपस्या आरंभ की.. देवराज ने इस बार महिषासुर के तपस्या भंग करनी चाही परन्तु पंचाग्नी ब्रह्म तपस्या में अवरोद्ध उत्पन्न नहीं कर पाए .. आखिरकर जब ब्रह्मा, महिषासुर के सामने प्रकट हुए तो महिषासुर ने अमरता के वरदान की इच्छा की पर ब्रह्मदेव ने यह कहते हुए उसे वरदान देने से साफ़ मना किया की जो जन्मा है उसका मरण निश्चित है और यह विधी का विधान हैं.. महिषासुर ने कुछ समय सोचा और अपार शक्तिया, रूप बदलने की क्षमता , प्रचंड सेना, अस्त्र-शास्त्र प्रकट करना और कोई भी पुरुष देव, दानव, मानव, राक्षस उससे मार न सके ऐसा वरदान माँगा.. ब्रह्मदेव उससे ये वरदान देकर चले गए.. सर्व श्रेष्ट त्रिदेवो में विष्णु अथवा महादेव ही महिषासुर का अंत कर सकते थे.. इस बात से महिषासुर भलीभांति सचेत था परन्तु वह देवी शक्ती के अस्तित्व से अन्भिज्ञ था इसीलिए, उसे इस बात का अभ्यास नहीं हुआ की कोई स्त्री उसका वध करने में सक्षम हो सकती हैं क्योंकि उसकी सोच थी की कोई भी नारी उस जैसे शक्तिशाली असुर का वध कर ही नहीं सकती..
देवराज को जैसे भविष्य में होनेवाली घटनाओं का आभास हुआ था, ठीक वेसा ही हुआ. महिषासुर ने देवराज इंद्र को उनके स्वर्ग से निकाल दिया तथा बाकि सारे देवो को उनके कार्य न करने का आदेश और चेतवानी दी.. पृथ्वी पर देव पूजा कर रहे , मानवों पर भी उसने अत्याचार करने शुरू किये.. सारे देवता, इस विकट समय में पालनकर्ता विष्णु के पास स्वयं का उद्दार हेतु, प्राथना करने विष्णुलोक गए.. पर ब्रह्मा के वरदान अनुसार, पालनकर्ता विष्णु भी विवश थे.. वरदान के मुताबित , महिषासुर का अंत कोई स्त्री शक्ति द्वारा ही संभव हैं, यह कहकर उन्होंने देवताओ को सत्य से अवगत कराया ..अब पालनकर्ता यह कार्य नहीं कर सकते तो वरदान से उनकी संगिनी तो कर सकती हैं, यह सोचकर देवराज को देवी लक्ष्मी का ख्याल आया परन्तु देवी उस वक़्त विष्णु लोक में नहीं थी.. विष्णु लोक से निकलकर, देवताओ ने देवराज के कथनुसार माँ लक्ष्मी का आवाहन किया.. देवी लक्ष्मी तुरंत प्रकट हुई और देवताओ ने उनसे महिषासुर का अंत करने का निवेदन किया.. देवी अपनी असमर्थता जतलाते हुए बोली की यह कार्य उनके अकेले के लिए संभव नहीं था क्योंकि महिषासुर ने धन संपत्ति,ज्ञान और मन का तो दुरूपयोग किया था ही परन्तु उससे कही ज्यादा उसने अपने शक्ती, बल, समय (काल) का अनुचित प्रयोग किया था.. देवी लक्ष्मी धन संपत्ति की रक्षिका होने के कारन अकेले महिषासुर का दंडित नहीं कर सकती थी..
देवताओ तथा समस्त संसार की चिंता हरने , देवी लक्ष्मी ने देवतो से कहा कि इस सन्दर्भ में ,वे प्रयन्त जरुर करेंगी.. उसके पश्चात देवी लक्ष्मी , देवी सरस्वती के पास गयी और फिर वे दोनों साथ मिलकर शिव-संगिनी देवी पारवती के पास गयी.. देवी पारवती के सुझाव अनुसार , तीनों 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ' का जाप कर, तपस्या में लींन होकर , तीनो ज्योति में परवर्तित हो गयी और तीनों ज्योतिया संघठित होकर एक अज्ञात स्थान में अदृश्य हो गयी.. देवता इस बात से काफी प्रसन्न हुए मगर असुर गुरु शुक्राचार्य चिंता में पड़ गये... स्वर्ग, में वासना के रंग में डूबे, महिषासुर को उन्होंने इस घटना से अवगत कराया.. महिषासुर भी चिंतीत हो गया और अपने गुरु से इस परेशानी का उपाय पूछने लगा, क्योकि त्रिदेवियो के सम्मिलत ज्योति से महिषासुर का अंत हो सकता था. शुक्राचार्य ने महिषासुर को महादेव की तपस्या करने का आदेश दिया.. गुरु की आज्ञा का अनुसरण कर , महिषासुर तपस्या करने लगा और उसमे सफल भी हुआ.. तपस्या करने के कारण महिषासुर सत्कर्म सत्कर्म करने लगा पर वो भी अपने स्वार्थ के खातिर .. महादेव को भी आखिरकार उसे उसकी तपस्या का फल देने प्रकट होना ही पड़ा...
ब्रह्मदेव से मिले वरदान में उसने बदलाव करने हेतु इच्छा प्रकट कि और कोई स्त्री भी उसका वध न कर सके ऐसा वरदान माँगा.. महादेव ने कहा की यह संभव नहीं , क्योंकि भक्त और आराध्य के बीच के सबंध के चलते , आराध्य द्वारा दिए वरदान जैसा था वेसा ही रहता हैं..इसी कारण, उसका अंत एक स्त्री द्वारा निश्चित हैं.. महिषासुर ने कुछ समय विचार कर यह कहा की पुरषों के द्वारा उत्पन्न हुई स्त्री उसका वध कर सके , और वध करते समय वस्त्रहीन अवस्था में रहे.. महादेव को यह वरदान उसे देना ही पड़ा.. इससे महादेव तो अत्यधिक क्रोधित हुए ही तथा विष्णु, ब्रह्मा और अन्य सरे देवता भी क्रोधित हुए.. उनके क्रोध ने उर्जा का रूप लिया और उनकी देह से निकलर त्रिदेवियो की समिल्लित ज्योतियों से जा टकराए.. ज्योति तीव्र गति से पृथ्वी की और बढ़ी और विस्पोट के साथ पृथ्वी पर गिर पड़ी.. एक अत्यंत सुंदर स्त्री वहा प्रकट हुई..बाद में इसी शक्ति ने महिषासुर का वध किया…..

🔥 क्या सच में अगस्त्य मुनि ने पूरा समुंदर पी लिया था?यह कथा सिर्फ चमत्कार नहीं… बल्कि धर्म और संतुलन की महागाथा है! 🌊🕉️ज...
16/02/2026

🔥 क्या सच में अगस्त्य मुनि ने पूरा समुंदर पी लिया था?
यह कथा सिर्फ चमत्कार नहीं… बल्कि धर्म और संतुलन की महागाथा है! 🌊🕉️
जब अधर्म बढ़ा, दैत्यों का आतंक छा गया और देवता असहाय हो गए… तब एक ऋषि ने अपनी तपस्या की शक्ति से असंभव को संभव कर दिया! 😳
⚡ वृत्तासुर का अंत, पर संकट खत्म नहीं…
देवराज इंद्र ने महर्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र बनाकर वृत्तासुर का वध तो कर दिया, लेकिन डरकर सारे दैत्य समुद्र की गहराइयों में छिप गए।
रात होते ही वे बाहर निकलते और ऋषि-मुनियों पर हमला कर देते… धर्म डगमगाने लगा। 🌑
😨 देवता परेशान… समाधान कहाँ?
समुद्र इतना विशाल और गहरा था कि उसके भीतर छिपे दैत्यों को ढूँढ पाना असंभव था। तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास पहुँचे।
विष्णु बोले —
“जब तक समुद्र सूखेगा नहीं, दैत्यों का अंत संभव नहीं…
और यह कार्य केवल एक महातपस्वी ही कर सकता है — अगस्त्य मुनि!” 🧘‍♂️✨
🌊 ऋषि ने उठाया कमंडल… और पी लिया सारा समुद्र!
देवताओं की विनती सुनकर अगस्त्य मुनि समुद्र तट पर पहुँचे।
उन्होंने अपने हाथों से जल उठाया… और पीना शुरू किया।
देखते ही देखते —
लहरें शांत, गहराइयाँ खाली…
पूरा समुद्र सूख गया! 😳🌊
अब छिपे हुए दैत्य साफ दिखाई देने लगे।
देवताओं ने तुरंत आक्रमण किया और अधर्म का अंत कर दिया। ⚔️🔥
😮 लेकिन फिर… समुद्र वापस क्यों नहीं भरा?
जब देवताओं ने समुद्र का जल लौटाने को कहा, अगस्त्य मुनि मुस्कुराए और बोले —
“यह जल अब मेरे भीतर पच चुका है…”
देवता चकित रह गए और ब्रह्मा जी के पास पहुँचे।
ब्रह्मा जी ने भविष्य का रहस्य बताया —
“जब राजा भगीरथ कठोर तप करेंगे, तब माँ गंगा पृथ्वी पर अवतरित होंगी…
और उनके पावन जल से फिर से सारे समुद्र भर जाएंगे।” 🌊🙏
✨ यही कारण है कि अगस्त्य मुनि की कथा हमें सिखाती है —
जब धर्म संकट में हो, तो एक तपस्वी की शक्ति पूरी सृष्टि का संतुलन बदल सकती है! 🕉️💫

15/02/2026
15/02/2026

आज Gorakhpur के गोरक्ष प्रांत में आयोजित “सामाजिक सद्भाव बैठक” का वातावरण उस समय और भी दिव्य एवं भावपूर्ण हो गया, जब भारत माता की आरती पूरे श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न हुई।

इस गरिमामयी अवसर पर Mohan Bhagwat जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष प्रेरणा दी। उनके मार्गदर्शन और उपस्थित सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं की सहभागिता ने एकता, समरसता और राष्ट्रभक्ति की भावना को और सुदृढ़ किया।

आरती के समय उपस्थित सभी लोगों के मन में गर्व, श्रद्धा और समर्पण की भावना स्पष्ट झलक रही थी। वह क्षण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति कृतज्ञता और निष्ठा का प्रतीक था।

ऐसे आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि जब समाज एक साथ खड़ा होता है, तो सद्भाव और सेवा की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।

“भारत माता की आरती — गर्व, श्रद्धा और एकता का अद्भुत संगम।” 🇮🇳
आज का दिन सच में गौरव से भर देने वाला रहा।







आज Gorakhpur के गोरक्ष प्रांत में आयोजित “सामाजिक सद्भाव बैठक” में Mohan Bhagwat जी का आगमन हुआ। वे Rashtriya Swayamseva...
15/02/2026

आज Gorakhpur के गोरक्ष प्रांत में आयोजित “सामाजिक सद्भाव बैठक” में Mohan Bhagwat जी का आगमन हुआ। वे Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) के छठे सरसंघचालक हैं और 2009 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। उनके प्रेरणादायी विचारों ने समाज में एकता, समरसता और राष्ट्र सेवा की भावना को और मजबूत किया।

इस गरिमामयी अवसर पर कसौधन सेवा समिति, रस्तमपुर, गोरखपुर के अध्यक्ष समाजसेवी श्री राम दयाल कसौधन जी भी उपस्थित रहे।

सन 2020 में स्थापित कसौधन सेवा समिति निरंतर समाज सेवा के कार्यों में समर्पित है। गोरखपुर से लेकर Prayagraj तक यह समिति शिक्षा, सहयोग, आपदा सहायता और सामाजिक एकता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है।

समिति के सभी सदस्य निःस्वार्थ भाव से समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं।
आइए, हम सब मिलकर सेवा, सद्भाव और संस्कार की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

“सेवा ही संस्कार है, और संस्कार ही समाज की शक्ति।”
कसौधन सेवा समिति के साथ जुड़ें और समाज परिवर्तन का हिस्सा बनें।








03/02/2026

प्रयागराज – माघ मेला | कसौधन सेवा समिति | प्रसाद भंडारा व पूजा

मग़ मेला, प्रयागराज
कसौधन सेवा समिति द्वारा
पूजन-अर्चन एवं हवन कार्यक्रम।
माँ गंगा से समाज और देश के कल्याण की प्रार्थना।

03/02/2026

प्रयागराज – माघ मेला | कसौधन सेवा समिति | प्रसाद भंडारा व पूजा

सेवा भी… साधना भी…
प्रसाद भंडारा एवं पूजन कार्यक्रम
कसौधन सेवा समिति | मग़ मेला, प्रयागराज
समर्पण भाव से समाज सेवा। 🌺

Address

Rustampur
Gorakhpur
273016

Opening Hours

Monday 10am - 8pm
Tuesday 10am - 8pm
Wednesday 10am - 8pm
Thursday 10am - 8pm
Friday 10am - 8pm
Saturday 10am - 8pm
Sunday 10am - 8pm

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