16/02/2026
महिषासुर आधा महिष और आधा मनुष्य रुपी असुर क्यों था?
महिषासुर को असुरो का राजा बनाया गया, तो रक्तबीज को सेनापती.. अग्निदेव और यक्षराज सम्भरण को देवराज इंद्र ने स्वर्ग से बहिष्कृत किया था.. इसी कारण उन दोनों ने महिषासुर का साथ देना उचित समझकर , इंद्र से प्रतिशोध लेनी की ठानी.. यक्षराज के कहेनुसार इच्छित वरदान पाने हेतु, महिषासुर ने ब्रह्म तपस्या आरंभ की.. देवराज ने इस बार महिषासुर के तपस्या भंग करनी चाही परन्तु पंचाग्नी ब्रह्म तपस्या में अवरोद्ध उत्पन्न नहीं कर पाए .. आखिरकर जब ब्रह्मा, महिषासुर के सामने प्रकट हुए तो महिषासुर ने अमरता के वरदान की इच्छा की पर ब्रह्मदेव ने यह कहते हुए उसे वरदान देने से साफ़ मना किया की जो जन्मा है उसका मरण निश्चित है और यह विधी का विधान हैं.. महिषासुर ने कुछ समय सोचा और अपार शक्तिया, रूप बदलने की क्षमता , प्रचंड सेना, अस्त्र-शास्त्र प्रकट करना और कोई भी पुरुष देव, दानव, मानव, राक्षस उससे मार न सके ऐसा वरदान माँगा.. ब्रह्मदेव उससे ये वरदान देकर चले गए.. सर्व श्रेष्ट त्रिदेवो में विष्णु अथवा महादेव ही महिषासुर का अंत कर सकते थे.. इस बात से महिषासुर भलीभांति सचेत था परन्तु वह देवी शक्ती के अस्तित्व से अन्भिज्ञ था इसीलिए, उसे इस बात का अभ्यास नहीं हुआ की कोई स्त्री उसका वध करने में सक्षम हो सकती हैं क्योंकि उसकी सोच थी की कोई भी नारी उस जैसे शक्तिशाली असुर का वध कर ही नहीं सकती..
देवराज को जैसे भविष्य में होनेवाली घटनाओं का आभास हुआ था, ठीक वेसा ही हुआ. महिषासुर ने देवराज इंद्र को उनके स्वर्ग से निकाल दिया तथा बाकि सारे देवो को उनके कार्य न करने का आदेश और चेतवानी दी.. पृथ्वी पर देव पूजा कर रहे , मानवों पर भी उसने अत्याचार करने शुरू किये.. सारे देवता, इस विकट समय में पालनकर्ता विष्णु के पास स्वयं का उद्दार हेतु, प्राथना करने विष्णुलोक गए.. पर ब्रह्मा के वरदान अनुसार, पालनकर्ता विष्णु भी विवश थे.. वरदान के मुताबित , महिषासुर का अंत कोई स्त्री शक्ति द्वारा ही संभव हैं, यह कहकर उन्होंने देवताओ को सत्य से अवगत कराया ..अब पालनकर्ता यह कार्य नहीं कर सकते तो वरदान से उनकी संगिनी तो कर सकती हैं, यह सोचकर देवराज को देवी लक्ष्मी का ख्याल आया परन्तु देवी उस वक़्त विष्णु लोक में नहीं थी.. विष्णु लोक से निकलकर, देवताओ ने देवराज के कथनुसार माँ लक्ष्मी का आवाहन किया.. देवी लक्ष्मी तुरंत प्रकट हुई और देवताओ ने उनसे महिषासुर का अंत करने का निवेदन किया.. देवी अपनी असमर्थता जतलाते हुए बोली की यह कार्य उनके अकेले के लिए संभव नहीं था क्योंकि महिषासुर ने धन संपत्ति,ज्ञान और मन का तो दुरूपयोग किया था ही परन्तु उससे कही ज्यादा उसने अपने शक्ती, बल, समय (काल) का अनुचित प्रयोग किया था.. देवी लक्ष्मी धन संपत्ति की रक्षिका होने के कारन अकेले महिषासुर का दंडित नहीं कर सकती थी..
देवताओ तथा समस्त संसार की चिंता हरने , देवी लक्ष्मी ने देवतो से कहा कि इस सन्दर्भ में ,वे प्रयन्त जरुर करेंगी.. उसके पश्चात देवी लक्ष्मी , देवी सरस्वती के पास गयी और फिर वे दोनों साथ मिलकर शिव-संगिनी देवी पारवती के पास गयी.. देवी पारवती के सुझाव अनुसार , तीनों 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ' का जाप कर, तपस्या में लींन होकर , तीनो ज्योति में परवर्तित हो गयी और तीनों ज्योतिया संघठित होकर एक अज्ञात स्थान में अदृश्य हो गयी.. देवता इस बात से काफी प्रसन्न हुए मगर असुर गुरु शुक्राचार्य चिंता में पड़ गये... स्वर्ग, में वासना के रंग में डूबे, महिषासुर को उन्होंने इस घटना से अवगत कराया.. महिषासुर भी चिंतीत हो गया और अपने गुरु से इस परेशानी का उपाय पूछने लगा, क्योकि त्रिदेवियो के सम्मिलत ज्योति से महिषासुर का अंत हो सकता था. शुक्राचार्य ने महिषासुर को महादेव की तपस्या करने का आदेश दिया.. गुरु की आज्ञा का अनुसरण कर , महिषासुर तपस्या करने लगा और उसमे सफल भी हुआ.. तपस्या करने के कारण महिषासुर सत्कर्म सत्कर्म करने लगा पर वो भी अपने स्वार्थ के खातिर .. महादेव को भी आखिरकार उसे उसकी तपस्या का फल देने प्रकट होना ही पड़ा...
ब्रह्मदेव से मिले वरदान में उसने बदलाव करने हेतु इच्छा प्रकट कि और कोई स्त्री भी उसका वध न कर सके ऐसा वरदान माँगा.. महादेव ने कहा की यह संभव नहीं , क्योंकि भक्त और आराध्य के बीच के सबंध के चलते , आराध्य द्वारा दिए वरदान जैसा था वेसा ही रहता हैं..इसी कारण, उसका अंत एक स्त्री द्वारा निश्चित हैं.. महिषासुर ने कुछ समय विचार कर यह कहा की पुरषों के द्वारा उत्पन्न हुई स्त्री उसका वध कर सके , और वध करते समय वस्त्रहीन अवस्था में रहे.. महादेव को यह वरदान उसे देना ही पड़ा.. इससे महादेव तो अत्यधिक क्रोधित हुए ही तथा विष्णु, ब्रह्मा और अन्य सरे देवता भी क्रोधित हुए.. उनके क्रोध ने उर्जा का रूप लिया और उनकी देह से निकलर त्रिदेवियो की समिल्लित ज्योतियों से जा टकराए.. ज्योति तीव्र गति से पृथ्वी की और बढ़ी और विस्पोट के साथ पृथ्वी पर गिर पड़ी.. एक अत्यंत सुंदर स्त्री वहा प्रकट हुई..बाद में इसी शक्ति ने महिषासुर का वध किया…..