03/09/2026
काफ़ी समय से दादाजी की छोटी-छोटी ज़रूरतों में उनका साथ देने का अवसर मिलता रहा है। जब भी मैं उनसे मिलने जाती हूँ, उनके चेहरे की मुस्कान दिल को सुकून देती है। कई दिनों बाद मिलने पर वे अक्सर कहते हैं, "बेटा, मैं सोच रहा था कि तुम कब आओगी।"यह सुनकर एहसास होता है कि किसी के जीवन में अपनापन बन जाना सबसे बड़ी खुशी है।❤️🙏