Islamic topic history

Islamic topic history Assalamualaikum
طَلَبُ الْعِلْمِ فَرِيضَةً عَلَى كُلِّ مُسْلِمٍ

(Ilm deen hasil karna har Musalmaan par farz h Aap hme follow kro or deen sikho

*हिस्सा 03*            *मीलादे मुस्तफ़ा: ﷺ*          *मीलाद और क़ुरआन**_________________________________________________...
21/08/2026

*हिस्सा 03*

*मीलादे मुस्तफ़ा: ﷺ*

*मीलाद और क़ुरआन*
*_________________________________________________*
*_हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की विलादते पाक की खुशी मनाना जायज़ वोह दुरुस्त है आइये क़ुरआन की रौशनी में एक वाकिया पढ़ें और आप खुद फैसला करें_*

*_हजरत ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वालों ने आप से सवाल किया कि क्या आप का रब आसमानों से पका पकाया खानों से भरा हुआ दस्तरखान भेजने पर कादिर है? ह़ज़रते ईसा अलैहिस्सलाम ने फरमाया अगर ईमान वाले हो तो अल्लाह से डरो मतलब यह कि ईमानदार होकर अल्लाह तआला की कुदरत का इंकार ना करो, ईसा अलैहिस्सलाम ने कहा हाँ मेरा अल्लाह ऐसा कर सकता है और फिर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने दुआ की, जिसका ज़िक्र क़ुरआन इस अन्दाज़ में कर रहा है अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है कि_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:---- ईसा बिन मरियम ने अर्ज़ की ऐ मेरे अल्लाह आसमानों से हमारे लिए पके पकाए खानों से भरा हुआ दस्तरख्वान नाज़िल फरमा दे, ताकि हमारे लिए हम से पहेलों के लिए और बाद में आने वालों के लिए ईद हो जाए_*

*📕📚पारा 7, सूरह माइदा, आयत 114*

*_अल्लाह तआला ने ह़ज़रते ईसा अलैहिस्सलाम की दुआ क़ुबूल करते हुए बेहतरीन खानों से भरा हुआ दस्तरखान उतार दिया और इस तरह हजरते ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वालों की ईद हो गई, कुरान पाक की इस आयत से यह हकीकत पूरी तरह से वाज़ेह हो जाती है कि जिस दिन अल्लाह करीम की तरफ़ से कोई निअमत अता हो, इमान वालों के लिए वह ईद का दिन बन जाता है, और फिर ईद के दिन हर तरह की खुशी, हर तरह का जश्न ,हर किस्म की चहल-पहल मनाने के साथ-साथ साफ-सुथरे कपड़े पहनने, खुशबू लगानी, गुसल करना, दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना, मिठाई तक्सीम करना, और हर एक को मुबारकबाद देना, हर लिहाज़ से जायज और दुरुस्त है_*

*_इसी तरह 12 रबी उल अव्वल शरीफ़ के मुबारक दिन में अल्लाह तआला की तरफ से सबसे बड़ी निअमत हम मुसलमानों को सय्यिदुल अम्बिया हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की नूरानी सूरत में सारी नस्ले इंसानी की हिदायत के लिए अहले ईमान को अता हुई, इसलिए बरेलवी ह़ज़रात इस निअमते उज़मा की खुशी में जश्ने ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि सल्लम मनाते हैं, मिठाई तक्सीम करते हैं ,बाजार सजाते हैं, खूबसूरत मेहराबें बनाते हैं, झन्डियां लगाते और लहराते हैं, एक-दूसरे को मुबारकबाद पेश करते हैं , नात ख़्वानी का लुत्फ़ उठाते हैं, और हुज़ूर की बारगाह में दुरुदो सलाम के फूल निछावर करते हैं, और फिर लुत्फ़ की बात तो यह कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की विलादते पाक के वक्त यह सब कुछ हुआ, झंडे खुदा के हुक्म पर जिब्राईल ने लहराए, दुरुदो सलाम फरिश्तों ने पढ़ा ,मुबारकबाद जानवरों ने दी, ऐलान नबियों ने किया, मुनादी जिब्रील ने सुनाई, और गवाही शजरो ह़जर ने दी,_*

*_आप खुद सोंचें कि जिस दिन आसमान से ख़्वान नाज़िल हुआ वो दिन इतवार का था और आज भी ईसाई इतवार के दिन खुशी यानि छुट्टी मनाते हैं सोचिए कि हजरते ईसा अलैहिस्सलाम ख़्वान के नाज़िल होने पर तो ईद का हुक्म दे रहे हैं तो क्या माज़अल्लाह हमारे नबी की विलादते पाक, एक खाने से भरे हुए तश्त से भी कम है, कि हम सुन्नी मुसलमान उस पर खुशी नहीं मना सकते, बेशक हमारे और आप सबके नबी दुनिया की सारी निअमतों से बढ़कर हैं, येह मैं अपनी तरफ़ से नहीं बल्कि खुद अल्लाह तआला क़ुरआन मजीद में इरशाद फरमा रहा है पढ़िए और फैसला करिये_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:---- बेशक अल्लाह का बड़ा एहसान हुआ मुसलमानों पर कि उनमें उनहीं में से एक रसूल भेजा जो उन पर उसकी आयतें पढ़ते हैं और उन्हें पाक करते हैं और उन्हें किताब और हिक़मत सिखाते हैं_*

*📕📚पारा 4, सूरह आले इमरान, आयत 164*

*_अल्लाह तआला ने हम इंसानों को कितनी बड़ी बड़ी निअमतें अता फरमाई मसलन हम को आँख दिया, कान, नाक, मुंह, ज़बान, दिल, जिगर, हाथ, पैर, फिर सांसें, कहते हैं कि किसी मेडिकल रिसर्चर का बयान है कि एक इंसान के जितने भी आज़ा (अंग) हैं वैसे तो उनकी कोई कीमत ही नहीं सब अनमोल हैं लेकिन फिर भी मेडिकल सांइस एक इंसान को तक़रीबन 300 करोड़ रुपये की मिल्क समझती है, सुब्हानअल्लाह, हर इंसान 300, करोड़ रुपये का है फिर उस पर जो रब ने निअमतें दी जैसे ज़िन्दगी गुज़ारने के लिए कितने ही साज़ो सामान दिया, फिर माँ, बाप, भाई, बहन, दोस्त, अहबाब, तमाम रिश्ते दार, उस्ताद, इतनी निअमतें अल्लाह ने दी है कि कोई शुमार ही नहीं कर सकता, मगर क़सम अल्लाह की पूरा क़ुरआन उठा कर देख लीजिए किसी भी निअमत पर अल्लाह ने अहसान नहीं जताया, अल्हमदू की अलिफ़ से वन्नास की सीन देख लें कहीं नहीं मिलेगा, मगर जब अपने महबूब सरवरे काएनात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को जब बन्दों के दरमियान भेजा तब फरमाया मैंने अहसान किया मुसलमानों पर कि उन्में उन्हीं में से एक रसूल भेजा, ज़रा सोचिए कि हुज़ूर की विलादते पाक कितनी बड़ी निअमत है, अब आप फैसला करें कि हजरते ईसा अलैहिस्सलाम के मानने वालों के लिए आसमान से ख़्वान आने पर तो ईद मनाई गई तो फिर मुस्तफ़ा जाने रहमत सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के आने पर ईद मनाना शिर्क कैसे हो गया? जबकि अल्लाह ने तो खुद अपनी दी हुई निअमतों का चर्चा करने का हुक्म दे रहा है_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:---- और अपने रब की निअमत का खूब चर्चा करो,_*

*📕📚पारा 30, सूरह वद्दोहा, आयत 11*

*_मैं तमाम बद अक़ीदों वहाबियों से पूछता हूँ कि क्या हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से बढ़कर भी कोई निअमत हो सकती है,? नहीं- नहीं - नहीं- हरगिज़ नहीं, तो हम सुन्नी बरेलवी जब रब की दी हुई अज़ीम निअमत का चर्चा करते हैं तो फिर हम ग़लत कैसे हो गये? सच तो येह है कि जो उसकी दी हुई निअमतों का चर्चा नहीं करते वोह एहसान फरामोश गद्दार हैं_*
*__________________________________________*

मीलाद और क़ुरआन**_________________________________________________**_कल की पोस्ट में क़ुरआन की चंद आयतों के साथ साथ येह ...
20/08/2026

मीलाद और क़ुरआन*
*_________________________________________________*

*_कल की पोस्ट में क़ुरआन की चंद आयतों के साथ साथ येह भी बयान किया था कि किसी की पैदाइश का तज़किरह करना ही मीलाद है जैसा कि क़ुरआन मजीद में खुदा'वंद तआला ने अक्सर अम्बिया अलैहिस्सलाम का जिक्रे ख़ैर करते हुए साथ-साथ उनकी ज़िन्दगियों के हालात को भी पूरी तफसील से बयान फरमाया है! मसलन हजरत यह़या अलैहिस्सलाम की विलादते पाक का जिक्र करते हुए इरशाद होता है कि_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:----- जिस दिन हजरत यह़या अलैहिस्सलाम पैदा हुए उस दिन पर सलाम- या उनकी विलादत पर सलाम_*

*📕📚पारा 16 सूरह मरियम आयत 15*

*_और हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम की पैदाइश का तज़किरह करते हुए फरमाया गया कि_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:----- जिस दिन मैं पैदा हुआ उस दिन पर मेरा ही सलाम मुझ पर_*

*📕📚पारा 16 सूरह मरियम आयत नं 33*

*_इनके अलावा हजरते इब्राहीम, हजरते मूसा, हजरते युनुस, हजरते याकूब, और हजरते यूसुफ अलैहिस्सलाम, की विलादते पाक का जिक्र खैर और इमामुल अम्बिया सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के मिलाद शरीफ़ के बयान, के साथ-साथ आप की आमद की इत्तला- तशरीफ़ आउरी की खबर के साथ-साथ आपकी मुकद्दस जिंदगी के हर पहलू पर रोशनी डाली गई_*

*_कहीं आपके खुलक़े अज़ीम का तज़किरह है,और कहीं आपके लुतफो करम का जिक्र है, कहीं तो आपके हुस्नो जमाल की तस्वीर है, और कहीं आपके खुतबात की तफ़सीर है, किसी जगह पर मिम्बरे पाक पर आपकी जलवा फरमाई का बयान है, और किसी मकाम पर मैदाने जिहाद में आपकी सिपह'सालारी का तज़किरह है, और कभी: وَإِذْ أَخَذَ ٱللَّهُ مِيثَٰقَ ٱلنَّبِيِّىن,:- फरमा कर तमाम अम्बिया अलैहिस्सलाम से आप की रिसालत पर ईमान लाने का अहेद लिया जा रहा है और कभी ( مُبَشِّرًۢا بِرَسُولٍۢ يَأْتِى مِنۢ بَعْدِى ٱسْمُهُۥٓ أَحْمَدُ ۖ:-) कहकर रुहुल्लाह से उनकी आमद की खुशखबरी दिलाई जा रही है कभी:-رَبَّنَا وَٱبْعَثْ فِيهِمْ رَسُولًا:-के अलफ़ाज़ में हजरते खलीलुल्लाह अलैहिस्सलाम से उन्हें मबऊस करने की दुआ कराई जा रही है और कभी :-قَدْ جَاءَكُمْ مِنَ اللَّهِ نُورٌ:-फरमा कर खुद आप की तशरीफ़ आउरी का आम एलान फरमा रहा है और यही तो मिलादे पाक है_*

*_अब आलमे अरवाह का भी एक वाकिया सुन लो, जहाँ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने अपने महबूब सरवरे काएनात सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की शान बयान करने के लिए तमाम नबियों को इकठ्ठा कर लिया, अगर यूँ कह लिया जाए तो कोई बेजा न होगा कि अल्लाह ने महफिले मिलाद सजा ली और तमाम नबियों से फरमाया कि अगर तुम्हारे पास मेरा महबूब (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) तशरीफ़ लायें तो तुम्हें सब कुछ छोड़ कर उनकी इत्तबा करनी होगी, और फरमाया कि जो इस अहद को तोड़ेगा तो वोह फासिक़ है, अल्लाहु अकबर अल्लाहु अकबर, अल्लाह नबियों से कह रहा है कि अगर मेरे महबूब तुम लोगों के पास तशरीफ़ लायें तो तुम सब उनकी इत्तबा करना और उनकी मदद करना, और उन पर ईमान लाना,आखिर में यहाँ तक कह दिया कि जो इस अहेद को तोड़े वोह फासिक़ है,येह कौन कह रहा है हमारा और आप सब का रब कह रहा है, किससे? अपने मासूम नबियों से, क्यों? क्योंकि बात उसके महबूब की है, इसलिए कह रहा है, येह सब मैं अपनी तरफ़ से नहीं कह रहा हूँ बल्कि क़ुरआन गवाह है आप खुद पढ़ें और फैसला करें अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरआन मजीद में इरशाद फरमाता है कि_*

*_क़ुरआन:- तरजुमा कंज़ुल ईमान:----- और याद करो जब अल्लाह ने पैगंबरों से अहद लिया जो मैं तुमको किताब और हिकमत दूं फिर तशरीफ़ लायें तुम्हारे पास वो रसूल कि तुम्हारी किताब की तस्दीक़ फरमायें तो तुम ज़रूर ज़रूर उन पर ईमान लाना और उनकी मदद करना, क्या तुमने इक़रार किया और उस पर मेरा भारी ज़िम्मा लिया, सबने अर्ज़ की हमने इक़रार किया, फरमाया तो एक दूसरे पर गवाह हो जाओ, और मैं खुद तुम्हारे साथ गवाहों में हूँ, तो जो कोई इसके बाद फिरे तो वही लोग फासिक़ हैं_*

*📕📚पारा 3, सूरह आले इमरान आयत नं 81/82*

*_आपने तो पढ़ ही लिया होगा कि आलमे अरवाह में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की शान बयान करने के लिए तमाम नबियों को इकट्ठा किया और कहा कि जब तुम्हारे दरमियान मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम तशरीफ़ लायें तो उनकी मदद करना और उनकी इत्तबा करना और तमाम नबियों ने इक़रार भी किया, अब तमाम बद अक़ीदों से मेरा सवाल है कि तमाम नबियों को बुलाना और नबी की शान बयान करना क्या येह मिलाद नहीं है,? अरे यही तो मिलादे मुस्तफ़ा: सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम है, आज हम उसके महबूब का ज़िक्र करें तो मुश्रिक,महफ़िले मीलाद सजायें तो मुश्रिक, हुज़ूर की आमद के दिन खुशी मनायें तो मुश्रिक, मिलादे मुस्तफ़ा ﷺ करें तो मुश्रिक,,झंडे लगायें तो मुश्रिक, और रब तबारका व तआला भी तो नबी ए पाक का मिलाद पढ़ रहा है अब यहाँ क्या हुक्म लगाओगे वहाबियों?*
*______________________________________________*

19/08/2026

Suniye 💞

*_तो अब यूँ समझें कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात व औसाफ़ व उनके अहवाल व अक़वाल के बयान को ही मिलादे मुस्...
18/08/2026

*_तो अब यूँ समझें कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात व औसाफ़ व उनके अहवाल व अक़वाल के बयान को ही मिलादे मुस्तफ़ा कहा जाता है, हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की विलादत पर इबलीस को छोड़ कर तमाम ख़िलक़त ने उनकी पैदाइश की खुशी मानाई, बल्कि खुद अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त, हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद पढ़ता है ,अब मैं क़ुरआन पाक की चंद आयतें आपके सामने पेश करता हूँ वैसे तो पूरा क़ुरआन ही मेरे आक़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की शान से भरा हुआ है लेकिन फिर भी कुछ आंख के अंधों को येह आयतें नहीं दिखाई देती वोह लोग मीलाद मनाने को शिर्क और बिदअत कहते हैं, अल्लाह तआला क़ुरआन मजीद में इरशाद फरमाता है कि_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:---- बेशक तुम्हारे पास तश़रीफ़ लायें तुममे से वो रसूल जिन पर तुम्हारा मशक़्क़त में पड़ना गिरां है तुम्हारी भलाई के निहायत चाहने वाले मुसलमानों पर कमाल मेहरबान_*

*📕📚पारा 11 सूरह तौबा आयत 128*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:---- वही है जिस ने अपना रसूल हिदायत और सच्चे दीन के साथ भेजा_*

*📕📚पारा 10 सूरह तौबा आयत 33*

*_अल्लाह तआला ने पहली आयत में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के तशरीफ़ लाने का और उनके औसाफ़ को बयान फरमाया, और दूसरी आयत में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को भेजने का ज़िक्र कर रहा है, और भेजा उसे जाता है जो पहले से कहीं मौजूद हो, तो मलतब साफ़ है कि हमारे और सब के आक़ा हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम पहले से ही आसमान पर या अर्शे आज़म पर, या जहाँ भी रब ने उन्हें रखा वोह वहाँ मौजूद थे,, एक मज़े की बात, हम हुज़ूर की मीलाद करें तो हम पर शिर्क और बिदअत के फतवे लगते हैं, लेकिन क़ुरआन में अल्लाह ने हुज़ूर के तशरीफ लाने का बयान और उनके औसाफ़ का भी बयान फरमा रहा है क्या येह हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद नहीं है? अब तमाम बद अक़ीदों वहाबियों को खुला चैलेंज है कि अल्लाह तआला खुद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद पढ़ रहा है, अब खुदा पर क्या हुक्म लगाओगे?_*

*_फिर एक जगह अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है कि_*

*_क़ुरआन: तर्जुमा कंज़ुल ईमान:---- बेशक तुम्हारे पास अल्लाह की तरफ़ से एक नूर आया और रौशन किताब_*

*📕📚पारा 6, सूरह माइदा, आयत 15*

*_इस आयत में नूर से मुराद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हैं और किताब से मुराद क़ुरआने मुक़द्दस है_*

*_इसीलिए तो आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा खान बरेलवी इरशाद फरमाते हैं कि_*

*_तेरी नसले पाक में है बच्चा बच्चा नूर का!_*
*_तू है अएने नूर तेरा सब घराना नूर का!_*

*_हजरते ईसा अलैहिस्सलाम ने ख़ुद मेरे आक़ा सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का मीलाद पढ़ा अब येह वहाबी क्या हज़रते ईसा अलैहिस्सलाम पर भी कुछ हुक्म लगायेगा? पढ़े और फैसला करें_*

*_और याद करो जब ईसा बिन मरियम ने कहा---- और उन रसूल की बशारत सुनाता हूँ जो मेरे बाद तशरीफ़ लायेंगे उनका नाम अहमद है_*

*📕📚पारा 28, सूरह सफ आयत 6*

*_येह हुज़ूर की मीलाद नहीं है तो क्या है_*
*________________________________________*

17/08/2026

Marne k baad 5 sawal

Address

Gorakhpur
273001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Islamic topic history posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share