16/09/2020
पीएम मोदी के जन्मदिवस पर युवा मनाएंगे #राष्ट्रीय_बेरोजगार_दिवस
जरा सोचिए देश में किसी राज्य या संसदीय क्षेत्र में चुनाव होता है और उस चुनाव में धांधली हो जाती है फिर चुनाव का मुद्दा हाई कोर्ट में जाता है, कुछ समय बाद सुप्रीम कोर्ट में और अंततः चुनाव निरस्त कर दिया जाता है साथ ही चुनाव लड़ने वाले कैंडिडेट को जमानत राशि भी वापस नहीं हो, ऐसा बार-बार हो तो हमारे तथाकथित विकास पुरुष का तमगा लगाए नेताजी जो विकास की गंगा बहाने का दावा करते हो उन पर क्या बीतेगी?
कुछ ऐसा ही हाल देश के युवाओं का है। देश की गिरती हुई अर्थव्यवस्था के बीच युवाओं ने रोजगार और समय पर भर्ती परीक्षा ना होने को लेकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है।
समय पर भर्ती ना होना, उत्तर प्रदेश बिहार जैसे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में रोजगार हेतु पर्याप्त इंडस्ट्री का न होना, सरकारी एग्जाम में विभिन्न अड़चनों के होने से युवाओं का कई साल बर्बाद हो जाता है और भविष्य अंधकारमय नजर आता है जिससे अधिकांश युवा और उनके परिवार वाले मानसिक दबाव में जीवन व्यतीत करते हैं।
नौकरियों को लेकर यदि युवा सरकार से सवाल भी करते हैं तो कुछ तथाकथित लोग सरकार के प्रवक्ता बनकर उन्हें स्व रोजगार का सलाह देते हैं लेकिन उनके मन में स्वयं के घर में बेटा / दामाद सरकारी नौकरी वाला हो, आकांक्षा रहती है । सरकार द्वारा स्वरोजगार के सृजन हेतु विभिन्न योजनाएं चलाई गई जैसे मुद्रा योजना, स्टार्टअप योजना, स्टैंड अप योजना इत्यादि। लेकिन इन योजनाओं का लाभ कुछ क्षेत्र में कुछ लोगों को ही मिला उसके बाद बैंक में एनपीए का ज्यादा बोझ होने की वजह से ये योजनाएं धरातल पर न उतर सकी।
बढ़ती जनसंख्या और महंगाई के दौर में बीटेक, एमसीए, एमबीए करने वाले युवा 7000 से ₹10000 पर नौकरी करने पर मजबूर है। देश की जीडीपी में भारी गिरावट तथा कोविड-19 महामारी को देखते हुए करोड़ों युवाओं की नौकरी पर बुरा असर पड़ा है कई कंपनियों ने सैलरी देना बंद कर दिया है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 5 वर्ष संविदा पर भर्ती करने पर विचार किया जा रहा है जिसे लेकर युवाओं में काफी आक्रोश है। समय पर परीक्षा ना होने से, परीक्षाओं में धांधली तथा विभिन्न प्रकार के अड़चनों से छात्रों पर मानसिक दबाव बना रहता है साथ ही कोई ढंग की प्राइवेट नौकरी भी नहीं मिलती है जिससे वह सम्मानजनक जिंदगी जी सकें।
अब समय आ गया है कि देश के युवा अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में इंडस्ट्री की मांग करें, साथ ही सरकार भर्तियों / परीक्षाओं को लेकर एक सशक्त योजना बनाएं जिससे युवाओं को नौकरी देने में किसी भी प्रकार की बाधाएं उत्पन्न ना हो, समय पर परीक्षा हो, सही कैंडिडेट को सही समय पर जॉइनिंग मिले और युवाओं का समय बचें।