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प्राचीन गुर्जरात्रा (गुर्जरदेश) और आधुनिक गुजरात राज्य मे क्या अंतर है?---प्राचीन गुर्जरात्रा या असली गुजरात आज के दक्षि...
24/09/2021

प्राचीन गुर्जरात्रा (गुर्जरदेश) और आधुनिक गुजरात राज्य मे क्या अंतर है?---

प्राचीन गुर्जरात्रा या असली गुजरात आज के दक्षिण पश्चिम राजस्थान में था,
इसमें आज के राजस्थान के पाली,जालौर, भीनमाल, सिरोही, बाड़मेर का कुछ हिस्सा, कुछ हिस्सा जोधपुर व् कुछ हिस्सा मेवाड़ का सम्मिलित था,
(इस प्राचीन प्रदेश का नामकरण 5 वी सदी के आसपास गुर्जरात्रा क्यों हुआ, औऱ कब से यह गौड़वाड़ कहलाने लगा, इसके विषय में अलग से पोस्ट करूँगा)।।

जो आज का गुजरात राज्य है वो उस समय तीन हिस्सों में अलग अलग विभाजित था,
1-आनर्त (आज के उत्तर गुजरात का इलाका)
2-सौराष्ट्र
3-लाट (आज का दक्षिण गुजरात)

भीनमाल प्राचीन गुर्जरात्रा की राजधानी थी, जिस पर सम्राट हर्षवर्धन बैंस के शासनकाल के समय चावड़ा राजपूत व्याघ्रमुख शासन करते थे। उस समय चावड़ा क्षत्रिय गुर्जरात्रा के शासक होने के कारण गुर्जरेश्वर कहलाते थे।
सम्राट वत्सराज की गल्लका प्रशस्ति के अनुसार प्राचीन गुर्जरात्रा पर इसके कुछ समय बाद ही नागभट्ट प्रतिहार ने कब्जा कर लिया तथा इस गुर्जरात्रा प्रदेश के शासक बनने के कारण वो भी गुर्जरेश्वर कहलाए।
लक्ष्मनवंशी रघुकुली क्षत्रिय नागभट्ट प्रतिहार ने चावड़ा क्षत्रियों से ही गुर्जरात्रा प्रदेश को जीता था।

चावड़ा वंश का शासन प्राचीन गुर्जरात्रा (राजधानी भीनमाल) से समाप्त हो गया और उन्होंने समीप के प्राचीन आनर्त देश (आज के गुजरात का उत्तरी भाग को आनर्त देश कहा जाता था) में पाटन अन्हिलवाड़ को राजधानी बनाया तथा अपने प्राचीन राज्य गुर्जरात्रा की स्मृति में नए स्थापित राज्य का नाम भी गुर्जरात्रा रख दिया।
चावड़ा वंश को उनके लेखों में चापोतक्ट लिखा मिलता है ,इन्हें परमार राजपूतो की शाखा माना जाता है।
अभी भी राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश में चावड़ा वंश की आबादी है, गुजरात मे तो चावड़ा राजपूतो की आज भी स्टेट हैं।

इस प्रकार प्राचीन आनर्त देश ही बाद में नये गुर्जरात्रा या गुजरात राज्य के रूप में प्रसिद्ध हुआ, पर प्रारम्भ में इसमें पाटन, साबरकांठा, मेहसाणा, बनासकांठा आदि ही शामिल थे।
दसवीं सदी में अंतिम चावड़ा शासक सामंतसिंह के बाद उनके रिश्तेदार मूलराज सोलंकी इस गुर्जरात्रा प्रदेश के स्वामी बने, इस कारण मूलराज सोलंकी व उनके वंशज भी गुर्जरेश्वर या गुर्जरराज कहलाए।
कालांतर में अन्हिलवाड़ा के सोलंकी राजवंश ने लाट क्षेत्र (आज का दक्षिण गुजरात) को भी अपने अधीन कर लिया और आनर्त व लाट का संयुक्त क्षेत्र अब गुर्जरात अथवा गुजरात कहा जाने लगा।।
ये सोलंकी राजपूत राजा भी इस नए गुजरात पर शासन करने के कारण ही गुरजेश्वर कहलाए।
किन्तु आभी भी सौराष्ट्र कच्छ का इलाका इस नए गुजरात से अलग ही रहा।

कालांतर में गुजराती भाषा का प्रचार प्रसार सौराष्ट्र में भी हो गया और 1947 के बाद समान भाषा के नाम पर जिस गुजरात नामक प्रदेश का निर्माण हुआ उसमे सौराष्ट्र और कच्छ का इलाका भी जोड़ दिया गया।
आज भी सौराष्ट्र वालो से पूछोगे तो वो गुजरात का अर्थ बस उत्तर गुजरात यानी पाटन,मेहसाणा,साबरकांठा आदि को ही कहेंगे।

इस प्रकार ही आज का आधुनिक गुजरात राज्य अस्तित्व में आया जबकि असली या प्राचीन गुजरात राज्य आज के दक्षिण पश्चिम राजस्थान के हिस्से को कहा जाता था जो आज के गुजरात से बिल्कुल अलग था।

जब आनर्त और लाट का संयुक्त हिस्सा नवीन गुजरात के रूप में प्रसिद्ध हो गया था तो प्राचीन गुर्जरात्रा प्रदेश का नाम भी समय के साथ बदलकर गौड़वाड़ हो गया, जो आज राजस्थान के पाली जालौर सिरोही के संयुक्त क्षेत्र को कहा जाता है।

आधुनिक पशुपालक गुज्जर जाति की जनसंख्या न तो प्राचीन गुर्जरात्रा में है न ही आधुनिक गुजरात राज्य में इन गुज्जरों की कोई आबादी है।
न तो प्राचीन गुजरात में गुज्जर हैं
न आधुनिक गुजरात में गुज्जर हैं!!!

न प्रतिहारों की प्राचीनतम राजधानी भीनमाल और मंडोर में गुज्जर हैं।
न ही प्रतिहारों के सबसे विशाल राज्य की राजधानी कन्नौज में गूजरों की कोई आबादी है!!

न ही आज गूजरों में कोई प्रतिहार परिहार वंश मिलता है,
गुजरात और कन्नौज में तो कोई जानता ही नही कि गुज्जर जाति होती क्या है!!!
फिर किस आधार पर ये प्रतिहार वंश और गुजरात पर दावा ठोकते हैं??

गुजरात के सुल्तान रहे महमूद बेगड़ा व बहादुरशाह को भी कई जगह गुर्जरराज लिखा मिलता है ,जबकि सभी जानते हैं कि वो धर्मांतरित टांक राजपूतो के वंशज थे।।
गुर्जरराज स्थानसूचक था जातिसूचक नही।।

आमेर के कच्छवाह राजपूत शासक मल्यसी देव को भी गुजरात पर अधिकार करने के कारण एक कवि द्वारा गुर्जरराज लिखा जाने का उल्लेख मिलता है।

इसी प्रकार 18 वी सदी में गुजरात मे बड़ौदा पर शासन स्थापित करने वाले गायकवाड़ मराठा भी गुरजेश्वर कहलाए जाते हैं।
गुरजेश्वर गुर्जराधिपति गुर्जरराज आदि उपाधियों का अर्थ है गुजरात प्रदेश के शासक न कि गुज्जर जाति के शासक, ये बात गुज्जर भाइयो को समझ लेनी चाहिए।

महात्मा गांधी व मौहम्मद अली जिन्ना भी बॉम्बे की संस्था 'गुर्जर सभा' के सदस्य थे ,क्योंकि दोनो गुजराती थे। दक्षिण अफ्रीका से लौटने पर आयोजित हुए समारोह में जिन्ना ने मोहनदास करमचंद गांधी को सभी गुर्जरों का गौरव बताया था ‼️
यहां गुर्जर जातिसूचक नही स्थानसूचक है।
क्या कुछ सदी बाद आप महात्मा गांधी व जिन्ना को भी गुज्जर कहोगे?

इसी प्रकार "गुर्जर गौड़ ब्राह्मण अर्थात गुर्जरात्रा प्रदेश से आए गौड़ ब्राह्मण न कि गुज्जर जाति के गौड़ ब्राह्मण"
इसी प्रकार गुर्जर सुथार या गुर्जर बनिये भी मिलते हैं जो स्थानसूचक हैं न कि जातिसूचक।

इसी प्रकार प्राचीन गुर्जरात्रा/गुर्जरा प्रदेश या आधुनिक गुर्जरात्रा/गुजरात के शासक क्षत्रिय राजवंश चावड़ा, प्रतिहार, सोलंकी गुर्जरेश्वर ,गुर्जराधिपति या गुर्जरराज कहलाए ,वो स्थानसूचक है न कि जातिसूचक।
इनका उत्तर भारत के राजस्थान, वेस्ट यूपी, पंजाब, जम्मू कश्मीर ,चंबल क्षेत्र की परम्परागत पशुपालक व बाद में कृषक बनी गुज्जर जाति से कोई सम्बन्ध नही है।।

कृपया वामपंथी इतिहाकारो के बहकावे में आकर सदियों से हम सबके पुरखो द्वारा स्थापित किया गया सौहार्द ,प्रेम व भाईचारा समाप्त न करें 🙏





#श्री_राष्ट्रीय_राजपूत_करणी_सेना



जय श्रीराम 🙏🌹

सदैव संघर्षरत रहे 💪💪💪🚩🚩

 #इजराईल ही एक ऐसा देश है जो  #भारत का  #अहसान हमेशा याद रखता है ।  #इजराइल ने डाक टिकट  #राठौड़ के सिम्बल-लोगो के साथ छा...
23/09/2021

#इजराईल ही एक ऐसा देश है जो #भारत का #अहसान हमेशा याद रखता है ।
#इजराइल ने डाक टिकट #राठौड़ के सिम्बल-लोगो के साथ छापा है और विश्व युद्ध के 100 साल होने पर भालाधारी जोधपुरी साफे में घुड़सवार ओर #माँ_शक्ति का स्वरूप #चील के रूप में Logo मे बना हुआ है । यह जोधपुर राठौड़ रियासत की रेजिमेन्ट हैं..! इस युद्ध को हैफा मे लडा गया था और मात्र २ घंटो मे राजस्थान के राजपूत योद्धाओ ने इसको आजाद करवा दिया था ।

इस युद्ध के मुख्य लीडर मेजर दलपत सिंह थे मेजर ठाकुर दलपत सिंह जोधपुर रियासत की अश्वसेना के सेनानायक, मिलिट्री क्रॉस विजेता, #हैफा ( #इजराइल) युद्ध के हीरो।

हैफा युद्ध का विश्व सैन्य इतिहास में विशिष्ट स्थान है। यह दुनिया के आखिरी कैवेलरी चार्ज में से एक के लिये जाना जाता है। इस युद्ध में जोधपुर की अश्वसेना, जो भालो और तलवारो से लैस थी ने मेजर दलपत सिंह के नेतृत्व में ओटोमन साम्राज्य की तोप, बंदूको और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस सैन्य मोर्चे पर हमला किया था और हार को जीत में बदल दिया था। इस युद्ध को ओटोमन साम्राज्य के खात्मे का श्रेय दिया जाता है। इजराइल की सरकार भी इजराइल के बनने का श्रेय हैफा युद्ध की जीत को देती है।

इस युद्ध के हीरो मेजर ठाकुर दलपत सिंह जाती से राजपूत थे इनके पिता कर्नल हरी सिंह भी जोधपुर रियासत की अश्वसेना में रहे

22/09/2021

लो जी बन गया 2 मिनट में इतिहास मात्र ₹10 के स्टीकर लगाने से😂😂😂😂
वाह रे इतिहास चोरों 🤣🤣🤣 चोर चोरी से जाए पर हेराफेरी से नहीं 🤣


#पंकज_ठाकुर

21/09/2021
21/09/2021

एक तीर से कितने शिकार किये महेश शर्मा जी ने ये तो स्वयं माननीय मुख्यमंत्री जी को भी नही पता, षडयंत्र किस स्तर तक किये जा रहे है ये बात योगी जी को पता चलनी चाहिए।

आपकी नजरे गौतमबुद्ध नगर लोकसभा में आने वाली तीन विधानसभाओं पर है उन्ही का शिकार करने के लिए सांसद महेश शर्मा जी ने बुद्धि का प्रयोग किया है।

सांसद महोदय महेश शर्मा जी ने ग्रेटर नोएडा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय संस्थान में गलत वंशावली पट्टिका लगवाकर इतिहास चोरों की योजना को मजबूती प्रदान की है

#महेश शर्मा इस विवाद के सूत्रधार है,ये क्षत्रिय वोट के दम पर ही चुन के आते है,इसके बावजूद यह प्रोग्राम इन्ही का रखवाया हुआ है क्यूंकि इन्हें लगता है कि क्षत्रिय भाजपा का गुलाम है और इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

महेश शर्मा देश की सबसे बड़ी क्षत्रिय बहुल #लोकसभा सीट से साढ़े 4 लाख क्षत्रिय वोट के दम पर ही सांसद बनते है.जब मौका मिलता है महेश शर्मा ठाकुरो का दोहन करने से नही चूकते है हमेशा अपमानित करने का प्रयास करते है,संस्कृति मंत्रालय की तरफ से बना हुआ ग्रेटर नोएडा में भवन में महेश शर्मा ने ही सबसे पहले उसमें गूजर लिखकर वंशावली को बदलने का जाति का बोर्ड लगाया था,उसके बाद जेवर एयरपोर्ट का नाम गूजर सम्राट मिहिर भोज लिखने के लिए ही इसी ने पत्र लिखा था।

इसके बावजूद इन्हें क्षत्रियों के विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ रहा क्यूंकि इनमे क्षत्रियों का डर नहीं है. सिर्फ भाजपा का विरोध हवा हवाई दिखता है. जड़ पर प्रहार करो तो ज्यादा असर होगा।

MYogiAdityanath BJP Uttar Pradesh Dr. Mahesh Sharma Tejpal Nagar



#श्री_राष्ट्रीय_राजपूत_करणी_सेना

ा_पार
#राकेश_सिंह_रघुवंशी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी जी से अपिल है कि वोट की गंदी राजनीति के चक्कर मे आकर क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज ज...
18/09/2021

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी जी से अपिल है कि वोट की गंदी राजनीति के चक्कर मे आकर क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज जी को गुर्जर बनाने में ना तुले ।।
ये हम लोगो के पूर्वजो का अपमान है योगी जी से कहना चाहता हूँ कि 20% क्षत्रियो का वोट भी बहुत महत्वपूर्ण है ।
इसलिए ऐसे कृत्य को आप होने से रोकिए । नही तो पूरे देश का क्षत्रिय आंदोलन के लिए बाध्य होगा ।।
#क्षत्रिय_सम्राट_मिहिर_भोज ।।।

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