15/09/2026
मुरैना में दिखा खाकी का संवेदनशील चेहरा: बुजुर्ग की पीड़ा सुन भावुक हुए SP, बराबर की कुर्सी पर बैठाकर पिलाया पानी
मुरैना। पुलिस की वर्दी को अक्सर सख्ती और कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन मुरैना में पुलिस अधीक्षक का संवेदनशील अंदाज भी सामने आया। अपनी ही जमीन पर दबंगों द्वारा खेती नहीं करने देने की शिकायत लेकर पहुंचे 75 वर्षीय बसंत सिंह सिकरवार को एसपी ने सम्मानपूर्वक अपने बराबर की कुर्सी पर बैठाया और पानी पिलाकर उनकी पूरी बात सुनी। बुजुर्ग ने अपनी जमीन पर वर्ष 2023 से खेती नहीं कर पाने की समस्या बताई। एसपी ने मामले को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें जमीन जुतवाने के लिए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
2023 से नहीं जोता गया खेत
कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जौरा के पत्र के अनुसार, ग्राम गलेथा, तहसील जौरा निवासी बसंत सिंह सिकरवार का भूमि सर्वे क्रमांक 2938/2, 3387, 3388, 3389 और 4452 में आधा हिस्सा है। शिकायत के मुताबिक, उनका खेत वर्ष 2023 से नहीं जोता गया है। बुजुर्ग का आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोग उन्हें जमीन पर खेती करने से रोक रहे हैं।
पुराने विवाद का हवाला देकर रोकने का आरोप
शिकायत में इन्द्रवीर, हरेन्द्र, लड्डू, राहुल और धर्मेन्द्र, निवासी रंछोरपुरा पर जमीन जोतने से रोकने के आरोप लगाए गए हैं। बुजुर्ग के मुताबिक, दूसरे पक्ष द्वारा पुराने हत्या के मामले और गिरफ्तारी नहीं होने का हवाला देते हुए उन्हें अपनी जमीन पर जाने और खेती करने से रोका जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित प्रशासनिक और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पर्याप्त पुलिस बल के साथ जमीन जुतवाने के निर्देश
राजस्व अधिकारी ने थाना प्रभारी बागचीनी को निर्देश दिए हैं कि पर्याप्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को समझाइश दी जाए। साथ ही नियमानुसार शिकायतकर्ता की भूमि जुतवाकर फसल की बोहनी कराने के निर्देश दिए गए हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संबंधित लोगों के खिलाफ बाउंड ओवर की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सम्मान से भावुक हुए बुजुर्ग
एसपी द्वारा सम्मानपूर्वक अपनी बात सुने जाने और पानी पिलाने से बुजुर्ग भावुक नजर आए। कार्यालय से बाहर निकलने के बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक की संवेदनशीलता और कार्यशैली की तारीफ की। मामले में अब प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के बाद यह देखना होगा कि बुजुर्ग को उनकी जमीन पर खेती करने में वास्तविक रूप से कब मदद मिलती है।