Muniri welfare education association - regd

Muniri welfare education association - regd मुनीरी समाज
आदाब और स्वागत है मुनीरी समाज के सभी सदस्यों का
अपने मुनीरी समाज को एकजुट और तरक्की की राह पर लेकर चलें।
धन्यवाद!

Eid milad un nabi ki MUBARAKBAAD
05/09/2025

Eid milad un nabi ki MUBARAKBAAD

13/07/2025

Ek ped samaj ke naam

22/06/2025

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبرکاته

खुशखबरी तमाम मुनीरी बिरादरी के लिए...

आप सभी को ये जानकर बहुत खुशी होगी की "राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी" की जानिब से एक सामूहिक निकाह प्रोग्राम का आयोजन किया जायेगा । यह प्रोग्राम उन गरीब बेटियों की शादी के लिए रखा जा रहा है जिनके घरवाले माली कमजोरी की वजह से निकाह करने मे असमर्थ है

आप तमाम लोग इस एलान को अपने-अपने हल्के में पहुँचाएँ गाँव ,कस्बा शहर मे पहुचाये और जो भी ऐसे जरूरतमंद हों, वो कमेटी से जल्द राबिता करें ताकि उनका नाम इस प्रोग्राम में शामिल किया जा सके।

*याद रखें निकाह सुन्नत है और सुन्नत को आसान बनाना उम्मत की जिम्मेदारी है*

अल्लाह तआला इस काम को क़ुबूल फरमाए और इसे हमारे लिए दुनिया व आखिरत की भलाई का ज़रिया बनाए।
आमीन या रब्बल आलमीन
*इस नेक और बरकतों वाले काम की तारीख और वक्त का ऐलान बहुत जल्द कमेटी की जिम्मेदार मीटिंग के बाद किया जाएगा।* इंशाल्लाह

आप सभी मुनीरी समाज के लोगों से हमें पूरी उम्मीद है आप जरूरतमंद लोगों की हमें जानकारी दें और shawab के हकदार बने...
किसी की जानकारी देकर बताना भी shawab ka काम है
आपके शहर में कस्बे गांव में जो भी जरूरतमंद लोग हैं उनकी जानकारी कमेटी के किसी भी सदस्य को दे सकते हैं आप सब मुनीरी समाज के लोगों का सहयोग जरूरी है

समस्त मुनीरी समाज व "राष्ट्रीय मुनीरी कमैटी"

सिराज मुनीरी: मीडिया प्रभारी वह कोषाध्यक्ष "राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी"

01/03/2025

अल्लाह तआला का बेपनाह करम है कि हमें एक बार फिर बरकतों और रहमतों से भरे इस पाक महीने का तोहफ़ा नसीब हुआ। दुआ है कि यह महीना हमारे लिए मग़फ़िरत, रहमत और बरकतों का ज़रिया बने।दुआ है कि यह मुकद्दस महीना हमारे गुनाहों की माफ़ी, दिलों की पाकीज़गी और ज़िंदगी में बरकतों का सबब बने। अल्लाह हम सबको सही मायनों में रोज़ा रखने, नमाज़ पढ़ने और नेकियों में आगे बढ़ने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन!

*आपको और आपके परिवार को रमज़ान की दिली मुबारकबाद!* ✨

*राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी*

प्रिय साथियों,राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की मेहनत और नेक इरादों से तैयार यह खास वीडियो अब आपके सामने है। इसमें हमारी बिरादरी...
21/12/2024

प्रिय साथियों,

राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की मेहनत और नेक इरादों से तैयार यह खास वीडियो अब आपके सामने है। इसमें हमारी बिरादरी की एकता, सहयोग, और छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव की ताकत को दिखाया गया है।

इस वीडियो में आप जानेंगे:

1. कमेटी के कार्यों और मकसदों के बारे में
2. हमारी कोशिशों से समाज में हुए सकारात्मक बदलाव
3. जरूरतमंदों की मदद और एकजुटता का संदेश
वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें:

https://youtu.be/sf56XYfBudU?si=L3fC4eYXBFAMOvRD

कृपया इसे जरूर देखें, समझें, और अपने दोस्तों व परिवार के साथ साझा करें ताकि हमारी बिरादरी का हर व्यक्ति इस प्रेरणा का हिस्सा बन सके।

आपकी एकता, हमारी ताकत।
राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी –
मदद का वादा, भविष्य की राह।"

राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी का यह प्रेरणादायक वीडियो हमारी बिरादरी की एकता, सहयोग, और नेक इरादों की ताकत को दर्शाता है।...

राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की विशेष सूचनाअस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु,हमें यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि र...
16/12/2024

राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की विशेष सूचना

अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहु,

हमें यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी से संबंधित एक विशेष वीडियो तैयार की गई है। इस वीडियो में कमेटी के उद्देश्यों, कार्यों और पूरे देश के समाज को एक साथ लाने के प्रयासों को दर्शाया गया है।

यह वीडियो सबसे पहले सेक्रेटरी जनाब मोहम्मद शानू साहब द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब मेहरबान अली मुनीरी साहब को फाइनल करने के लिए प्रस्तुत की गई है। सभी आवश्यक सुधारों को पूरा करने के बाद यह वीडियो 21 दिसंबर को हमारे राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी ग्रुप में लिंक के माध्यम से साझा की जाएगी।

हम आप सभी से अनुरोध करते हैं कि इस विशेष वीडियो को ज़रूर देखें और कमेटी के कार्यों और उपलब्धियों को समझें। यह हमारी कमेटी के उद्देश्य और एकता के प्रयासों को और भी मजबूती प्रदान करेगा।

आपकी भागीदारी हमारे लिए महत्वपूर्ण है।

धन्यवाद,
राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी

*राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की अलीगंज यूनिट गठन के लिए महत्वपूर्ण मीटिंग आयोजित*दिनांक [29/09/2024],को इस्लामीया मकतब विद्या...
30/09/2024

*राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की अलीगंज यूनिट गठन के लिए महत्वपूर्ण मीटिंग आयोजित*

दिनांक [29/09/2024],को इस्लामीया मकतब विद्यालय, अलीगंज, जिला एटा में राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी की एक अहम बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में जनाब मुन्ने खां मुनीरी साहब की सरपरस्ती में अलीगंज यूनिट के गठन के लिए एक टीम का गठन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य जल्द से जल्द अलीगंज में मुनीरी समाज की एक कमेटी का निर्माण करना है। इस कमेटी का प्राथमिक उद्देश्य बिरादरी में बिखराव को समाप्त कर, एकजुटता को बढ़ावा देना है।

इस मौके पर *राष्ट्रीय अध्यक्ष मेहरबान मुनीरी* साहब ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में एकता की अहमियत पर जोर दिया और कहा कि हमें एकजुट होकर समाज की समस्याओं का समाधान करना होगा। *राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद शानू मुनीरी साहब* ने भी अपने वक्तव्य में कहा, "समाज को केवल मोहब्बत और भाईचारे से ही जोड़ा जा सकता है। आओ सुलह कराये पर जोर देते हुए कहा "हमें आपसी प्यार और समझ से ही अपने मसले हल करने चाहिए,तथा अपने समाज के मसलो को मुनीरी समाज के लोगों को ही सुलझाना चाहिए |"

इसके अलावा, *सिराज मुनीरी* ने बताया कि राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी समाज के हर वर्ग के साथ खड़ी है और *खालिद हुसैन मुनीरी* ने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि समाज का विकास बिना शिक्षा के संभव नहीं है। *सलमान मुनीरी* ने अलीगंज के लोगों से अपील की कि वह जल्द से जल्द एक प्रभावी समाज की कमेटी का गठन करें ताकि अलीगंज में सामाजिक एकजुटता को और मजबूत किया जा सके।

इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए, जो आने वाले समय में अलीगंज और आसपास के क्षेत्रों में समाज की उन्नति में सहायक सिद्ध होंगे। इस मौके पर जनाब दिलशाद मुनीरी (चुनाव अधिकारी राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी),याकूब मुनीरी,इकबाल मुनीरी,सलीम मुनीरी आदि लोग उपस्थित रहें

ग्रुप के साथ घूमने का अनुभव बेहद ख़ास और यादगार होता है। जब हम दोस्तों या परिवार के साथ सफ़र पर निकलते हैं, तो हर पल का ...
21/09/2024

ग्रुप के साथ घूमने का अनुभव बेहद ख़ास और यादगार होता है। जब हम दोस्तों या परिवार के साथ सफ़र पर निकलते हैं, तो हर पल का मज़ा दोगुना हो जाता है। रास्ते में हँसी-मज़ाक, साथ खाना-पीना, और अलग-अलग जगहों को मिलकर देखना दिल को सुकून देता है। ग्रुप में आपस में सहयोग होता है, जिससे सफ़र आसान और दिलचस्प बन जाता है। सफर के दौरान होने वाले नाज़ुक और ख़ुशगवार लम्हें हमेशा याद रहते हैं। एक साथ मिलकर घूमने से न सिर्फ़ यात्रा का लुत्फ़ बढ़ता है, बल्कि रिश्ते भी मजबूत होते हैं।

17/08/2024

*आज की कहानी "रतलाम शहर" से*
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[[ *कहानी* *(💖पापा की परी💖)* ]]
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जिसको पढ़कर सभी ने मुझसे एक ही *सवाल* पूछा कि,,

कहानी के अंत में *जो कुछ भी* हुआ,,

*क्या वो वाकई सच था?*

वो सच जानने के लिए....

*पढ़िए उस "परी" की कहानी* ......

दरअसल यह दास्तान शुरू होती है *13 साल की* एक बच्ची के साथ हुई....

*एक दर्दभरी घटना के साथ* 👇🏻👇🏻👇🏻

*गहरी रात का वक्त था,* मासूम बच्ची की नींद अचानक से खुलती है,, नींद खुलने का सबब उसके कान का तेज दर्द था, *दर्द नाकाबिल -ए- बर्दाश्त* की सारी हदें पार कर गया, वो तेरह साल की मासूम बच्ची 🙇‍♀️अपने कान के तेज दर्द को अपनी मां से बयान करती है,,
मां किसी *बड़ी बीमारी के खतरे से अनजान* घरेलू तेल को गर्म करके बच्ची के कान में दो चार बूंद डाल कर रूई लगा कर जैसे तैसे बच्ची को सुला देती है, फौरी तौर पर *कुछ वक्त के लिए* बच्ची को नींद आ जाती है, या यूं कहे की थोड़ा आराम हो जाता है,, लेकिन अलसुबह उसी कान के तेज दर्द के साथ *बच्ची तड़प कर* फिर उठ जाती है,, मां के इस दिलासे, की जैसे ही दिन शुरू होगा जल्द से जल्द वो उसे डाक्टर को दिखा आएगी,, इस दिलासे से बच्ची अपने दर्द को *बर्दाश्त करने की नाकाम सी* कोशिश के साथ दिन निकल आने के इंतजार में लग जाती है,,

और उस बच्ची के आखों के सामने कल स्कूल में हुई घटना के सीन आने लगते है,, कैसे *मैडम ने* 👩🏻‍🏫 सिर्फ डायग्राम न बनाकर लाने की वजह से उसके कान के नीचे *थप्पड़ों* की झड़ी लगा दी थी,, और उसी मार का सिला कान के इस तेज दर्द के साथ उसे *भुगतना पढ़ रहा था,* ,

सुबह तय प्रोग्राम के मुताबिक मां उस बच्ची को *नजदीकी डाक्टर* के पास ले जाती है,, बच्ची को चेकअप करने के बाद डॉक्टर मां को सलाह देते है की इस बच्ची को किसी बड़े *स्पेशलिस्ट डाक्टर* को दिखाया जाए,,
डाक्टर की सलाह के मुताबिक बड़े *स्पेशलिस्ट डाक्टर* से मशवरा किया जाता है,,
और स्पेशलिस्ट डॉक्टर जल्द से जल्द बच्ची के कान के *ऑपरेशन की सलाह* देते है,,

डॉक्टर कि अचानक से ऑपरेशन की सलाह से *मां सकते में आ जाती है,* और उनकी फिक्र वाजिब भी थी, क्योंकि उन दिनों बच्ची के पिता रोजगार के चलते शहर से बाहर थे,,

*बहरहाल वक्त अपनी रफ्तार से* बढ़ता है, और वक्त के साथ उस बच्ची के कान का *ऑपरेशन* भी हो जाता है,, लेकिन इस मासूम को अपनी पढ़ाई से तक *हाथ धोना पड़ जाता* है,, नतीजतन उसे अपनी 9th की परीक्षा में हार का सामना करना पढ़ता है,,

लेकिन वक्त गुजरने के साथ जब बीमारी के *हालात थोड़े ठीक* होते है,
तो वो बच्ची तय करती है की वो दसवीं की प्रायवेट एग्जाम देगी, और वो *दसवीं* को पास कर लेती है,,

*लेकिन इस बीमारी की* जद्दोजहद में उम्र उसे इस मोड़ पे ले आती है, जिस उम्र में हर बेटी के मां बाप अपनी लाडली को *ससुराल* विदा कर देते है,, और उम्र के इस पढ़ाव पर इस बच्ची के *साथ भी यही हुआ* ,, बेशक वो आगे पढ़ लिख कर करना तो बहुत कुछ चाहती है,,

लेकिन समाज के इस बंधन से वो अपने आप को मुक्त नही कर पाती है,, और *बाबुल* के घर से विदा होकर वो अपने *ससुराल* पहुंच जाती है,,

बेशक *वक्त और हालत से* इस बच्ची ने समझौता जरूर किया लेकिन वो पढ़ाई का जुनून ये अब तक अपने अंदर से खत्म नहीं कर पाई थी,,

*लेकिन हाय री किस्मत* 🤦🏻‍♂️,,

इधर वो आगे पढ़ने की तैयारी करती है और उधर उसकी बीमारी जिसका एक बार ऑपरेशन हो चुका था,, वो फिर से अपने पांव पसार लेती है, और फिर इसी बीमारी की जद्दोजहद में एक और ऑपरेशन की *नौबत आन पढ़ती* है,,

लेकिन कहते है ना कि वक्त का पहिया कभी रुकता नही,, और इसी वक्त की रफ्तार ने इस *पापा की परी* को अपनी *12th* की पढ़ाई के जुनून को पूरा करने के साथ साथ *मां* बनने की कामयाबी भी हासिल कर ली,, जी हां हमारी कहानी की *पापा की परी* अब एक बेटे की *मां* 👩‍🍼 बन चुकी है

एक बेटे की मां बनी इस *पापा की परी* की असली जद्दोजहद तो अब आपके सामने आएगी,,

आजमाइश का वो *खतरनाक दौर* अब शुरू होगा,,

*कौन नही चाहता है* की उसके बच्चों को बेहतर नही बल्कि *बेहतरीन तालीम* मिले,, यह मां भी यही चाहती है की उसके बेटे को अच्छे से अच्छे स्कूल में एक अच्छी तालीम मिले,, और इसके लिए उसने अपने *बेटे का एक बड़े स्कूल में* एडमिशन करवा दिया,,

*लेकिन एक दिन एक वाकिया पेश आता है,,*

सुबह जब यह मां अपने बेटे को स्कूल जाने के लिए *नींद से जगाने* लगी,, तो मासूम से बेटे ने स्कूल जाने से साफ मना कर दिया,, जब वजह पूछी तो बेटे ने कहा अम्मी, *टीचर स्कूल में मुझे रोज* खड़ा कर देती है और कहती है, आपकी *दो महीने की* स्कूल फीस बाकी है,, तो मां कहती है में आपके स्कूल की फीस जमा कर दूंगी, अब तुम स्कूल के लिए तैयार हो जाओ,,
बेटा स्कूल जाने के लिए राजी तो हो जाता है,,
लेकिन खाने के टिफिन में आज फिर *आलू की सब्जी देखकर* चिड़ जाता है,, अम्मी आप रोज मेरे टिफिन में आलू की सब्जी रख देती है,, *मेरे फ्रेंड मुझे चिढ़ाते है,* , मुझे रोज रोज आलू नही खाना है,, आप कल मेरे लिए *भिंडी* की सब्जी बनाना, तो मां बेटे को समझा बुझा कर स्कूल भेज देती हैं,
**और मां जब बाजार से* * रोजमर्रा का सामान लेने जाती है, तो अचानक , बेटे की भिंडी वाली बात याद आ जाती है,,

सब्जी *बाजार में जैसे ही* बिन मौसम वाली भिंडी का भाव *80₹* किलो सुनकर, ऐसा लगता है, जैसे करंट लगा हो,,

*हाय री महंगाई* .....🤦🏻‍♂️

मां के दिल से आवाज आती है,, क्या *मेरा बेटा भिंडी* जैसी मामूली सब्जी के लिए भी तरसेगा?

मां का दिल बुरी तरह पसीज जाता हैं,,

*लेकिन करे तो क्या करें,* ,

घर के खर्चे और इसलिए बढ़ गए कि *कुदरत ने उसकी गोद में* एक प्यारी सी बेटी 🧖🏻‍♀️ भेज दी,, *तंगदस्ती के चलते* दो बच्चों की परवरिश करना, और बेटे 🧑🏻‍🎓को अच्छे स्कूल में तालीम दिलाना, उसे यह सब मुमकिन होता नजर नहीं आ रहा था,,

*गोद में सवा साल की मासूम* सी बेटी 👩‍🍼और घर की हालत ऐसी की तीज त्यौहार तो दूर आज रसोई में खाना बन गया तो कल के *राशन की फिक्र* सता रही है,, शौहर की कमाई इतनी नही की बच्चे के कॉन्वेंट स्कूल की फीस भर सके,,

*नौबत यह आ गई कि,* बच्चे का दाखिला सरकारी स्कूल में या किसी *खैराती स्कूल* में करा दिया जाए,,

ऐसे हालात में कोई मां अपनी पढ़ाई का तो सोच भी नही सकती जब तक कि वो खुद कमाई का कोई और साधन तलाश न कर ले,,

लेकिन जब इस मां को अपने बच्चो 👫का भविष्य अंधेरे में जाता नजर आया तो,,
इस मां ने अपने *मासूम से* छोटे छोटे बच्चो 👫के साथ वो कदम उठाने से भी परहेज नहीं किया,,
जिसे सोचकर किसी भी मां का *दिल कांप उठता है,* , कोई भी मां किसी भी सूरत में अपने बच्चो के साथ यह कदम कभी नहीं उठा सकती है,,

वो *कौन सा कदम* उठाया इस मां ने.....

*क्या उसके दिल में मां की ममता खत्म हो गई* ?

लेकिन जिसके दिल में कुछ कर गुजरने की ज़िद हो वो अक्सर *ऐसे कदम उठाने से* भी नही परहेज नहीं करते है,,

*और इस मां ने भी यही किया,* ,

जब शौहर 🚶🏻 अपने काम पर निकल चुके, बेटे को कान्वेंट स्कूल बस से स्कूल 🧑🏻‍🏫 रवाना कर दिया,, अब घर में *सिर्फ बेटी के सिवा कोई न* था,

तो यह मां उस सवा साल की बेटी को घर में अंदर अकेला छोड़ कर ,,
बाहर से ताला लगा कर ,,
निकल पढ़ती है एक मामूली से स्कूल 👩🏻‍🏫 में मात्र 450₹ की मामूली सी नौकरी के लिए,,

*जी हां आपने सही पढ़ा है,*

सवा साल की मासूम बच्ची को घर में अकेला छोड़कर, और बाहर से ताला लगा कर मां स्कूल में नौकरी करने चली गई,,

और ये कोई एक दिन का काम नही, बल्कि रोज यह मां अपनी बच्ची को इसी तरह घर में अकेला छोड़ जाती, ताकि कुछ रुपयों 💵 की मदद हो जाए और इस मां का बेटे को अच्छे स्कूल 👨‍🏫में पढ़ने को मिल जाए,,

*लेकिन फिर एक दिन अचानक* एक घटना घट जाती हैं,,

*दोपहर का वक्त था,* अक्सर सुनसान सी रहने वाली इस कॉलोनी में रोजमर्रा की जिंदगी में इक्का दुक्का लोग ही आते जाते है,, लेकिन आज रोजमर्रा की तरह इक्का दुक्का लोग नही आ जा रहे थे,,

बल्कि एक मकान की खुली हुई खिड़की के सामने बहुत सारे लोगो कि भीड़ जमा थी,,

*भीड़ इसलिए जमा थी* ,,

क्योंकि इस मकान की खिड़की में एक *डेढ़ साल की मासूम सी बच्ची* अपने दोनों पैर बाहर निकाले जारों कतार रो रही थी,, और मानो वो यह कोशिश कर रही थी,,
की जैसे भी हो वो उस कैद से तुरंत आजाद हो जाए,,

भीड़ में हर कोई परेशान इसलिए भी था कि,, बच्ची बुरी तरह से बुखार में तप रही थी,,

लेकिन भीड़ उस मासूम सी बच्ची को महज देख भर सकती थी,, भीड़ का हर व्यक्ति उस बच्ची को बाहर निकालने के लिए कुछ भी कोशिश इसलिए नही कर सकता था,,
क्योंकि मकान के मेन गेट पर बाहर से ताला लगा था,,

फिर *पड़ोस में रहने वाले* एक शख्स ने इस बच्ची की मां को फोन किया,,

*मां फौरन दौड़ी चली* आई,, बच्ची को सीने से लगाकर तुरंत ही डाक्टर को दिखाया,,

आज इस मां को अपनी स्कूल की 450 ₹ की नौकरी बड़े पहाड़ उठाने जैसी लग रही थी,, एक बार के लिए तो दिल में आया की छोड़ दे इस नौकरी को, लेकिन फिर बेटे की स्कूल फीस और घर में *तंगहाली की हालत* को देखते हुए,, इस मां ने इस नौकरी को करने में ही भलाई समझी,,

क्योंकि इस मां को यह 450 ₹ महीने की पगार, या यूं कहे यह स्कूल की छोटी सी नौकरी,,
अपने बच्चे की अच्छी तालीम के लिए अंधेरे में,,
किसी " *अलादीन के चिराग़"* जैसी ही लग रही थी,,

इस नौकरी से मिले पैसों 💴 से कुछ और नहीं तो, कम से कम वो अपने बेटे 🧑🏻‍💼के स्कूल की फीस तो जमा कर ही सकती है,,

और इस मां ने अपने बेटे के मुस्तकबिल 🥇को बचाने और अच्छा बनाने के लिए इस नौकरी के चिराग़ को लगातार अगले *तीन सालों तक जलाए रखा,* और इन्ही हालातों के बाउजुद खुद ने अपनी तालीम पूरी की, ग्रेजुएशन पूरा किया,, और बाद में पोस्ट ग्रेजुएशन भी किया,,

*अजीबो गरीब पशोपेश का मंजर* है, में इसे मजबूरी कहूं या हालातो से समझौता, कुछ समझ नहीं आता, लेकिन,,
इस मां के इन हालातो को मेरी कलम ने अपनी *शायरी* में कुछ यूं बयां किया,,



💖 _*पेश -ए- लफ्ज़*_ 💖

•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•°•

*बेशक तू मेरे दिल को जलाता है, ऐ चिराग़,*
*लेकिन तुझसे घर में इल्म की रोशनी तो है,,*

*जला कर स्याह भी मेरे दिल को गर तू कर दे,*
*देखना में तेरी रोशनी को आफताब कर दूंगी,*

°•°*•°•*°•°•*°•°*•°•°*•°•°*•°•°•°•°•*°•°•*

इस कहानी से *समाज में मां* , बहनों, और बेटियो को यह सबक लेना चाहिए, कि चाहे तुम भर पेट न खा सको, चाहे तुम त्यौहार या खुशी के मौके पर अच्छा न पहन सको, या चाहे तुम्हे अपनी आरज़ू का गला ही क्यों न घोटना पड़े,, लेकिन तुम अपनी और अपने बच्चो की तालीम से हरगिज़ समझौता न करना,, *हरगिज़ ना करना,*

⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫

*क्योंकि जो इल्म की रोशनी के लिए,*
*जो अपने हाथों पर चिराग़ उठा लेता हैं,*

*खुदा एक दिन खुद ही उसके हाथों पर*
*उठा कर आसमां से आफताब सजा देता है,*

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

और इस *पापा की परी* की कहानी में आगे *कुछ ऐसा ही होता है,* , जिसे पढ़कर आप भी कुछ यही कहेंगे, जो *मेरी कलम* अपनी शायरी में कुछ यूं बयां करती है,,

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मंजिले मिल ही जाया करती है अक्सर उनको
जो अपने रास्तों में कांटो की परवाह नहीं करते
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*एक दिन की बात है,* , आज मां अपनी तबियत की नासाजी को लेकर स्कूल नही गई,,
दोपहर का वक्त था,, यह मां अपने घर के मुफलिसी भरे हालातो पर फिक्रमंद होकर यह सोच रही थी, की आगे उसके बच्चों के मुस्तकबिल {भविष्य} का क्या होगा,, क्या वो इसी तरह मामूली नौकरी करती रहेगी, और इसी तरह उसे मर मर कर जीना पड़ेगा,, यह सब कुछ सोच ही रही थी कि *अचानक से* दरवाजे पर दस्तक हुई,, दरवाजा खोला तो सामने *पोस्टमैन {डाकिया}* खड़ा था,, उसने लिफाफा पर लिखा नाम पढ़ते हुए बोला,,
*क्या यह आप ही है?*
तो इस मां ने जवाब दिया जी में ही हूं,, बताइए क्या बात है,,
पोस्टमैन ने जवाब दिया यह डाक आपके लिए है,,
इस बेबस मां ने वह लिफाफा लिया और दरवाजा बंद कर अंदर आ गई,,

जब लिफाफा खोल कर देखा और पढ़ा तो इस मां की *आंखे फटी की फटी* रह गई,, मानो उसे ऐसा लग रहा था, जैसे *उसके पैरो के नीचे से जमीन नही* है,, और वो अब हवा से बाते कर उड़ रही है,,

दरअसल उसे किसी भी तरह इस *लिफाफे की सच्चाई* सच नही लग रही थी,, कुछ देर बाद उसके आखों में आंसू के साथ साथ बीते दिनों हुई एक *घटना का सीन* नजर आने लगता है,,
*वह सीन कुछ यह था.* ...👇🏻👇🏻

वो बेतहाशा दौड़े जा रही है, बस दौड़े जा रही हैं,, वो ऐसे दौड़ रही है, जैसे उसे हर हाल में वहां पहुंचना ही है, लेकिन पैर अब जवाब दे चुके थे, सांसे थम रही थी,, ऐसा लग रहा थे जैसे अगले ही पल वो गिर पड़ेगी और उसकी जान निकल जाएगी,, लेकिन उसके दिल में अचानक से ख्याल आया की उसे हर हाल में रुकना नही है,, अगर वो रुक गई तो समझो जिंदगी रुक जाएगी, उसकी आंखों के सामने उसके मासूम बच्चो का चेहरा आने लगता है,, उसे लगने लगता हैं कि अगर आज वो रुक गई तो उसके बच्चों का भविष्य खत्म हो जाएगा,, फिर वो सारी ताकत को समेट कर
दौड़ती चली जाती हैं,,

यह सीन *वडोदरा गुजरात* के एक ग्राउंड का है,, दरअसल यहां रेलवे की *भर्ती परीक्षा* का फिजिकल टेस्ट चल रहा था,, और यह मां इस फिजिकल टेस्ट में *सफल* हो जाती है,,
और पोस्टमैन जो लिफाफा अभी देकर गया था, उसमें *रेलवे* का *ज्वाइनिंग लेटर* था,,

जी हां यह मां अब *भारतीय रेलवे* की कर्मचारी बन चुकी है,,.........जो वर्तमान में *रतलाम मंडल* में टेलीकॉम विंग में कार्यरत है,,

आप जानना चाहते है ये कहानी किस की है.......?
ये कहानी है है रतलाम की बेटी जिनका नाम *परवीन बी* है। इन्होंने अपने प्रशिक्षण की एग्जाम में साबरमती ट्रेनिग सेंटर गुजरात से टॉप भी किया है.....
आपको ये बताते हुए भी हमें फक्र है की वो राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी में *राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष* भी हैं
*और आज 17 अगस्त को परवीन जी का बर्थ डे भी है,, तो हम इनको बर्थ डे की बहुत बहुत मुबारक बाद भी देते है* ,,

*इस कहानी को तालीम के नजरिए से सभी मां बहनों बेटियों को शेयर करना बहुत जरुरी है,, इसलिए प्लीज सभी वॉट्स अप ग्रुपों में शेयर जरूर करें,* ,

इस कहानी में इस मां के लिए मेरी कलम का आखरी शेर.....

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कामयाबी सर झुका कर चूमती है कदम उनके
जो मुसीबतों के आगे सर झुकाया नही करते
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✍️ *लेखक* ✍️
❤‍🩹 *एम. यूसुफ पठान* ❤‍🩹
*भानपुरा जिला मंदसौर म. प्र.*

पढ़ने के लिए
धन्यवाद.........🙏🏻💐

15/08/2024

मुनीरी समाज के प्यारे साथियों,

यौम-ए-आज़ादी के इस मुबारक मौके पर, आइए हम सब मिलकर अपने मुल्क की खुशहाली और तरक़्क़ी के लिए दुआ करें। 15 अगस्त सिर्फ़ एक तारीख़ नहीं, बल्कि हमारे बुजुर्गों की कुर्बानियों की याद है, जिन्होंने हमारे लिए अपनी जानो को कुर्बान करके हमें आज़ाद फिज़ाओं में सांस लेने का मौका दिया।
हमें इस आजादी को बनाये रखने और मुल्क को मजबूत और ख़ुशहाल बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करनी है। हमें अपने समाज में भी इत्तेहाद और मुहब्बत को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि हमारा मुनीरी समाज भी मुल्क की तरक़्क़ी के सफर में एक मिसाल कायम कर सके।

आइए, इस आज़ादी के दिन को हम एकजुट होकर मनाएं और यह अहद करें कि हम अपने देश की हिफाज़त, इज्ज़त, और तरक़्क़ी में अपना अहम किरदार अदा करेंगे।

वक़्त की पुकार है कि हम सब एकजुट होकर आगे बढ़ें और अपने मुल्क की शान और वकार को बुलंद करें।

जश्न-ए-आज़ादी मुबारक हो!

राष्ट्रीय मुनीरी कमेटी

Address

2186/2 Avas Vikas Base Road
Hapur
245101

Opening Hours

Monday 9am - 5pm
Tuesday 9am - 5pm
Wednesday 9am - 5pm
Thursday 9am - 5pm
Friday 9am - 5pm
Saturday 9am - 5pm
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