छठवीं फैल

छठवीं फैल Alto जैसी जिन्दगी
audi जैसे ख्वाब
टेम्पो जैसे दोस्त और
JCB जैसे रिश्तेदार
😁✍️✍️✍️

31/08/2026

मेरी उजड़ी हुई बस्ती को यूंही सुनसान रहने दो..!!
खुशियाँ रास नही आती मुझे परेशान रहने दो..!!

11/07/2026

मुझे रोना नहीं आवाज़ भी भारी नहीं करनी
मोहब्बत की कहानी में अदाकारी नहीं करनी

हवा के ख़ौफ़ से लिपटा हुआ हूँ ख़ुश्क टहनी से
कहीं जाना नहीं जाने की तय्यारी नहीं करनी

तहम्मुल ऐ मोहब्बत हिज्र पथरीला इलाक़ा है
तुझे इस रास्ते पर तेज़-रफ़्तारी नहीं करनी

हमारा दिल ज़रा उकता गया था घर में रह रह कर
यूँही बाज़ार आए हैं ख़रीदारी नहीं करनी

ग़ज़ल को कम-निगाहों की पहुँच से दूर रखता हूँ
मुझे बंजर दिमाग़ों में शजर-कारी नहीं करनी

वसिय्यत की थी मुझ को क़ैस ने सहरा के बारे में
ये मेरा घर है इस की चार-दीवारी नहीं करनी

#आवाज #मोहब्बत #कहानी

10/06/2026

आप मय-ख़ाने को घर अपना बनाए हुए हैं
हम इधर ओखली में सर को लगाए हुए हैं//1

मुस्त'इद रहते हैं तलवार वो हाथों में लिए
और हम करते भी क्या सर को झुकाए हुए हैं//2

कोई मज़लूम की फ़रियाद-रसी हो कैसे
अपने दरबार पे वो ताले सजाए हुए हैं//3

वो हुकूमत का अलम कैसे उठा पाएंगे
पालकी एक सुहानी जो उठाए हुए हैं//4

राख़ कर दे न कहीं अम्न की दुनिया सारी
आहें मज़लूम जो सीने में दबाए हुए हैं//5

__

26/05/2026

इंसान की शिनाख्त फ़क़त ख़ानदाँ नहीं
हर फूल का वजूद यहाँ बाग़बाँ नहीं

मतलब निकालने को मिला हाँ में हाँ नहीं
अव्वल मैं जानता हूँ ये तेरी ज़ुबाँ नहीं

अपनी अना के सामने हैरत-ज़दा हूँ मैं
कितना ग़लत हूँ फिर भी ग़लत फ़हमियाँ नहीं

जब रहगुज़र ही खत्म तो मंज़िल क्या करूँ
मेरी उड़ान तक कोई क्या आसमाँ नहीं

सजदा भी क्यों करूँ मैं ख़ुदा तेरे सामने
मुझ पर यहाँ तू इतना कोई मेहरबाँ नहीं

रसिया हैं हम ग़ज़ल के तबीयत समझ ज़रा
ग़ज़लें सुना यहाँ पे कोई दास्ताँ नहीं

अय ज़िंदगी घुटन से कहीं मर न जाएँ हम
दीवार और छत तो है पर खिड़कियाँ नहीं
ا

निकला अना-परस्त भी "" आपका
इसके मुकाबले में कोई नौजवाँ नहीं

11/03/2026

कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया
हर काम में हमेशा कोई काम रह गया

छोटी थी उम्र और फ़साना तवील था
आगाज़ ही लिखा गया अंजाम रह गया

उठ उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए
दहशत-गरों के हाथ में इस्लाम रह गया

उस का कुसूर ये था बहुत सोचता था वो
वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया

अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स
गिनती के चार हॉर्फो का जो नाम रह गया

हम ने हँस हँस के तेरी बज़्म में ऐ ज़िंदगीकितनी आहों को छुपाया है, तुझे क्या मालूम ❤️‍🩹__1
24/02/2026

हम ने हँस हँस के तेरी बज़्म में ऐ ज़िंदगी

कितनी आहों को छुपाया है, तुझे क्या मालूम ❤️‍🩹
__1

02/01/2026

2026

15/11/2025

जान लेने को ये तैयार हमारी निकले।
शाहज़ादे भी हक़ीक़त में #भिखारी निकले

एक सदी बीत गई इनको तमाशा करते
हमने रहबर जो चुने थे वो #मदारी निकले।।

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