19/03/2026
पादा पड़हा पश्चिम बंगाल के देवान Shiv Toppo ने तराई-डूआर्स क्षेत्र के आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर कड़ा वक्तव्य देते हुए कहा कि भारतीय संविधान के Article 244(2) के तहत छठी अनुसूची में आदिवासी बहुल क्षेत्रों को विशेष स्वशासन व्यवस्था देने का प्रावधान है, इसलिए तराई-डूआर्स के पूरे क्षेत्र को भी Autonomous Council के अंतर्गत लाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तराई-डूआर्स क्षेत्र को रहने लायक बनाने में आदिवासी समाज के पुरखों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। घने जंगल, पहाड़ और बीमारियों से भरे इस क्षेत्र को हमारे पूर्वजों ने अपनी मेहनत, संघर्ष और बलिदान से बसने योग्य बनाया। चाय बगानों, खेती-किसानी और मजदूरी के माध्यम से इस क्षेत्र को विकसित करने में आदिवासी समाज की मुख्य भूमिका रही है।
देवान शिव टोप्पो ने आरोप लगाया कि आज उसी आदिवासी समाज को उसके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। सरकार द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद तराई-डूआर्स के आदिवासी बहुल क्षेत्र को न तो छठी अनुसूची का लाभ दिया गया और न ही स्वशासन व्यवस्था लागू की गई। इससे आदिवासी समाज अपने ही क्षेत्र में उपेक्षित और असुरक्षित महसूस कर रहा है।
उन्होंने कहा कि संविधान ने आदिवासी समाज को अपनी परंपरा, संस्कृति, जमीन और प्रशासनिक अधिकारों की रक्षा करने का अधिकार दिया है। इसलिए तराई-डूआर्स क्षेत्र में Autonomous Council / स्वायत्त परिषद का गठन होना जरूरी है, ताकि आदिवासी समाज अपने रीति-रिवाज, जमीन और सामाजिक व्यवस्था के अनुसार विकास कर सके।
उन्होंने यह भी कहा कि
आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासियों के नाम पर हस्तांतरण रोका जाए,
चाय बगान मजदूरों को उचित मजदूरी मिले,
शिक्षा, रोजगार और प्रशासन में आदिवासियों को उचित भागीदारी दी जाए,
और तराई-डूआर्स को संवैधानिक रूप से आदिवासी स्वशासन क्षेत्र घोषित किया जाए।
अंत में उन्होंने कहा कि अगर सरकार जल्द ही इस मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आदिवासी समाज लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और तेज करेगा, क्योंकि यह केवल मांग नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई है।
पादा पड़हा पश्चिम बंगाल
तराई-डूआर्स आदिवासी स्वशासन आंदोलन