04/09/2026
किसानों को राष्ट्रीय मिशन प्राकृतिक खेती के अंतर्गत विभिन्न अवयवों को बनाने एवं प्रयोग की दी जानकारी ।
कृषि विज्ञान केंद्र, काफलीगैर (भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा) बागेश्वर में प्राकृतिक खेती विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ लक्ष्मीकांत निदेशक, भाकृअनुप-विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के निर्देशन एवं डॉ. निर्मल कुमार हेडाऊ, विभागाध्यक्ष-फसल सुधार विभाग एवं नोडल अधिकारी, केवीके, काफलीगैर के सफल मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. नवल किशोर सिंह ने प्राकृतिक खेती में गौपालन के उपयोगी सूक्ष्म जीवों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बीजामृत, जीवामृत एवं घनजीवामृत तैयार करने की प्रायोगिक विधि के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई इसके पश्चात किसानों ने जीवामृत तैयार करने की विधि स्वयं बनाकर सीखा। साथ ही प्रशिक्षण से पूर्व एवं पश्चात किसानों के मूल्यांकन किया गया तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को पुरस्कार देकर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया गया। विषय वस्तु विशेषज्ञ श्री हरीश चंद्र जोशी ने प्राकृतिक खेती में नीमास्त्र, दशपर्णी अर्क तथा खट्टी लस्सी के माध्यम से कीट एवं रोग प्रबंधन की जानकारी किसानों को दी। कार्यक्रम में किसानों को कीट नियंत्रण के लिए कुरमुला लाइट ट्रैप तथा WGPSB2 पाउडर भी वितरित किया गया। इसके पश्चात डा. नवल किशोर सिंह ने किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र के विभिन्न प्रदर्शन इकाईयों जैसे फसल प्रदर्शन इकाई, चारा प्रदर्शन इकाई, डेयरी प्रदर्शन इकाई, वर्मीकंपोस्ट प्रदर्शन इकाई, अजोला प्रदर्शन इकाई, मुर्गी प्रदर्शन इकाई, मत्स्य सह-बत्तख प्रदर्शन इकाई, सब्जी पौध नर्सरी इकाईयों का भ्रमण कराकर इनके व्यावहारिक उपयोग एवं प्रबंधन की जानकारी दी गई। प्रतिभागी किसानों के पशुओं हेतु कृमिनाशक दवा का भी विरण किया गया साथ ही शीताघास तथा रोड्स घास के पौधे वितरित किये गये। प्राकृतिक खेती के अंतर्गत चयनित 05 किसानों को जीवामृत आदि बनाने हेतु प्लास्टिक ड्रम, बाल्टी एवं मग वितरित किये गये। इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र, काफलीगैर के अध्यक्ष डॉ. राज कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती की लागत कम करने, रसायनमुक्त खेती को बढ़ावा देने तथा आत्मनिर्भर बनने के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाना समय की मांग है। सब्जी उत्पादन के अंतर्गत प्रतिभागी किसानों को 400 फूलगोभी, 400 पत्तागोभी एवं 200 ब्रोकोली पौध वितरित किये गये।कार्यक्रम में प्रगतिशील कृषक एवं मास्टर ट्रेनर, प्राकृतिक खेती श्री मनोज कोरंगा, ग्राम बनलेख ने भी किसानों के साथ अपने द्वारा अपनाई जा रही प्राकृतिक खेती की तकनीकों एवं अनुभवों को साझा किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के माध्यम से किए जा रहे विभिन्न कार्यों और उससे प्राप्त अनुभवों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों से जोड़ना, खेती की लागत कम करना तथा रसायनमुक्त एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में विषय वस्तु विशेषज्ञ डा.अमित कुमार, प्रक्षेत्र प्रबंधक श्री नीरज जोशी, वरिष्ठ शोधअध्येता डा. राजेश कुमार मीणा, सौरभ सिंह, श्री बहादुर सिंह, श्री राजेन्द्र सिंह एवं श्री सुरेश लाल ने सक्रिय योगदान दिया। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केन्द्र, काफलीगैर तथा आतमा परियोजना कृषि विभाग जनपद बागेश्वर के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया। Indian Council of Agricultural Research