Pareek Parishad Hisar

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01/09/2026
18/08/2026

पारीक 'ब्राह्मण उत्‍पति'
सृष्टि के आरंभ में सर्वत्र अंधकार ही अंधकार था, किसी भी वस्‍तु या नाम रूप का भान नहीं होता था। उस समय विशाल अंड प्रकट हुआ जो संपूर्ण प्रजाओं का अविनाशी बीज था। उस दिव्‍य एवं अविनाशी महान बीज अंड में सत्‍य स्‍वरूप ज्‍योतिर्मय सनातन ब्रह्म अन्‍तर्याति रूप से प्रविष्‍ट हुआ। उस अंड से ही प्रथम देहधारी प्रजापालक देवगुरु ब्रह्मा का आविर्भाव हुआ। प्रजापति ब्रह्मा ने 'एकोsहं बहुस्‍याम्' संकल्‍प करके तपस्‍या द्वारा तीन लोक पृ‍थ्‍वी, अंतरिक्ष एवं स्‍वर्ग की रचना की अनन्‍तर ब्रह्मा के मुख से ऊंकार वेदमाता गायत्री और वेद प्रकट हुए। बाद में ब्रह्मा जी प्रजासर्ग की कामना से महर्षि वशिष्‍ठ आदि मानस पुत्रों को उत्‍पन्‍न किया। भृगु, अंगिरा, मरीचि, पुलस्‍त्‍य, पुलह, कृतु, अत्रि और वशिष्‍ठ ये आठों महर्षि ब्रह्मा के पुत्र हैं। इन्‍होंने सम्‍पूर्ण जगत को पैदा किया और इन्‍होंने सृष्टि बढ़ाई। अतएव यह ब्रह्मा पुत्र प्रजापति कहलाए। वशिष्‍ठजी ब्रह्मा जी के मानस पुत्र थे। इन्‍हीं की गणना सप्‍तऋषियों में की जाती है। ये ही उत्तर काल में मैत्रावरूणीय वशिष्‍ठ हुए। इन्‍होंने कर्दभ ऋषि की पुत्री अरुन्‍धति के साथ विवाह किया। जिससे इन्‍हें शक्ति आदि सौ पुत्र उत्‍पन्‍न हुए।

पराशर जी इनके पौत्र थे। वशिष्‍ठ जी मूल गौत्र प्रवर्तक चार ऋषियों में से एक हैं। इक्‍कीस प्रजापतियों में भी इनकी गणना होती है। इनके अन्‍य नाम हैं आपव, आरुन्‍धति‍पति, ब्रह्मर्षि, देवर्षि, हैरण्‍यगर्भ, मैत्रावरुणी तथा वारूणी। वशिष्‍ठ जी सच्‍चे अर्थों में ब्रह्मज्ञानी और ब्रह्म ऋषि थे। इनकी आयु भी वेद एवं पुराणों आदि के आधार पर अनन्‍त हुआ करती थी। कई विद्वानों के अनुसार वशिष्‍ठ उपाधि हुआ करती थी। शक्ति इन्‍हीं महर्षि वशिष्‍ठ के महामनस्‍वी पुत्र थे जो अपने सौ भाइयों में ज्‍येष्‍ठ व श्रेष्‍ठ मुनि थे। शक्ति द्वारा स्‍थापित अदृश्‍यन्ति के गर्भ से पराशर का जन्‍म हुआ था।

वशिष्‍ठ जी को इनके गर्भस्‍थ बालक के मुख से वेदाध्‍ययन करने के शब्‍द सुनाई दिए थे। पराशर जी ने बारह वर्षों तक अपनी माता के गर्भ में वेदाभ्‍यास किया था। इनका जन्‍म इनके पिता शक्ति मुनि की मृत्‍यू के बाद हुआ था। पराशर जी का विवाह सुमन्‍तु ऋषि की कन्‍या सत्‍यवति से हुआ था। सत्‍व सत्‍य एवं सदगुण सम्‍पन्‍न होने के कारण सत्‍यवती के नाम से प्रसिद्ध हुई। पराशर जी के पुत्र वेद व्‍यास जी हुए। पराशर जी के नाम पर पारीक वंश प्रचलित हुआ। वेद व्‍यास जी का जन्‍म पराशर मुनि से माता सत्‍यवति के गर्भ से हुआ। इनको कानीन भी कहते हैं।

नारी की कन्‍या अवस्‍था में विवाह से पहले जो पुत्र पैदा होता है वह कानीन कहलाता है। जैसे व्‍यास, कर्ण, शिवी और अष्‍टक आदि। व्‍यास जी पैदा होते ही माता की आज्ञा से तपस्‍या करने वन को चले गए। और जाते समय कह गए कि जब तुम्‍हें मेरी कोई जरूरत हो तो मुझे स्‍मरण करना, मैं स्‍मरण करते ही तुम्‍हारी सेवा में उपस्थित हो जाऊंगा। कालक्रम से इसी सत्‍यवति का विवाह चन्द्रवंशीय राजा शान्‍तनु से हुआ। जिस विवाह को देवव्रत भीष्‍म पितामह ने महान त्‍याग करके सम्‍पन्‍न करवाया था। जब शान्‍तनु पुत्र विचित्रवीर्य का देहांत हो गया और कोई राज्‍याधिकारी न रहा। तब सत्‍यवति ने व्‍यास जी का स्‍मरण किया।

और इनके योगबल से धृतराष्‍ट्र, पांडु और विदुर का जन्‍म हुआ। ब्रह्म ऋषि व्‍यास जी परम ब्रह्म और अपर ब्रह्म के ज्ञाता कवि (त्रिकालदर्शी) सत्‍यव्रतपरायण तथा परम पवित्र हैं। इनकी बनाई हुई महाभारत संहिता सब शास्‍त्रों के अनुकूल वेदार्थों से भूषित तथा चारों वेदों के भावों से संयुक्‍त है। प्रत्‍येक मन्‍वन्‍तर और प्रत्‍येक द्वापर में भिन्‍न-भिन्‍न व्‍यास हुआ करते हैं। व्‍यास जी का नाम व्‍यास इसलिए पड़ा कि वे वेदों का विभाग करते हैं। वैवस्‍वत मनवन्‍तर के अठाईसवें द्वापर में म‍हर्षि पराशर के द्वारा सत्‍यवति के गर्भ से उत्‍पन्‍न होने वाले भगवान कृष्‍ण द्वैपायन ही व्‍यास हुए हैं।

व्‍यास जी की पत्‍नी का नाम पिंगला था। इनके गर्भ से ही महाम‍ुनि शुकदेव का जन्‍म हुआ था जिन्‍होंने माता के गर्भ में ही लौकिक बंधनों से मुक्‍त होने की कामना आरंभ कर दी थी। भगवान वेदव्‍यास ने भागवत पुराण का प्रणयन कर लिया किन्‍तु उनके सम्‍मुख अध्‍यापन की समस्‍या थी। उन्‍होंने अपने ध्‍यान बल से देखा तो उन्‍हें ज्ञात हुआ कि श्री शुकदेव के अन्‍त: स्‍थल में पहिले से ही श्रीमद्भागवत के संस्‍कार विद्यमान हैं। क्‍योंकि पूर्व जन्‍म में जब वो तेते केगले हुए अंडे के रूप में कैलाश पर्वत पर पड़े हुए थे तब भगवान शंकर के मुख से श्रीमद्भागवत की कथा सुनकर ये जीवित हो गए थे और पार्वती के सो जाने पर भी ऊं ऊं का उच्‍चारण करते हुए स्‍वीकृति वचन देते रहे थे।

श्री शुकदेव जी गृहस्‍थाश्रम में प्रवेश लेना नहीं चाहते थे। व्‍यास जी ने उन्‍हें बहुत समझाया अंत में विदेहराज जनक जी के यहां धर्म की निष्‍ठा एवं मोक्ष का परम आशय पूछने के लिए मिथिला भेजा। राजा जनक ने अनेक प्रकार से परीक्षा लेकर उनमें पात्रता देखकर उन्‍हें गृहस्‍थाश्रम का महत्‍व बतलाते हुए विवाह करने का उपदेश दिया था। मिथिला से लौटकर उन्‍होंने पिता की आज्ञा से 'पीवरी' नामक पितरों की कन्‍या से विवाह किया. उसमें उन्‍होंने पांच पुत्र कृष्‍ण, गौर, प्रभु, भूरी, देवश्रुत तथा किर्ती नाम (कृत्‍वी) कन्‍या उत्‍पन्‍न की। शुकदेव जी की पुत्री कृत्‍वी से ब्रह्मदत्त उत्‍पन्‍न हुए। इनका दूसरा नाम पितृवर्ती था। श्राद्धकल्‍प में किए जाने वाले श्‍लोकों के पाठ से ब्रह्मदत्त जी का घनिष्‍ठ संबंध है। इन श्‍लोकों के पाठ से पितरों की तृप्‍ती मानी जाती है। ब्रह्मदत्त जी का विवाह देवल ऋषि की कन्‍या सन्‍नति से हुआ था। इनकी दूसरी पत्‍नी का नाम गौ था। ब्रह्मदत्त जी ने काशीराज की नौ कन्‍याओं से विवाह किये थे, जिससे 103 खांप पारीकों की उत्‍पति हुई।

कतिपय विद्वानों के अनुसार पराशर जी की पत्‍नी का नाम मत्‍स्‍यगंधा, व्‍यासजी की पत्‍नी का नाम अरणि तथा शुकदेव जी की पत्‍नी का नाम पीवरी था उनके पुत्र और एक कन्‍या का होना बताया है। शुक‍देव जी की कन्‍या कीर्तिमति का विवाह विभ्राज के पुत्र अणुह के साथ हुआ था।

शुकदेवजी ने अपने 12 पुत्रों को विद्या पढ़ने के लिए भेज दिया था। उन 12 पुत्रों के नाम भूरश्रवा(भारद्वाज), प्रभु (पराशर), शंभु (कश्‍यप), कृष्‍ण (कौशिक), गौर (गर्ग), श्‍वेतकृष्‍ण(गौतम), अरुण(मुद्गल), गौरश्‍याम(शान्डिल्‍य), नील (कोत्‍स), धुम्र(भार्गव), बादरि(वत्‍स), उपमन्‍यु(धोम्‍य) इनमें से 12 नाम गुरुजी द्वारा दिए गए हैं। एक अन्‍य पुस्‍तक में लिखा है कि शुकदेव जी के कीर्तिमति नाम कन्‍या तथा पांच पुत्र हुए जिनके नाम भूरिश्रवा:, प्रभु:, शम्‍भु:, कृष्‍ण: तथा गौर: हैं। कीर्तिमति को शुक वंश में प्रसिद्ध होने के कारण ब्रह्मदत्त जी भी पराशर के पक्ष में गये।

पारीक शब्‍द के बारे में विद्वानों का लेख है कि पार ऋषि का नाम पराशर जी है इसलिए उनके वंशज पारीक हैं। शुकदेव जी के 12 पुत्रों के नाम पर ही पारीक ब्राह्मणों के 12 गोत्र हैं। पारीक ब्राह्मणों के 9 अवंटक या नख हैं, गौत्र ये है भारद्वाज, कश्‍यप, वत्‍स, उपमन्‍यु, कौशिक, गर्ग, शान्डिलय, गौतम, कौत्‍स, पराशर, भार्गव तथा मुद्गल। नख-व्‍यास-7 जोशी-37 तिवाड़ी-27 मिश्र(बोहरा)- 9 पुरोहित- 4, उपाध्‍याय-13 कौशिकभट्ट- 1 पाण्‍डेय-4 द्विवेदी-1। पारीकों की कुल माताएं 22 हैं इन सबका विस्‍तृत विवरण एक चार्ट के रूप में प्रकाशित किया गया है इसे अवश्‍य देखें।

पारीक जाति का इतिहास पुस्‍तक के अनुसार वेदोक्‍त कर्मों की परीक्षा न्‍यायसंगत युक्तियों से विचार करके स्‍वात्‍मा का कल्‍याण करने की शक्ति रखात हो उसको विद्वान लोग पारीक्ष कहते हैं। चार सौ वर्षों पूर्व इस वंश में 108 शाखाएं थी वर्तमान काल में अनुमान से 80 ही हैं। शुकदेव जी की कन्‍या कृत्‍वी का विवाह विभ्राज के पुत्र अणुह के साथ हुआ इनसे ब्रह्मदत्त हुए। ये महातपस्‍वी और ज्ञानी ब्रह्मदत्त शुकदेव की इच्‍छानुसार पराशर के वंश में गये। उस पक्ष में जाने से ही (पुत्री का धर्मानुसार) ब्रह्मदत्त और उनकी सन्‍तान 'पाराक्‍य' कहलाए। इसी का अपभ्रंश 'पारीक' है। पारीक शब्‍द की व्‍युत्‍पति में अन्‍य प्रमाण हेतु यह भी प्रतीत होता है कि पराशर को 'पारऋषि' ऐसा नाम मिला हुआ था इससे पारर्ष व पारीख विद्ध हुवा प्रमाणित होता है अथवा ब्रह्मदत्त के पूर्वजों में पैर और पार नाम के दो बड़े तपस्‍वी हुए हैं इनके कुल के लोग सहज ही पारीक कहलाए होंगे। आयोध्‍या में सरयु के 'पार' रहने से भी पारीक कहाया जाना सुना गया है।

श्री राम स्वरूप पारीक जी को उनके 90वें जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आपका पुराना गांव बुधवाली है, जो रतनगढ़ तहसील, चूर...
06/07/2026

श्री राम स्वरूप पारीक जी को उनके 90वें जन्मदिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आपका पुराना गांव बुधवाली है, जो रतनगढ़ तहसील, चूरू जिले में स्थित है। वहाँ से वे हरियाणा के श्यामसुख गाँव में आकर बस गए और वर्तमान में हिसार में निवास कर रहे हैं। उन्होंने मुख्याध्यापक के पद से 1994 में सेवानिवृत्ति प्राप्त की। पारीक समाज के लिए वे अभी भी सक्रिय और ऊर्जावान हैं। वे गांधी विद्या मन्दिर सरदारशहर संस्था में 1956-57 में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे। उन्होंने 1962 से 1965 तक राजकीय अध्यापक संघ पंजाब में महासचिव के रूप में कार्य किया। 1972 में वे राजकीय अध्यापक संघ हरियाणा के महासचिव बने। अमन कमेटी हिसार के सदस्य के रूप में उन्होंने चौधरी भजनलाल के मुख्यमंत्री काल में कार्य किया। वे जिला ब्राह्मण सभा हिसार के चार बार महासचिव रहे। ऑल इण्डिया पारीक महासभा के क्षेत्रीय प्रभारी और विप्रज्योति कल्याण समिति के संरक्षक के रूप में भी उन्होंने कार्य किया। आज भी समाज में उनकी सक्रिय भूमिका और योगदान सराहनीय है। भगवान उनकी याददाश्त को बनाए रखें और उन्हें स्वस्थ रखें। आदरणीय रामस्वरूप पाण्डिया जी की सामाजिक भावना को पारीक परिषद व हिसार पारीक परिवार नमन करता है। एक बार फिर हिसार के ही नहीं पूरे हरियाणा के पारीक समाज के गौरव को उनके 90वे जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएँ।

आज हृदय अत्यंत प्रसन्न और कृतज्ञता से भरा हुआ है।यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि डाॅ• मनीष जोशी जी को *भारत सरकार के ...
16/06/2026

आज हृदय अत्यंत प्रसन्न और कृतज्ञता से भरा हुआ है।
यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि डाॅ• मनीष जोशी जी को *भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित सीनियर फैलोशिप* प्रदान की गई है।
पारीक परिवार डॉ॰ मनीष जोशी जी को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ देती हैं
इस उपलब्धि पर डॉ•मनीष जोशी जी ने अपने दिल की बात सांझा की है

यह उपलब्धि केवल मेरी नहीं है, बल्कि मेरे परिवार, मेरे गुरुओं, मेरे विद्यार्थियों, मेरी संस्था **अभिनय रंगमंच**, और उन सभी मित्रों एवं शुभचिंतकों की है जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया , जिन्होंने हर परिस्थिति में मेरा उत्साह बढ़ाया और मेरे साथ खड़े रहे।

रंगमंच ने मुझे पहचान दी, उद्देश्य दिया और जीवन को अर्थ दिया। यह सम्मान मुझे और अधिक समर्पण के साथ भारतीय रंग परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं विकास के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है।

आप सभी के प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद के लिए हृदय से धन्यवाद।

🙏 कृतज्ञ
**मनीष जोशी**
रंगकर्मी | निर्देशक | लेखक

भिवानी जिले के मतानी गांव के युवा लेफ्टिनेंट हेमंत पारीक शर्मा ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर बढ़ाया क्षेत्र का मान, पर...
13/06/2026

भिवानी जिले के मतानी गांव के युवा लेफ्टिनेंट हेमंत पारीक शर्मा ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर बढ़ाया क्षेत्र का मान, परिवार की गौरवशाली सैन्य विरासत को किया आगे बढ़ाया

मतानी (भिवानी), 13 जून: भिवानी जिले के गांव मतानी के लिए 13 जून 2026 का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण बन गया, जब गांव के युवा लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए), देहरादून से भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त कर देश सेवा के पथ पर अग्रसर हुए। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है।

लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा की यह उपलब्धि उनके दादा स्वर्गीय श्री मामन राम पारीक शर्मा के उस सपने को साकार करने वाली है, जिसमें वे अपने पोते को भारतीय सेना का अधिकारी बनते देखना चाहते थे। स्वर्गीय श्री मामन राम शर्मा त्याग, राष्ट्रभक्ति और अनुशासन की अद्भुत मिसाल थे। उन्होंने अपने परिवार में देश सेवा की ऐसी भावना विकसित की कि उनके तीनों पुत्रों और तीन पौत्रों ने भारतीय सेना में सेवा देकर राष्ट्र की रक्षा का दायित्व निभाया। उनके आदर्श और संस्कार आज भी परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा के पिता राजेश कुमार, जो भारतीय सेना के पूर्व सैनिक हैं, ने लगभग 20 वर्षों तक देश की सेवा की है। उनके अनुशासन, समर्पण और सैन्य जीवन के अनुभवों ने हेमंत शर्मा को बचपन से ही देश सेवा के लिए प्रेरित किया।

परिवार की राष्ट्रभक्ति और बलिदान की परंपरा का सबसे बड़ा उदाहरण उनके चाचा स्वर्गीय सैनिक बिजेंद्र कुमार शर्मा हैं, जिन्होंने वर्ष 2002 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा क्षेत्र में आतंकवादियों से लड़ते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका शौर्य और बलिदान आज भी पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

देश सेवा की यह परंपरा परिवार में लगातार आगे बढ़ रही है। लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा के दो बड़े भाई भी भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल नरेंद्र कुमार, सेना मेडल तथा मेजर अशोक कुमार शामिल हैं। इससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्र सेवा इस परिवार की पहचान और विरासत दोनों है।

भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून में आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड के दौरान उनके माता-पिता, बहन तथा मामा उपस्थित रहे। अपने बेटे और भांजे को भारतीय सेना के अधिकारी के रूप में कमीशन प्राप्त करते हुए देख पूरा परिवार गर्व और भावुकता से भर उठा। यह क्षण उनके जीवन के सबसे यादगार और गौरवपूर्ण पलों में से एक बन गया।

स्वर्गीय श्री मामन राम शर्मा के पौत्र एवं पूर्व सैनिक राजेश कुमार के सुपुत्र लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, हिसार कैंट से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने तकनीकी प्रवेश योजना (Technical Entry Scheme - TES) के माध्यम से भारतीय सेना में प्रवेश प्राप्त किया। उन्होंने मिलिट्री कॉलेज ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियरिंग (एमसीईएमई), सिकंदराबाद में तीन वर्षों का तकनीकी एवं सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया और तत्पश्चात 13 जून 2026 को भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त किया।

लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे मतानी गांव और भिवानी जिले का नाम रोशन किया है। गांववासियों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए सम्मान और गर्व का विषय बताते हुए युवा अधिकारी को शुभकामनाएं दीं।

भारतीय सेना में अपने नए सफर की शुरुआत करते हुए लेफ्टिनेंट हेमंत शर्मा अपने परिवार की गौरवशाली सैन्य परंपरा, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की विरासत को आगे बढ़ाएंगे। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी और यह संदेश देगी कि देश सेवा का जज्बा यदि परिवार की विरासत बन जाए, तो सपने एक दिन अवश्य साकार होते हैं।

आज के इस युग में जहाँ इंसान एक एक गज भूमि के लिए अपने बंधु बांधवों के साथ बेईमानी खून खराबा कर अपने संबंधों की बलि दे दे...
11/06/2026

आज के इस युग में जहाँ इंसान एक एक गज भूमि के लिए अपने बंधु बांधवों के साथ बेईमानी खून खराबा कर अपने संबंधों की बलि दे देता है।
उसी युग में पुरोहित समाज मे अपने पूर्वजों की इच्छा का सम्मान और उनके पदचिन्हों पर चलते हुए अपने पैतृक गांव (बिंदायका,जयपुर) में खून पसीने से सहेजी भूमि को मोक्ष धाम हेतु परमार्थ सेवा को समर्पित किया।इसके लिए ग्रामीणों बंधुओं और मित्रों ने उनका अभिनंदन कर आभार प्रकट किया।
पारीक समाज भी इनका अभिनंदन व आभार प्रकट करता है

19/04/2026

राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए आयोजित परीक्षा परिणाम में पारीक समाज के कुल 15 पुरुष/महिला प्रत्याशियों को सफलता मिली है। सभी चयनितों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।🎊
*दामोदर पारीक(82) सुरेश पुरोहित (141) जयदेव पारीक(313) सुधांशु पारीक(438) साक्षी पारीक (476) प्रियेश पारीक (527) हितेश पारीक आशीष जोशी (533) सौमित्र पारीक (574) अभिलाषा पारीक (671) काव्या पुरोहित (1039) अच्युत पारीक (1171) रोहित पारीक(1254) प्रतीक पुरोहित (1703) राजश्री पारीक(1933) माधुरी पुरोहित (2283)
* शायद इतिहास में ये पहला मौका होगा, जब पारीक समाज के 15 युवक/युवतियों ने एक साथ R.A.S में सफलता मिली है, और समाज का गौरव बढ़ाया है।
सभी प्रत्याशियों को सफलता की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐ🎊
राजेश पारीक 9813529100
(महासचिव)ऑल इण्डिया पारीक महासभा हरियाणा

साहस, तप और न्याय के पर्याय भगवान श्री भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। भगवान विष्णु के छठे अ...
19/04/2026

साहस, तप और न्याय के पर्याय भगवान श्री भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी ने मानव कल्याण के लिए धर्म, साहस और न्याय का मार्ग प्रशस्त किया। आइए, उनके आदर्शों को अपनाकर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।

गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति Sh.Ramkishor Tiwari Ji
06/01/2026

गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति Sh.Ramkishor Tiwari Ji

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