20/08/2026
ठेकेदारी प्रथा के जनक आज HKRN पर सवाल उठा रहे हैं!
जिन लोगों ने हरियाणा में ठेकेदारी प्रथा को जन्म दिया, ठेकेदारों के जरिए युवाओं की मेहनत की कमाई पर कट लगवाए, DC रेट के नाम पर फिक्स रकम और वेतन कटौती का खेल चलाया और नौकरियों में सिफारिश का रास्ता खोला—आज वही लोग HKRN पर सवाल खड़े कर रहे हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं।
लेकिन हरियाणा का युवा सब जानता है।
HKRN का एक भी कर्मचारी इनके झांसे में नहीं आया।
कांग्रेस और इनेलो के शासन में चली ठेकेदारी व्यवस्था के खिलाफ जब लगातार शिकायतें सामने आईं, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल जी ने संज्ञान लिया।
13 अक्टूबर 2021 को HKRN का पंजीकरण हुआ और 1 नवंबर 2021 को पोर्टल लॉन्च किया गया।
इसके बाद लाखों युवाओं ने HKRN पोर्टल पर पंजीकरण कराया और इसके माध्यम से युवाओं को सरकारी विभागों के साथ-साथ विभिन्न रोजगार अवसरों तक पहुंच मिली।
आज मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में सरकार HKRN कर्मचारियों की जॉब सिक्योरिटी और रोजगार व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
आरक्षण की बात करने वालों से सवाल:
जब ठेकेदारों के जरिए नियुक्तियां होती थीं, तब मेरिट कहाँ थी? आरक्षण कहाँ था? पारदर्शिता कहाँ थी?
आज HKRN में Family ID के माध्यम से सत्यापन, पात्रता और मेरिट आधारित व्यवस्था को महत्व दिया जा रहा है। वहीं नियमित सरकारी भर्तियों में आरक्षण और संवैधानिक नियम लागू हैं।
युवाओं को ठेकेदार नहीं, पारदर्शी व्यवस्था चाहिए।
युवाओं को सिफारिश नहीं, मेरिट चाहिए।
युवाओं को शोषण नहीं, सम्मान और सुरक्षा चाहिए।
इसीलिए विपक्ष के राजनीतिक प्रदर्शन को हरियाणा के युवाओं का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा।
ठेकेदारी प्रथा की राजनीति नहीं चलेगी,
पारदर्शी रोजगार व्यवस्था आगे बढ़ेगी!
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