24/07/2026
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)-
पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी
प्रेस विज्ञप्ति -
सोहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने का निर्णय: इतिहास की विकृति का एक खतरनाक उदाहरण..................................
सोहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर 'गोपाल मुखर्जी रोड' करने के कोलकाता नगर निगम के फैसले और इस फैसले का समर्थन करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी व राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री की सार्वजनिक टिप्पणियों पर हम गहरी नाराजगी और तीव्र विरोध व्यक्त करते हैं।
इस घटना में सबसे चिंताजनक बात यह है कि पूरा अभियान एक स्पष्ट ऐतिहासिक असत्य (झूठ) पर टिका हुआ है। जनता के बीच यह धारणा बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि सोहरावर्दी एवेन्यू का नाम अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सोहरावर्दी के नाम पर रखा गया था और उस नाम को हटाना ही मानो 'इतिहास का सुधार' है। जबकि वास्तविक सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।
कोलकाता के सोहरावर्दी एवेन्यू का नामकरण प्रख्यात शिक्षाविद्, चिकित्सक, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित बुद्धिजीवी और कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति सर हसन सोहरावर्दी की स्मृति में किया गया था। वे 1934 से 1938 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय के उप कुलपति थे। विशेष रूप से, उनके बाद उप कुलपति का पदभार डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने सम्भाला था। शिक्षा, चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन में सर हसन सोहरावर्दी का योगदान इतिहास में सुस्थापित और स्वीकृत है।
इसलिए सवाल उठता है कि क्या राज्य के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री को यह बुनियादी ऐतिहासिक तथ्य भी नहीं मालूम? यदि वे नहीं जानते, तो यह उनकी अज्ञानता को दर्शाता है। और यदि वे जानते हुए भी यह दुष्प्रचार कर रहे हैं, तो यह इतिहास को लेकर जानबूझकर किया गया झूठ के अलावा और कुछ नहीं है।
इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि एक शिक्षाविद् और विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति के नाम को दुर्भावनापूर्ण तरीके से एक अन्य राजनीतिक व्यक्ति के साथ मिलाकर जनता के मन में भ्रम पैदा किया जा रहा है। यह केवल एक तथ्यात्मक गलती नहीं है; यह राजनीतिक स्वार्थ के लिए इतिहास का इस्तेमाल करने की एक खतरनाक प्रवृत्ति की अभिव्यक्ति है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस झूठे प्रचार का नेतृत्व खुद राज्य के मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री कर रहे हैं। जिस राज्य ने कभी विद्यासागर, रवींद्रनाथ, जगदीश चंद्र बसु, मेघनाद साहा और अनगिनत मनीषियों की ज्ञान-साधना की परंपरा को संजोया है, उस राज्य के शासक आज इतिहास और शिक्षा के मामले में ऐसा निर्लज्ज तथ्यात्मक विकृति कर रहे हैं—यह पूरे बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।
हमारा मानना है कि यह कोई विच्छिन्न घटना नहीं है। यह इतिहास को विकृत करके, लोगों को गुमराह करके और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के औजार के रूप में उपयोग करके राजनीतिक लाभ उठाने की एक बड़ी योजना का हिस्सा है। तथ्यों, अनुसंधान और दस्तावेजों पर आधारित इतिहास-लेखन के बजाय भावनाओं, द्वेष और अर्धसत्यों को स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हम कोलकाता नगर निगम और राज्य सरकार से मांग कर रहे हैं ___
1. इस नाम परिवर्तन के फैसले को तुरंत वापस लेना होगा।
2. सोहरावर्दी एवेन्यू का वास्तविक इतिहास और इसके नामकरण की पृष्ठभूमि को सार्वजनिक करना होगा।
3. मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और सम्बंधित व्यक्तियों को अपने भ्रामक व असत्य बयानों को वापस लेना होगा।
4. इतिहास को राजनीतिक प्रचार के हथियार के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना होगा।
हम स्पष्ट शब्दों में कहना चाहते हैं कि बंगाल की जनता इतिहास की विकृति को बर्दाश्त नहीं करेगी। बंगाल की परंपरा ,सांप्रदायिक विद्वेष, राजनीतिक प्रचार या शासक की सनक पर नहीं टिकी है; बल्कि यह सत्य, तर्क, शिक्षा और मानवतावाद पर आधारित है।
आज सवाल सिर्फ एक सड़क के नाम का नहीं है। सवाल यह है कि— इतिहास की जगह झूठ, शिक्षा की जगह अज्ञानता और सच्चाई की जगह राजनीतिक प्रचार को थोपने के इस कुत्सित प्रयास के खिलाफ हम कहाँ खड़े होंगे।
इतिहास का संशोधन नहीं, बल्कि इतिहास की विकृति के खिलाफ आवाज उठाना ही आज का मुख्य कर्तव्य है।
मोहम्मद सलीम
सचिव
21जून,2026