01/09/2026
कुछ कलाकार चुनें नहीं जाते है बल्कि तय होते है। बेशक फ़िल्म मेकर्स किसी को चुनने की कोशिश कर लें।
फ़िल्म मेकर विशाल चतुर्वेदी ने हनुमान अंश के मुख्य किरदार के लिए अन्य कलाकार फाइनल कर लिया था किंतु हनुमान जी ने अपना अंश, अपने भक्त शोभिनव सत्या को आशीर्वाद दे रखा था कि तुम मेरे परम भक्त लक्ष्मी दास के जीवन को जीवंत करोगे। फिर क्या शोभिनव सत्या हनुमान अंश में नीब करौरी बाबा के लिए फाइनल हुए।
शोभिनव ने अपने पहले ही अभिनय क्रेडिट में इतना सहज और सरल अभिनय जीवंत किया है, अद्भुत है। चेहरे पर सौम्य भाव मोह ले जाते है।
हनुमान अंश, बहुत श्रद्धा भाव से बनाई है, इसलिए सीधे कनेक्ट करती है। और साधारण स्टोरी टेलिंग का अनुभव कतई असाधारण है। आँखें बस में नहीं रहती है और भीगती रही। क्योंकि राम नाम में लीन हो जाती है। तो वही, शिव दर्शन रौंगटे खड़े कर जाते है। खैर।
तकनीकी पक्ष में बजट की कमी निश्चित रूप से कई जगह हाईलाइट होती है, लेकिन फ़िल्म का स्क्रीनप्ले इतना ग्रिपिंग और एंगेजिंग है कि ध्यान इन कमियों पर जाने ही नहीं देता। सीमित संसाधनों के बावजूद कहानी जिस गति और प्रभाव के साथ आगे बढ़ती है, वह दर्शक को लगातार बाँधे रखती है।
फ़िल्म का बीजीएम शानदार और बेहद प्रभावशाली है। यह केवल दृश्यों को बैकग्राउंड सपोर्ट नहीं देता, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। फोक गीत अहा….शानदार…जानदार है।
विशाल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि फ़िल्म के क्रिएटिव पक्ष को बहुत अच्छे से संभाला है। खास बात यह है कि निर्देशन और प्रस्तुति में मुख्य किरदार को ओवरशैडो किए बिना उसके आसपास की दुनिया और घटनाओं को प्रभावी ढंग से स्थापित किया गया है। फ़िल्म का फोकस अपने मेन किरदार पर बना रहता है और यही इसकी नैरेटिव स्ट्रेंथ है।
अभी तो कथा शेष है, क्योंकि कथा विशेष है।
फोटो-इंटरनेट