19/07/2026
कहते हैं, **"माँ-बाप का दूध कभी नहीं उतरता..."**
लेकिन मुझे हमेशा लगा कि बच्चे कोई कर्ज़ चुकाने के लिए इस दुनिया में नहीं आते।
मैंने अपने आसपास ऐसे कई माँ-बाप देखे हैं जो हर छोटी-बड़ी बात पर बच्चों को अपना "दूध का कर्ज़" याद दिलाते रहते हैं।
उनकी हर सफलता पर अपना हक़, हर फैसले पर अपना अधिकार और हर सपने पर अपनी शर्तें थोप देते हैं।
लेकिन मैं... शायद ऐसी माँ कभी नहीं बन पाऊँगी।
मैं नहीं चाहती कि मेरे बच्चे मेरी अधूरी इच्छाओं का बोझ उठाएँ।
मैं नहीं चाहती कि वे मेरी कुर्बानियों का हिसाब चुकाते रहें।
मेरी तो बस एक ही चाहत है...
**मैं इतना कुछ कर जाऊँ कि मेरे बच्चों को कभी किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े।**
उन्हें बेहतरीन शिक्षा मिले, अच्छे संस्कार मिलें, आत्मसम्मान मिले और अपनी पसंद की ज़िंदगी चुनने की आज़ादी मिले।
**मेरी कमाई का हर कतरा... मेरी हर मेहनत... मेरी हर दुआ... मेरे बच्चों के नाम है।**
मेरे जीते-जी भी... और मेरे जाने के बाद भी।
मैं उनसे बदले में कुछ नहीं चाहती।
न सेवा, न एहसान, न "दूध का कर्ज़"।
बस इतना चाहती हूँ कि जब लोग उनसे पूछें कि तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत कौन थी...
तो वे मुस्कुराकर कहें—
**"हमारी माँ... जिसने हमें अपने सपनों का बोझ नहीं, बल्कि अपने विश्वास के पंख दिए।"** ❤️
**बच्चे हमारी संपत्ति नहीं होते... वे हमारी सबसे खूबसूरत ज़िम्मेदारी होते हैं।** 🤍