23/07/2024
एक लकड़हारा जंगल में लकड़ियां काटने जाया करता था। उसी जंगल में एक फकीर की झोपड़ी थी।
उस फकीर ने एक दिन उस लकड़हारे को अपने पास बुलाया और पूछा, "मैं तुझे रोज देखता हूं कि तू इस जंगल में लकड़ी काटता है। क्या कभी तूने आगे जाने की नहीं सोची?"
लकड़हारे ने कहा, "मेरी सात पीढ़ी यही लकड़ी काटती रही है और आगे भी सात पीढ़ियां यही काटती रहेंगी। मुझे कहीं आगे जाने की क्या जरूरत है?"
इस पर उस फकीर ने कहा, "थोड़ा और आगे जाओ। वहां चंदन की लकड़ियां हैं।"
वह थोड़ा और आगे गया और उसे वाकई चंदन की लकड़ियां मिलीं और वह बहुत खुश हो गया। पहले वह रोज लकड़ियों के लिए जाता था, अब वह हफ्ते में एक बार ही जाता था। वह बहुत पैसे वाला हो गया।
कुछ समय बाद फकीर ने फिर उसे रोका और उससे कहा, "मैं कई दिनों से देख रहा हूं तू चंदन की लकड़ियां ला रहा है। क्या कभी उससे और आगे गया?"
इस पर लकड़हारे ने कहा, "उससे आगे क्या करना है? चंदन की लकड़ियां तो सबसे श्रेष्ठ लकड़ियां हैं।"
फकीर ने कहा, "अरे पागल, उससे थोड़ा आगे बढ़ जा। वहां चांदी की खदान हैं।"
फिर वह चांदी की खदानों में पहुंचा। अब वह और पैसे वाला बन गया। अब वह अपने साथ खच्चर लेकर जाता और बहुत सारी चांदी भर कर लाता।
धीरे-धीरे समय बीतता गया। एक दिन फकीर उसे फिर मिला। अब उसने उससे और आगे जाने को कहा और कहा कि वहां सोने की खदान हैं। फिर वह आदमी धीरे-धीरे अपनी जगह का सबसे अमीर आदमी बन गया। उसके पास बहुत सुंदर घर हो गया जो महल की तरह था।
कई साल बीत गए। एक दिन वह अपने रथ से कहीं जा रहा था। सामने वह फकीर आ गया। फकीर को देखते ही वह आदमी रथ से उतरा और उसे प्रणाम करके कहा, "आप बहुत दिनों के बाद दिखे।"
उस फकीर ने कहा, "लेकिन आज भी मैं तुझसे वही प्रश्न पूछता हूं।"
उस आदमी ने उस फकीर की बात बीच में ही काटते हुए कहा, "अब आप मुझसे नहीं कह सकते कि और आगे जाओ, क्योंकि मैं बहुत आगे चला गया हूं। पृथ्वी का पूरा चक्कर काट लिया है मैंने। मैंने सोने से भी आगे हीरे-जवाहरात की खदानी ढूंढ ली हैं। मुझे सब कुछ मिल गया है। मैंने जान लिया है कि आगे कुछ भी नहीं है। मैं पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाती चुका हूं, इसलिए अब आप मुझसे आगे जाने की बात ना कहे।"
इस पर फकीर जोर-जोर से हंसने लगा और उसने कहा, "आगे अभी बहुत कुछ है।"
वह आदमी बोला, "उससे आगे क्या है?"
फकीर ने कहा, "उससे आगे मैं हूं। क्या कभी तुमने सोचा कि जिस आदमी को चांदी, सोने, हीरे-जवाहरात सब की खबर हो, वो इस झोपड़ी में क्या कर रहा है?"
यह बात सुनकर लकड़हारा वही चुपचाप खड़ा हो गया और सोचने लगा, "हां वाकई जिस इंसान को इन सब चीजों के बारे में पता है, वह इस झोपड़ी में क्या कर रहा है?"
तब उसने याद किया कि मैंने जब भी इस फकीर को देखा, ध्यान मुद्रा में ही देखा। क्या ध्यान इन सबसे आगे की चीज है? क्या ध्यान से बढ़कर और कुछ भी नहीं? क्या यह सारी चीजें ध्यान के आगे फीकी हैं?
वह आदमी उस रथ से उतर गया और फिर उसके बाद कभी उस रथ पर नहीं चढ़ा। ध्यान आत्मा की खुराक है, आत्मा को मजबूत करता है। ध्यान एक ऐसी आदत है जो जीवन बदल सकती है और वह आदत है ध्यान करने की आदत।
इस संसार में देखने के लिए अनेक सुंदर स्थान हैं, परंतु सबसे सुंदर स्थान है बंद आंखों से अपने भीतर देखना!
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