Surakcha karamchari union - INTUC OFK

Surakcha karamchari union - INTUC OFK SK Union(INTUC) khamaria, Affiliated INDWF/INTUC.

02/08/2021

ताकि, दुकान चलती रहे।
लोगों की फर्जी सहानुभूति अर्जित करने के लिए छाती पीटने का कोई लाभ नहीं।
यह सिस्टम अनैतिक है। चिट्ठी पत्री, हस्ताक्षर अभियान,काले बिल्ले, काले झंडे विरोध दिवस से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है।
हड़ताल से कुछ प्रभाव अवश्य पड़ता रहा है किंतु अब एस्मा के बाद हड़ताल की भी संभावना नहीं रही।
सचमुच लड़ने का इरादा था तो जेल हो जाती तो हो जाने देते, जुर्वाना होता तो कर लेने देते, किंतु हड़ताल से भागना नहीं था। अब जब एस्मा के डर से हड़ताल रद्द कर दी, आंदोलन से भाग लिए, तो उचित होगा कि कर्मचारियों की सेवा शर्तों उनके भविष्य और इस संस्थान को 100% सरकारी रखने के मुद्दों पर बात करें। वर्तमान परिस्थितियों में यही एकमात्र रास्ता है। यह सिस्टम जो वादा करेगा, जरूरी नहीं कि पूरा करे । लेकिन बात नहीं करोगे तो उसे मनमाना सेवा शर्त निर्धारित करने और इस तथाकथित कारपोरेशन और अधिक बंटाधार करनें, यहां तक की बेचने का बहाना और मौका मिल जाएगा।
एक फेडरेशन एस्मा हटाने और कारपोरेशन का आदेश निरस्त करने के अलावा किसी विषय पर बात करने को सहमत नहीं था। एक और संगठन सरकारी का ठप्पा लगने से बचने के लिए मजबूरी में हां में हां मिला रहा था।
रक्षा मंत्री जी ने स्पष्ट कह दिया एस्मा ना हटे गा।
(कहा कि एस्मा बंदूक के लाइसेंस जैसा है ) सरकार इसे किसी कीमत पर नहीं हटाएगी। कॉरपोटाइजेशन का आदेश जारी हो चुका है इसे भी वापस नहीं लिया जाए गा। सेवा सर्तो की बात करना है तो करो।
दिखावा अलग बात है लेकिन सचमुच लड़ने की स्थिति नहीं बची है। अन्य संगठन ना तो लड़ने को तैयार है ना इस सत्य को स्वीकारने को तैयार हैं।
इसलिए आई एन डी डब्ल्यू एफ ने कर्मचारियों की सेवा शर्तों एवं ऑडनेंस फैक्ट्री आगरा इजेशन को 100% सरकारी रखने के मुद्दे पर बात करने का प्रस्ताव दिया। अन्य जागरूक और यथार्थ परक सोच वाले संगठनों ने भी यही किया।
यही आइओएफएस एसोसिएशन (आयुध निर्माणियों के अधिकारियों का संगठन) कर रहा है । यही शिड्रा (जेडब्ल्यूएम चारजमैन सुपरवाइजर क्लर्क आदि कर्मचारियों के एसोसिएशन) ने प्रस्ताव दिया है। ग्रुप ए अधिकारी तो कारपोरेशन के विभिन्न पदों की रिक्तियों के तारतम्य में इंटरव्यू भी दे आए। तो क्या यह सब भी ना समझ, कर्मचारी द्रोही, संस्थान द्रोही और देशद्रोही हैं? ब्लैक मेलिंग बंद होनी चाहिए।
जब भीषण तूफान में सब कुछ उड़ा जा रहा हो , बाढ़ में सारी गृहस्थी बही जा रही हो, तब लोगों की जान और जीवन यापन की चिंता करना ज्यादा जरूरी है या बाढ़ का विरोध करना। अथवा यह कहना कि मैं बाढ़ को कुछ बनता ही नहीं। मैं नगर और नागरिकों को नुकसान पहुंचाने वाले तूफान और बाढ़ हो को स्वीकार ही नहीं करूंगा । इससे अगर तूफान और बाढ़ रुक जाने वाली हो तो बाढ़ के विरुद्ध हस्ताक्षर अभियान चलाकर बाढ़ का विरोध जरूर करना चाहिए। यदि तूफान और बाढ़ को रोकना अपनी हैसियत के बाहर हो तो समझदारी इसी में है कि जो बचाया जा सके वह बचाया जाए। 100% सरकारी प्रतिष्ठान रखने का वादा सरकार से लिखित में कराया जाय। कारपोरेशन बनने के बाद सेवा शर्तें सरकारी कर्मचारियों जैसी होगी यह संभव ही नहीं है, फिर भी सरकार यदि कहती है तो यह वादा भी लिखित में कराया जाए। सेवा शर्तें ना बदलने के नियम जो भी बनें उन्हें लिपि बद्ध कराया जाए। आयुध निर्माणियों के अधिकारियों का संगठन आइओएफएस एसोसिएशन, सिड्रा से संबद्ध समस्त एसोसिएशन, अन्य स्वतंत्र एसोसिएशन सब ने इस महान संस्थान को 100% सरकारी रखने एवं कार्मिकों की सेवा शर्तों को यथावत रखने, निर्माणियों में काम ना होने की स्थिति में सरकार द्वारा वेतन भुगतान की व्यवस्था करने। पुराने पेंशनर्स का पेंशन सरकार द्वारा देने कर्मचारियों के ईपीएफ का शेयर सरकार द्वारा देने, वर्तमान में प्राप्त समस्त सुविधाएं जैसे चिकित्सा सुविधा शिक्षा व्यय प्रतिपूर्ति सुविधा एलटीसी इत्यादि इत्यादि बरकरार रखने, 2004 के बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए पेंशन व्यवस्था में कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने, आदि विषयों पर सरकार से सशर्त वार्ता प्रारंभ की। कुछ लोग व्यवस्था से सीख लेते हैं और हमारे देश की आज की स्थापित व्यवस्था यह है कि, जो आपके मन का काम ना करें, जो मूर्खतापूर्ण निर्णयों पर सवाल कर बंद रास्ता खोलने का प्रयास करें, उसे देशद्रोही, समाज द्रोही, आतंकवादी, जयचंद, घोषित कर दो। सब नहीं तो इतने लोग तो झांसे में आ ही जाएंगे कि दुकान चलती रहे।

23/05/2021

*मैं एक बात नहीं समझ पा रहा हूं। कि पहले की सरकार में 1962 , 1965 , 1971 की भीषण लड़ाई भी हुई,*
*पोलियो, प्ले, हैजा, टीबी जैसी महामारी भी हुई ।*
*जिनका मुफ्त में इलाज हुआ*,
*मुफ्त में पूरा देश का टीकाकरण हुआ*,
*खरबो का घोटाला भी हुआ*, *काला धन विदेशों में भेजा गया*,
*भ्रष्टाचार खूब व्याप्त रहा*,
*फिर भी बहुत सारे सरकारी कारखाने कंपनियां लगी*,
*सरकारी हस्पताल, सरकारी कॉलेज, सरकारी स्कूल बनें, सरकारी नौकरियों में कोई कमी नहीं रही* ।
*लोगों को नौकरियां दी गई* ।
*जो व्यक्ति इंटर मैट्रिक पास कर जाता था उसे घर से बुलाकर नौकरियां दी गई, तनख्वाह में कोई कमी नहीं रही* ।
*!भत्ता हमेशा लगातार बढ़ता था महंगाई भत्ता 131% तक दिया,*
*सबसे अधिक वेतन वृद्धि छठे वेतनमान में मिली,*
*सरकारी कर्मचारियों को पेंशन दिया जाता था,*
*देश की जीडीपी 8% से ऊपर थी.*
*आखिर यह सब गद्दार चोरों की सरकार कैसे कर लेती थी* ।
*जो दिव्य महापुरुष की सरकार नहीं कर पा रही है.*
*जबकि विदेशों से काला धन वापस आ गया,*
*नोटबंदी से देश का काला धन वापस आ गया,*
*चोरों की सरकार की बनाई गई सरकारी संपत्ति को भी बेचा जा रहा है,*
*तब भी दिव्य पुरुष की "सरकार" नौकरियां, वेतन भत्ते, पेंशन नहीं दे कर ! किसान, मजदूर और आम नागरिक को टेंशन ही दे रही है*।
*सभी की नौकरियां चली गयी, सभी NGO से पैसा प्रधानमंत्री रिलीफ़ फ़ंड में ले जमा करवा लिया*,
*कोई युद्ध भी नहीं हुआ , जीडीपी माइनस मे चल रही है* ।
*और डीजल पेट्रोल पर सब्सिडी की जगह सरकार टैक्स बढ़ा कर 40 रुपये और कमा रही है ,*
*इन्श्योरेंस और म्यूच्यूअल फण्ड पर भी 18% टैक्स से कमा रही है ,*
*और फिर भी सारी जेब खाली,*
*देश का रिज़र्व बैंक में आपातकालीन जमा में से 175 अरब रुपये निकल कर खर्च कर दिये अगर कोई बोल रहा है, तो उसको खालिस्तानी, पाकिस्तानी या देश द्रोही बोला जा रहा है।*
*मेरे ख्याल से युवाओं को तो कम से कम जाग जाना चाहिये* ।
*जो पढ़े लिखे होने का दम भरते है*🙏🏻🙏🏻🙏🏻

10/02/2021
31/12/2020

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