Laddu Rajesh Pandey

Laddu Rajesh Pandey महादेव ब्रम्हाड चला रहे है और नारायण ?

केवल रावलपिंडी पर मत थोपो अपने पापों कोदूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के साँपों कोअपने सिक्के खोटे हों तो गैरों की बन आती ...
13/11/2025

केवल रावलपिंडी पर मत थोपो अपने पापों को
दूध पिलाना बंद करो अब आस्तीन के साँपों को
अपने सिक्के खोटे हों तो गैरों की बन आती है
लालकिले की दहलीजें भी लोहू में सन जाती हैं
-डॉ. हरिओम पंवार

09/01/2022

अहा,,दीर्घप्रतिक्षित पुनीत कर्तव्य(ऋण कहें तो अधिक उचित होगा) निष्पादित।
एक सुच्ची श्रद्धांजलि-
"26 दिसम्बर- वीर बाल दिवस"

जब प्रेरणास्रोत ऐसे चरित्रवाले हों,तभी उनका अनुकरण करने वाली पीढ़ी भी चरित्रवान होती है।

जिनके बलिदान की गाथा सुनकर अश्रुपूरित कंपित हृदय गर्व से भर जाते हैं,वे दशकों तक प्रतिष्ठित होने से क्यों वन्चित रहे,,इसी का उत्तर सिद्ध करता है कि हम कैसे दुर्दिन से सुदिन की ओर बढ़ रहे हैं।सड़क बिजली बुलेट ट्रेन मोबाइल आदि जैसे भौतिक प्रगति के साधन हो सकते हैं,किन्तु मानव समाज,देश का उत्थान तभी सम्भव है जब चारित्रिक उन्नति उत्थान हो...और यह होता है सुच्चे चरित्रों के प्रति नतमस्तक होकर।

अकबर बाबर औरंगजेब टीपू बख्तियार खिलजी जैसे लोगों को नायक पढ़कर देश कहाँ पहुँचा हमनें देखा, अब आवश्यक है कि हमारे इतिहास के सच्चे नायकों के उत्तम कृत्य हम जान पाएँ, उनसे प्रभावित हों और सन्मार्ग पर चलें।

धर्मध्वजा वाहक वीर गुरु गोविन्द सिंह जी और उनके दुधमुँहे साहबजादों के चरणों में हमारा शत शत नमन।

09/01/2022

2015 में मोदी सरकार ने सभी राज्यों से अपने यहाँ मेडिकल कॉलेज लगाए जाने के लिए उसका requirement list माँगा था ..... तेलंगाना और केरल को छोड़कर हर राज्य ने कुछ न कुछ लिया ही था ... बड़े राज्यों ने 7 - 10 मांगे थे ... 2017 में योगी जी ने उत्तर प्रदेश के लिए एक मेडिकल कॉलेज प्रति जिला मांग लिया जिसमें से अब 10 पूर्ण चलित हैं ... 11 पूरा होने वाले वाले हैं और 10 पर काम चालू है ... इसके ऊपर 45 मेडिकल कॉलेज प्लानिंग स्टेज में है ... आज उत्तर प्रदेश मेडिकल सुविधाओं में पूरे भारत के टॉप राज्य में से एक है ....
केरल का भी एक ख़ास बात है ....
केरल के कम्युनिस्ट चीप मिनिस्टर 15 जनवरी को कैपिटलिस्ट अमेरिका को रवन्ना हो रहे हैं ... अपना इलाज कराने को ... कम्युनिज्म को बधाई ...
केरल राज्य कैबिनेट ने आदेश दिया है की उनके कम्युनिस्ट चीप मिनिस्टर का पूरा खर्च tax payer के पैसे से होगा ... कम्युनिज्म को बधाई ..
केरल के कम्युनिस्ट चीप मिनिस्टर को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पाने की अग्रिम शुभकामनाएँ ...
केरल के चीप मिनिस्टर के अनुसार उनका healthcare system भारत में सबसे अच्छा है ....
महाराष्ट्र के साथ कदम कदम मिलाकर कोरोना को फील कराते रहने के लिए केरलियों को बधाई ...
सब केरल के कम्युनिस्ट सरकार को बधाई दो वरना कम्युनिस्ट सबको reject कर देंगे ....
Ranjay tripathi

09/01/2022

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मे मध्यप्रदेश जबलपुर का वासी हूं मुझे वर्तमान मे होने जा रहे पांच राज्यों के चुनाव मे वोट डालने का अधिकार नही केंद्र व राज्य में भाजपा सरकार की अनेकों योजनाएं चल रही है पर मुझे किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला और ना ही मैं इन लाभों को लेने का इच्छुक ही हूँ। लेकिन जब वोटों के अधिकार के प्रयोग का समय आएगा तो मैं अपना समर्थन हमेशा भाजपा को ही दूंगा क्योंकि मै भाजपा को वोट अपना घर चलाने के लिए नहीं अपितु गर्वित राष्ट्र चलाने के लिए करता हूँ।

उत्तरप्रदेश में चुनावो की घोषणा हो चुकी है। सभी सनातनी मित्रों से निवेदन है कि आपसी कड़वाहट भुला कर एक प्रण करें व प्रतिज्ञा लें कि "हिंदुत्व के लिए ही वोट डालूंगा" क्यों कि हिंदुत्व का अर्थ है विकास, सृजन और जीवन का उन्नत आनन्द। उसी हिंदुत्व के संवाहक के रूप में हमारे साथ एक नायक उपस्थित है जो हिंदुत्व व राष्ट्र के गौरव के लिए ही समर्पित है और हम 80% हिंदुओ के लिए ही जीता है। आज योगी जी हिंदुत्व के पर्यायवाची हैं।
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#हिंदुत्व_की_प्रखर_आभा_योगी_बाबा_योगी_बाबा
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09/01/2022

फैसला आपको करना है अब

सैफई का नाच
या
बरसाने की होली....??

कानपुर और कनौज वाले नोटों के बंडल अखिलेश यादव के ही थे🤔चुनाव तारीख की घोषणा के बाद अखिलेश ने कहा : 'हमारे पास डिजिटल कैम...
09/01/2022

कानपुर और कनौज वाले नोटों के बंडल अखिलेश यादव के ही थे🤔
चुनाव तारीख की घोषणा के बाद अखिलेश ने कहा : 'हमारे पास डिजिटल कैम्पेन के लिए पैसे नहीं है.. चुनाव आयोग हमें पैसे दें'
योगी जी - मोदी जी ने, इनके लूट का माल पकड़वाकर रावण की नाभी में तीर मारा है
बबुआ अब छटपटा रहा है
अखिलेश के इस बयान के...... उनकी इस हार की स्वीकारोक्ति के पीछे हम हैं...
हम जिनमें ज्यादातर भाजपा के प्राथमिक सदस्य तक नहीं
हम जिन्हे स्थानीय भाजपा के नेता तक न पहचानते
हम जिनकी कोई राजनीतिक महत्वकांक्षा नहीं
हम जिन्हे किसी पद की चाह नहीं
हम जिन्हे नेता बनने की कोई ख्वाहिश नही...

और हमने ये दिलों में डर कायम कर दिया है विरोधियों के
और हमने दर्ज की है ये मनोवैज्ञानिक जीत...

तो फिर सिर्फ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक ही क्यों...... हम इस बढ़त को जमीन पर भी उतार सकते हैं...
आज हमारी ताक़त को पक्ष और विपक्ष दोनो स्वीकारते हैं....... बस इस ताक़त को बनाये रखना है

हम पार्टियों के कार्यकर्ता नहीं राष्ट्र के सेवक हैं.... #सनातन_के_सिपाही_हैं.......

अपनी ताकत पहचानिए...... अपनी ताकत को राष्ट्र और धर्म के हित इस्तेमाल करिये...

हर मोर्चा फतह करेंगे हम!!

09/01/2022



ज़ाकिर नाइक की एक संस्था हुआ करती थी "IRF". इस संगठन के नाम भारत और दुनिया भर में हजारों हिंदू और सिख लड़कियों का मज़हब परिवर्तन करने का रिकॉर्ड है। इस संगठन के वजूद में आने के बाद इसकी तरह के कई और संगठन वजूद में आ गए जो इसी काम में लिप्त थे। इस ऑर्गेनाइजेशन का पैरेंटेल ऑर्गेनाइजेशन था शेख अहमद दीदात का संगठन IPCI जिसके द्वारा इस्लाम और ईसाई धर्म पर बड़े स्तर पर सेमिनार और सिम्पोजियम आयोजित किए जाते थे।

इन संस्थाओं के माध्यम से जिन भी लड़कियों का मतांतरण हुआ या जो इससे प्रभावित हुई उसमें से कुछ के ऊपर मैंने केस स्टडी की थी जो हिंदू, सिख या ईसाई समाज से थी।

आप यकीन नहीं करेंगे इनमें से ज्यादातर लड़कियां मजहब स्वीकार करने के पूर्व अत्यंत धार्मिक और पांथिक हुआ करती थीं। मतांतरित होने वाली सिख लड़कियां वो थीं जो पहले नियमित रूप से सुबह "सुखमनी साहिब" का पाठ करती थीं। हिंदू लड़कियों में वो थी जो पहले रीति रिवाज से पूरी तरह सनातनी थी और ईसाई लड़कियों में वो जो ननें या बाईबल की अध्येता हुआ करती थीं।

इसका अर्थ मुझे ये समझ आया था कि हम ये सोचते रह जाते हैं कि अगर हम अपने बच्चे को बचपन से ही धार्मिक बनायेंगे, उसे पूजा- पाठ, यज्ञ, जप आदि कराएंगे तो वो ऐसे दुष्चक्र से बचे रह जायेंगे पर ऐसा होता नहीं है क्योंकि ऐसी बच्चियों का जब ब्रेनवाश होता है तो उनको बताया जाता है कि चूंकि तू तो और भी अधिक कुफ्र में मुब्तिला थी इसलिए तेरी तौबा और भी सख्त होगी और यही कारण है कि कन्वर्ट होने के बाद ये लोग भी पक्की दीनी बनकर निकलती है, और भी अधिक मजहबी रिचुअल्स करती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पूर्व के कुफ्र से निजात इसी से है कि वो ओरिजनल से भी अधिक शिद्दत से दीनी फरायज को अंजाम दे।

ऐसी लड़कियां ही ज्यादातर कन्वर्ट होती हैं जिन्हें हम उन्हें हिंदू या सिख संस्कार विधि तो सिखाते हैं पर ये नहीं सिखा पाते कि हिंदुत्व की "आत्मा" क्या है, इसका सार क्या है। हम उन्हें ये नहीं सिखा पाते कि उसके हिंदू होने का प्रयोजन क्या है। क्यों उसे विधाता ने हिंदू बनाया है।

हम उसे ये नहीं सिखा पाते कि विधाता ने उसे हिंदू इसलिए बनाया है ताकि उसके जरिए से ईश्वर उसके द्वारा विश्व का जीव -जगत, विश्व का वनस्पति जगत, विश्व की नदियां, विश्व की समस्त पूजा पद्धतियां, विश्व की समस्त सभ्यताएं, फ्रीडम ऑफ स्पीच, फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन, विचारों को रखने का अधिकार, नास्तिक होने का अधिकार ये सब सुरक्षित रखना चाहता है और नारी को सम्मानित करने का जरिया उसे बनाना चाहता है और इसलिए उसकी जिम्मेदारी एक हिंदू होने के नाते बढ़ जाती है, बल्कि उसके अंदर इनबिल्ट हो जाती है जिसे छोड़ा नहीं जा सकता।

अपनी बनाई समस्त सृष्टि की रक्षा, मनुष्यता की रक्षा करने का जिम्मा उसे ईश्वर ने हिंदू बनाकर सौंपा है जिसे किसी भी सूरत छोड़ा नहीं जा सकता।

हिन्दुत्व का ये Essence मेरे अंदर है इसलिए तप, हवन, पूजा पाठ, तीर्थ यात्रा न करते हुए मैं ऐसा हूं जिसे मत परिवर्तन कराने का कोई लॉजिक मुत्तासिर नहीं कर सकता और इसी Essence के कारण हिंदू धर्म से जुड़ी हर चीज़ से मुझे प्यार है क्योंकि इन्हीं चीजों ने इसे गढ़ा है।

अपने बच्चे को ये Essence_of_Hinduism सिखाइए। पूजा पाठ, जाप, यज्ञ, हवन ये सब सीखे न सीखे उसके प्रति श्रद्धा भाव रखना तो इसके साथ वो अपने आप ही सीख जायेंगे।

हिंदू धर्म का unique selling point (USP) भी यही है। अगर ये आपने उसे ये सिखा दिया तो वो दूसरे के मजहब में बिक कर नहीं बल्कि दूसरों को अपना धर्म बेचकर आएगा।

- अभिजीत

09/01/2022

फिर परीक्षा का वो समय आ गया है!
उठो,जागो और एकजुट होकर सनातन राष्ट्रवाद का विरोध करने वालो को एक बार फिर उन्हे उनके बिलो और बांबियों मे घुसेड़ कर राम मंदिर का कर्ज चुका दो!

यह नीचे की खबर देख लें, 36 साल पहले वही ऐसा ही खूनी संघर्ष हुआ था असम और नागालैंड के बीच, तब तीनों जगह कांग्रेस की सरकार...
31/07/2021

यह नीचे की खबर देख लें, 36 साल पहले वही ऐसा ही खूनी संघर्ष हुआ था असम और नागालैंड के बीच, तब तीनों जगह कांग्रेस की सरकार थी, मगर तब भी समस्या का हल नहीं खोजा गया और अब फिर खूनी संघर्ष हो गया

मिजोरम और असम के बीच सीमा विवाद को लेकर सोमवार को हुई हिंसा का इतिहास बहुत पुराना है। सिर्फ मिजोरम नहीं; नागालैंड अ....

02/07/2021

इतना आसान न समझिए लश्करे तैयबा और आईएसआई के खेल को ?
भारत के भीतर जाल बुना जा रहा है !
निशाना कौन है समझना आसान है !
मकसद है किसी भी तरह यह देश तोडना !

भाजपा शासित राज्यों में ही ऐसा हो रहा हो, यह बात भी नहीं !
दक्षिण भारत के वे राज्य भी अछूते नहीं , जहां आतंकवाद न के समान है !
यह जाल बड़ी चतुराई से कांग्रेस शासित राज्यों में भी काफी भीतर तक फैलाया जा रहा है !
देश की सुरक्षा एजेंसियां इसे देखते हुए काफी सतर्क हो गई हैं !

देश को तोड़ने वाली ताकतें हमेशा सक्रिय रही हैं । खासकर पिछले तीस वर्षों में बहुत अधिक । 90 के दशक में शुरू हुए राममंदिर आंदोलन से दाऊद का खेल शुरू हुआ । बाद में ताज होटल से नया अध्याय और 370 के बाद अगला चैप्टर । हाल में पकड़े गए आतंकवादियों ने अनेक खुलासे किए हैं । अब एक्शन अगेंस्ट चुनिंदा सरकार ने तो मानों सारी हदें तोड़ दी । यह सब इतने तेजी से हो रहा है कि एजेंसियों को पता चलने में देर हो गई । साजिश की जड़ें कश्मीर से बंगाल और यूपी से लेकर तेलंगाना तक फैल गई हैं । खासकर सीमावर्ती राज्यों में काफी गम्भीर हालात हैं ।

अच्छी बात यह है कि समय रहते काफी चीजों का खुलासा हो गया । सीमावर्ती राज्यों में पलायन एक समस्या है । सुदूर पहाड़ियों से बहुत से लोग घरों में ताले लगाकर हमेशा के लिए मैदानों में जा बसे थे । इन क्षेत्रों में जमीनें खरीदकर बसने का काम सुनियोजित तरीके से शुरू हुआ है । ऐसा अरुणाचल से लेकर कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखण्ड में भी हो रहा है । कश्मीर और बंगाल में रोहिंग्या बसाए जा रहे हैं । सामरिक महत्व के अनेक इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगा है । यह बहुत अधिक चिन्ताजनक है ।

देखिये देश सबका है 135 करोड़ लोगों का है । ऐसी कोई भी बात सामने आने पर सभी वर्गों को इसके खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए । देश में जो भी गलत होता है या होगा, उसे टुकड़ों में नहीं बांटा जा सकता । देश के भीतर ये गतिविधियाँ चलाने के लिए चीन द्वारा फंडिंग की जा रही है । पाकिस्तान आईएसआई और पाक सेना द्वारा ट्रेंड लोगों को भारत में धकेल रहा है । पाकिस्तान से आने वाले आतंकवादी भी हैं बड़ी साजिश के लिए राज्यों में जाकर स्थानीय युवाओं को ट्रेनिंग देने वाले एजेंट्स भी । इनकी धरपकड़ छोटे पैमाने पर होती रहती है । जबकि जरूरत अभियान चलाकर बड़ा हाथ एक साथ डालने की है ।

यह बात अब साफ हो चुकी है कि मोदी के आने के बाद देश में चीजें काफी बदली हैं । भारत में पिटी पिटाई डगर के अलावा भी नई डगर पर चला जा सकता है , न कल्पना की गई, न साहस जुटाया गया । अब एक एककर समस्याओं की जड़ें काट डालने की कोशिश है , तो देश के लुटेरों और चीन - पाक परस्तों को दर्द होना लाजमी है । जाहिर है कड़े फैसले होंगे , देश थोड़ा ठिठकेगा , फिर तेजी से आगे बढ़ जाएगा । बॉर्डर्स पर खलबली बनाए रखना दुश्मनों की साजिश है । दुर्भाग्य से इसे मोदी अपच ग्रुप द्वारा राजनीतिक एवम आर्थिक समर्थन मिल रहा है । इस जाल को काफी गम्भीरता से छिन्नभिन्न करना होगा । अच्छी बात है कि ऐसी देशविरोधी गतिविधियों के खिलाफ देश खड़ा हो रहा है ।
Kaushal Sikhaula

27/06/2021

एक बात कोई समझा दो , बिल्कुल भी समझ नहीं आती !
अयोध्या में मन्दिर के लिए जमीन खरीद में घोटाले तो सब गिना रहे हैं , थाने जाकर रिपोर्ट कोई दर्ज नहीं कराता !
आखिर क्यौं ?
प्रथम दृष्टया लगता है कि कहीं नहीं कहीं कोई बात तो है , टीवी पर बहसें भी लगातार हो रही हैं , विपक्षी दल गरमा भी खूब रहे हैं , पर आश्चर्य सारे दस्तावेज चैनलों पर दिखाने वाली कोई भी पार्टी कोर्ट क्यौं नहीं जाती ?
जब तक थाने या कोर्ट नहीं जाएंगे तो तौहमतों और बयानों से क्या फायदा ?
जाइये न जरा , रपट लिखाइये ?

राम मंदिर दुनिया जहान के लिए कितना जरूरी है , हिन्दू से ही नहीं , किसी से भी पूछ लीजिये । करोड़ों लोग होंगे जो मन्दिर निर्माण की प्रक्रिया को भी अपनी यादों में भर लेना चाहते हैं । अभी तो जमीन के भीतर काम चल रहा है । जरा प्रथम तल का निर्माण ही शुरू होने दीजिए , राम के लाखों भक्त निर्माण कार्य देखने के लिए अयोध्या जाएंगे । श्रद्धा और भावनाओं का अनुमान लगाना मुश्किल है । लाखों लोग तो रामलला की जमीन के स्पर्श और उस पवित्र माटी को हृदय पर लगाने के लिए तड़फ रहे हैं । मन्दिर जब बन जाएगा तब तो देश के 110 करोड़ हिंदुओं में से ऐसा कोई होगा ही नहीं , जो अयोध्या न जाए ।

राम मंदिर करीब 500 साल पहले तोड़ा गया , अब अनेक बलिदानों के बाद वापस मिल रहा है । मन्दिर का फैसला चाहे कोर्ट से आया हो , परन्तु केंद्र में यदि मोदी की सरकार न बनती तो राम मंदिर अभी भी नहीं बन पाता । आखिर जिन छद्म धर्मनिर्पेक्षतावादियों ने राम सेतु और अयोध्या को ही नकार दिया था , वे राम मंदिर कैसे बनने देते । कल प्रधानमंत्री ने राम मंदिर की वर्चुअल बैठक में समीक्षा की ।

मोदी न आते तो क्या यह सम्भव था कि कोई प्रधानमंत्री देश के रक्त में बसी अयोध्या की बार बार जानकारी लेता ? बिल्कुल भी नहीं । राम विरोधी लॉबी का वश चलता तो वे सारे साक्ष्य ही मिटा दिए जाते जो कोर्ट में काम आए । याद कीजिये उन नेताओं को जो अयोध्या में मन्दिर के बजाय अस्पताल , विश्वविद्यालय और यहाँ तक कि शौचालय बनाने के बयान दे रहे थे । राममंदिर के लिए जैसा माहौल चाहिए था , वह इस सरकार के आने से ही मिला ।

खैर , राममंदिर अब कोई स्वप्न नहीं , हक़ीकत है । इस बात में कोई आश्चर्य नहीं कि बन जाने के बाद राममंदिर न केवल विश्व के पर्यटन मानचित्र पर शामिल हो जाएगा अपितु विश्व का आठवां आश्चर्य भी बन जाएगा । वैसे तो दक्षिण भारत में आज भी ऐसे दर्जनों विराट मन्दिर हैं , जिनकी खूबसूरती के सामने ताजमहल फीका है , लेकिन राममंदिर को दुनिया का आठवां आश्चर्य बनने से रोक पाना असंभव है । राम तो घट घट के वासी हैं , उनकी महिमा और कथाएं अनंत हैं । भारतीय संस्कृति की पूछें तो राम की अयोध्या , कृष्ण की मथुरा और शिव की काशी युगों से हमारे इतिहास की गवाह हैं । गंगा के किनारे हमारी सभ्यता खड़ी हुई और विष्णु के दशावतार भारत की आत्मा में रचे बसे हैं । ये सभी आज भी जीवंत हैं ।

वैसे रामकाज में बहुत बाधाएं डाली गई । जिन्होंने डाली , वे सभी मिट गए , राम सदा रहेंगे । दरअसल समझना होगा कि हमारी संस्कृति जीवंत है सदा जीवंत । संस्कृति और सभ्यता को न तो कोई मिटा सकता है और न भुला सकता है । सच कहें तो जिस प्रकार आत्मा अजर अमर है , उसी तरह तरह राम भी हैं । राममंदिर बनने दीजिये , कोई विवाद मत खड़ा कीजिये । हाँ , कोर्ट खुले हैं , शौंक से जाइये । करोड़ों लोग चाहते हैं , राममंदिर उनके जीवनकाल में बन जाएं । रामकाज में बाधा डालने से अब न कुछ होगा और न किसी की आस्था कम होगी । तो आइए , रामनाम की सरयू में गोते लगाते हैं ।
Kaushal sikhaula

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