Ambey Devi

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12/03/2016
एक सच्चा गुरु हमेशा हमसे जुड़ा रहता है। भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे साथ न खड़ा हो।प्रेरणा और प्रोत्साहन ही मनुष्य के ...
12/07/2014

एक सच्चा गुरु हमेशा हमसे जुड़ा रहता है। भले ही वह शारीरिक रूप से हमारे साथ न खड़ा हो।

प्रेरणा और प्रोत्साहन ही मनुष्य के मैल को सोने के दिलों में बदल सकता है। लेकिन सिर्फ सच्चा गुरु ही अपने स्तर तक हमें ले जा सकता है। वह सिर्फ अपने जैसे क्लोन तैयार करने की नहीं सोचता, बल्कि वह शिष्यों के अंदर इतनी शक्ति भर देता है कि वे आगे निकल जाते हैं।

'गुरु गोबिंद दोनों खड़े
काके लागू पाय
बलिहारी उस गुरु की
जो गोबिंद दियो दिखाया’
'मेरे गुरु और मेरे भगवान दोनों मेरे सामने खड़े हैं।
मैं सबसे पहले किसके सामने सिर झुकाऊं?
उस गुरु की जय है!
जिसने मेरी भगवान से इस मुलाकात को संभव कर दिखाया है।’
यह संत कबीर के दोहों में से एक का सार है।

निश्चित तौर पर गुरु भगवान का अनमोल उपहार है। श्री परमहंस योगानंद लिखते हैं- 'जब हम जिंदगी की घाटी से अंधानुकरण करते हुए आगे बढ़ रहे हैं, अंधकार में भटक रहे हैं, हमें किसी की मदद की जरूरत है, जिसके पास आंखें हो, एक गुरु... भगवान रहस्यों के जरिए नहीं सीखा सकता, बल्कि वह प्रज्ज्वलित आत्माओं के जरिए जरूर सीखा सकता है.. गुरु-शिष्य रिश्ते में ऐसा ही आलौकिक नियम चरितार्थ होता है।’

जेन में कहावत है- 'जब शिष्य तैयार होता है, तब गुरु प्रकट होता है।’ कोई भी व्यक्ति एक परिपूर्ण शिष्य कैसे बन सकता है? बहुत-सी महिलाएं कृष्ण की भक्त थी, लेकिन एक खास थी- राधा। सभी अन्य भक्त राधा से जलती थी। इस ईर्ष्या की जानकारी कृष्ण को भी थी। एक बार कृष्ण ने सिर में दर्द होने का नाटक किया। अपने आपको बहुत परेशान बताया। परेशानी देखकर शिष्य उनके पास आ गईं। उनसे पूछा क्या हुआ? कृष्ण ने जवाब दिया, 'मेरे सिर में दर्द है।

यह तभी जाएगा जब आप में से कोई मेरे सिर पर चढ़ेगा और पैरों से मालिश करेगा।’ लेकिन शिष्य डर गई। कहने लगीं, 'हम यह नहीं कर सकते! आप भगवान हो। ब्रह्मांड के देवता। अपने पैरों से आपके सिर को छूना बहुत बड़ा पाप होगा।’ तभी राधा आई। उसने देखा कि कृष्ण को बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। उसने भगवान से पूछा, 'मैं आपके लिए क्या कर सकती हूं?’ कृष्ण ने वहीं जवाब दिया, जो पहले दे चुके थे। राधा तत्काल कृष्ण के सिर पर खड़ी हो गई। कृष्ण का दर्द गायब हो गया और वे सो गए। लेकिन दूसरी शिष्याएं नाराज थीं। उन्होंने राधा को वहां से खींचा और अलग ले गई। उन्होंने धमकाया, 'हम तुम्हारी जान ले लेंगे।’ राधा चकित थी। उसने पूछा, 'ऐसा क्यों?’ शिष्यों ने चिल्लाकर जवाब दिया, 'तुमने भगवान के सिर को पैर से छूने की कोशिश की है।’

राधा ने विरोध किया, कहा- 'तो क्या? क्या उन्हें दर्द से आजादी नहीं दिलानी थी?’ शिष्याओं ने कहा- 'इस पाप के लिए तो तुम्हें नरक में भी जगह नहीं मिलेगी।’ राधा मुस्कुराई। उसने कहा- 'ओह, तो तुम्हें इस बात की चिंता है? यदि मैं अपने भगवान को एक सेकंड के लिए भी खुश रख पाई तो मैं नरक में हमेशा के लिए रह सकती हूं।’

राधा की कृष्ण के प्रति बिना किसी शर्त की भक्ति देखकर बाकी महिलाएं उसके सामने नतमस्तक हो गई। उन्हें अब समझ आ गया था कि वह इकलौती ऐसी थी, जिसने अपनी नहीं अपने भगवान के बारे में विचार किया। हकीकत तो यह है कि निश्चित तौर पर इस तरह संपूर्ण निष्ठा और त्याग रखने पर ही गुरु हमें आलौकिक अनुभव देता है।

हमें किसी भी परिस्थिति में पिता, माता, पुत्र, पुत्री, पतिव्रता पत्नी, श्रेष्ठ पति, गुरु, अनाथ स्त्री, बहन, भाई, देवी-देव...
11/07/2014

हमें किसी भी परिस्थिति में पिता, माता, पुत्र, पुत्री, पतिव्रता पत्नी, श्रेष्ठ पति, गुरु, अनाथ स्त्री, बहन, भाई, देवी-देवता और ज्ञानी लोगों का अनादर नहीं करना चाहिए। इनका अनादर करने पर यदि व्यक्ति धनकुबेर भी हो तो उसका खजाना खाली हो जाता है। इन लोगों का अपमान करने वाले व्यक्ति को महालक्ष्मी हमेशा के लिए त्याग देती हैं।

हैलो माँ ... में रवि बोलरहा हूँ....,कैसी हो माँ....?मैं.... मैं…ठीक हूँ बेटे.....,ये बताओ तुम और बहूदोनों कैसे हो?हम दोन...
04/01/2014

हैलो माँ ... में रवि बोल
रहा हूँ....,कैसी हो माँ....?
मैं.... मैं…ठीक हूँ बेटे.....,ये बताओ तुम और बहू
दोनों कैसे हो?
हम दोनों ठीक है
माँ...आपकी बहुत याद
आती है…, ..अच्छा सुनो माँ,में अगले महीने
इंडिया आ रहा हूँ.....तुम्हें लेने।
क्या...? हाँ माँ....,अब हम सब साथ ही रहेंगे....,
नीतू कह रही थी माज़ी को अमेरिका ले आओ
वहाँ अकेली बहुत परेशान हो रही होंगी।
हैलो ....सुनरही हो माँ...?“हाँ...ह
ाँ बेटे...“,बूढ़ी आंखो से खुशी की अश्रुधारा बह
निकली,बेटे और बहू का प्यार नस नस में दौड़ने
लगा।
जीवन के सत्तर साल गुजार चुकी सावित्री ने
जल्दी से अपने पल्लू से आँसू पोंछे और बेटे से बात
करने लगी।
पूरे दो साल बाद बेटा घर आ रहा था।
बूढ़ी सावित्री ने मोहल्ले भरमे दौड़ दौड़ कर ये
खबर सबको सुना दी।
सभी खुश थे की चलो बुढ़ापा चैनसे बेटे और बहू के
साथ गुजर जाएगा।
रवि अकेला आया था,उसने कहा की माँ हमे
जल्दी ही वापिस जाना है इसलिए
जो भी रुपया पैसा किसी से लेना है वो लेकर
रखलों और तब तक मे किसी प्रोपेर्टी डीलर से
मकान की बात करता हूँ।
“मकान...?”, माँ ने पूछा। हाँ माँ,अब ये मकान
बेचना पड़ेगा वरना कौन इसकी देखभाल करेगा।
हम सबतो अब अमेरिका मे ही रहेंगे।बूढ़ी आंखो ने
मकान के कोने कोने को ऐसे निहारा जैसे
किसी अबोध बच्चे को सहला रही हो।
आनन फानन और औने-पौने दाम मे रवि ने मकान
बेच दिया।
सावित्री देवी ने वो जरूरी सामान
समेटा जिस से उनको बहुत ज्यादा लगाव था।
रवि टैक्सी मँगवा चुका था। एयरपोर्ट पहुँचकर
रवि ने कहा,”माँ तुम यहाँ बैठो मे अंदर जाकर
सामान की जांच और बोर्डिंग और
विजा का काम निपटा लेता हूँ।
““ठीक है बेटे।“,सावित्री देवी वही पास
की बेंच पर बैठ गई।
काफी समय बीत चुका था। बाहर
बैठी सावित्री देवी बार बार उस दरवाजे
की तरफ देख रही थी जिसमे
रवि गया था लेकिन अभी तक बाहर
नहीं आया।‘
शायद अंदर बहुत भीड़ होगी...’,सोचकर
बूढ़ी आंखे फिर से टकट की लगाए देखने लगती।
अंधेरा हो चुका था। एयरपोर्ट के
बाहरगहमागहमी कम हो चुकी थी।
“माजी...,किस से मिलना है?”,एक
कर्मचारी नेवृद्धा से
पूछा ।
“मेरा बेटा अंदर गया था.....टिकिट लेने,वो मुझे
अमेरिका लेकर
जा रहा है ....”,सावित्री देबी ने घबराकर
कहा।
“लेकिन अंदर तो कोई पैसेंजर
नहीं है,अमेरिका जाने वाली फ्लाइट
तो दोपहर मे ही चली गई। क्या नाम था आपके
बेटे
का?” ,कर्मचारी ने सवाल किया।
“र....रवि. ...”, सावित्री के चेहरे पे
चिंता की लकीरें उभर आई।
कर्मचारी अंदर गया और कुछ देर बाद बाहर आकर
बोला,“माजी....
आपका बेटा रवि तो अमेरिका जाने
वाली फ्लाइट से कब का जा चुका...।”“क्या.
? ”
वृद्धा कि आखो से आँसुओं का सैलाब फुट पड़ा।
बूढ़ी माँ का रोम रोम कांप उठा। किसी तरह
वापिस घर पहुंची जो अब बिक चुका था।
रात में घर के बाहर चबूतरे पर ही सो गई।सुबह हुई
तो दयालु मकान मालिक ने एक कमरा रहने
को दे दिया।
पति की पेंशन से घर का किराया और खाने
का काम चलने
लगा।
समय गुजरने लगा। एक दिन मकान मालिक ने
वृद्धा से पूछा।
“माजी... क्यों नही आप अपने
किसी रिश्तेदार के यहाँ चली जाए,अब
आपकी उम्र भी बहुत हो गई,अकेली कब तक रह
पाएँगी।“
“हाँ,चली तो जाऊँ,लेकिन कल
को मेरा बेटा आया तो..?,
यहाँ फिर कौन उसका ख्याल रखेगा?“......
आखँ से आसू आने लग गए दोस्तों ....!!!
माँ बाप का दिल कभी मत
दुखाना |

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